दुद्धी (सोनभद्र)। पंडित दीनदयाल उपाध्याय की 110वीं जन्म जयंती के अवसर पर गुरुवार की रात अमृत वर्षा के बीच दुद्धी में भव्य काव्य संध्या का आयोजन किया गया। पंडित दीनदयाल उपाध्याय विचार मंच दुद्धी सोनभद्र के तत्वावधान में आयोजित कार्यक्रम में साहित्य, राष्ट्रभाव और सनातन संस्कृति का अद्भुत संगम देखने को मिला। रात आठ बजे शुरू हुआ कार्यक्रम शुक्रवार की भोर करीब तीन बजे तक चलता रहा और श्रोता देर रात तक काव्य रस में डूबे रहे।

कार्यक्रम का शुभारंभ प्रसाद कुमार पब्लिक स्कूल की टीम द्वारा संगीत के साथ प्रस्तुत ‘वंदे मातरम्’ गीत से हुआ। इसके बाद डॉ. वीर अभिमन्यु ‘मनु’ ने वायलिन के सुरों से वातावरण को भावपूर्ण बना दिया। काशी हिंदू विश्वविद्यालय के साहित्य शोधार्थियों ने मीरा, सूरदास, रसखान और तुलसीदास की रचनाओं की भावधारा को अपनी प्रस्तुति के माध्यम से जीवंत कर श्रोताओं के हृदय तक पहुंचाया |
काव्य संध्या में कवि सूर्यकांत त्रिपाठी ‘निराला’, सुमित्रानंदन पंत और रामधारी सिंह ‘दिनकर’ की काव्य परंपरा की झलक भी देखने को मिली। समसामयिक विषयों पर व्यंग्य और राष्ट्रभाव से ओतप्रोत प्रस्तुतियों ने श्रोताओं को खूब प्रभावित किया। वहीं सुभद्रा कुमारी चौहान की वीर रस परंपरा को भी कवियों ने अपनी ओजपूर्ण प्रस्तुतियों से जीवंत किया।
कवि अमन भदौरिया, आकाश अगम, हिमांशु सिंह ‘सनातनी’, नंदलाल जी ‘नंदा’, डॉ. लखन राम ‘जंगली’, सूर्यकांत जायसवाल, यथार्थ विष्णु सहित अन्य कवियों ने शानदार काव्य पाठ कर खूब तालियां बटोरीं। समसामयिक व्यंग्य की प्रस्तुति “100 करोड़ हिंदू हैं, लेकिन हिंदुस्तान नहीं दिखता” ने भी श्रोताओं का ध्यान आकर्षित किया।
कार्यक्रम के मुख्य अतिथि अंतरराष्ट्रीय कथावाचक पंडित दिलीप कृष्ण भारद्वाज जी महाराज ने अपने आशीर्वचन में पंडित दीनदयाल उपाध्याय के जीवन, चिंतन और राष्ट्रसेवा के प्रसंगों को रेखांकित किया। उन्होंने उनके विचारों और एकात्म मानववाद की प्रासंगिकता पर प्रकाश डालते हुए उपस्थित लोगों को आशीर्वचन प्रदान किया।
मुख्य वक्ता संतोष सिंह, राष्ट्रीय अध्यक्ष विश्व वैदिक सनातन न्यास, वाराणसी तथा डॉ. सुमन राव ने भी अपने विचार व्यक्त किए। कार्यक्रम की अध्यक्षता डॉ. लवकुश प्रजापति ने की। आगंतुक अतिथियों का स्वागत एवं सम्मान काव्य पाठ के बीच किया गया।
कार्यक्रम का संचालन विचार मंच के महामंत्री जितेंद्र कुमार चंद्रवंशी ने किया। आयोजन को सफल बनाने में पंडित दीनदयाल उपाध्याय विचार मंच परिवार के पदाधिकारियों एवं सदस्यों की महत्वपूर्ण भूमिका रही।
आयोजक मंडल ने कार्यक्रम में पहुंचे सभी सम्मानित अतिथियों, कवियों, साहित्यकारों, श्रोताओं, नगरवासियों एवं क्षेत्रवासियों के प्रति आभार व्यक्त करते हुए कहा कि उनका सहयोग और सहभागिता ही इस अद्भुत एवं अलौकिक काव्य संध्या की सफलता का आधार रही।











