GPS फोटो में तारीख और समय दर्ज होने का दावा, सरकारी संपत्ति को नुकसान पहुंचने पर उठे सवाल; जिला प्रशासन से तत्काल जांच और कार्रवाई की मांग
कोन, सोनभद्र। कोन स्थित उच्च प्राथमिक विद्यालय में पुराने भवन को नीलामी की प्रक्रिया पूरी होने से पहले ही JCB मशीन से गिराए जाने का मामला सामने आया है। आरोप है कि भवन ध्वस्त करने के दौरान वहां रखी किताबें मलबे में दब गईं, जिससे उन्हें नुकसान पहुंचा। इस घटना को लेकर संबंधित विभाग की कार्यप्रणाली पर सवाल खड़े हो रहे हैं। मामले से संबंधित GPS फोटो उपलब्ध कराए जा रहे हैं, जिनमें तारीख और समय दर्ज होने की बात कही जा रही है।

नीलामी से पहले भवन गिराने की आखिर क्या थी जल्दबाजी?
मामले में सबसे बड़ा सवाल यह है कि जब पुराने भवन और उससे संबंधित सामग्री की नीलामी की प्रक्रिया अपनाई जानी थी, तो उससे पहले JCB मशीन से भवन को क्यों गिराया गया? क्या ध्वस्तीकरण से पहले आवश्यक विभागीय अनुमति, सामग्री का मूल्यांकन और सुरक्षा संबंधी इंतजाम किए गए थे? इन सवालों का जवाब संबंधित विभाग को देना चाहिए।

मलबे में दबकर क्षतिग्रस्त हुईं किताबें, जिम्मेदार कौन?
आरोप है कि भवन को गिराने के दौरान किताबें मलबे में दब गईं और क्षतिग्रस्त हो गईं। यदि ये विद्यालय की किताबें थीं, तो यह गंभीर चिंता का विषय है। किताबें बच्चों की पढ़ाई के लिए महत्वपूर्ण संसाधन हैं। ऐसे में उनकी सुरक्षा के लिए आवश्यक व्यवस्था क्यों नहीं की गई? क्या ध्वस्तीकरण से पहले किताबों को सुरक्षित स्थान पर हटाया गया था? पूरे मामले की जांच कर इन सवालों का जवाब सामने लाना जरूरी है।
GPS फोटो से सामने आ सकते हैं अहम तथ्य
घटना से संबंधित GPS फोटो में तारीख और समय दर्ज होने की बात कही जा रही है। इन तस्वीरों की प्रामाणिकता की जांच कर ध्वस्तीकरण की तारीख, समय और घटनास्थल से जुड़े तथ्यों का सत्यापन किया जा सकता है। तस्वीरों का मिलान विभागीय आदेशों, नीलामी संबंधी अभिलेखों और संबंधित अधिकारियों के बयानों से कराया जाना चाहिए।
जिला प्रशासन तत्काल ले संज्ञान
कोन के उच्च प्राथमिक विद्यालय के इस मामले में जिला प्रशासन, बेसिक शिक्षा विभाग और संबंधित अधिकारियों से मांग है कि मामले की निष्पक्ष जांच कराई जाए। भवन ध्वस्तीकरण की अनुमति, नीलामी की प्रक्रिया, किताबों को हुए नुकसान और जिम्मेदार लोगों की भूमिका की जांच की जाए। यदि नियमों के उल्लंघन या लापरवाही की पुष्टि होती है, तो संबंधित लोगों के विरुद्ध नियमानुसार कठोर कार्रवाई की जाए।
बच्चों की शिक्षा से जुड़े संसाधनों की सुरक्षा में लापरवाही के आरोपों को नजरअंदाज नहीं किया जाना चाहिए। अब देखना यह है कि जिम्मेदार अधिकारी इस मामले में कब तक संज्ञान लेते हैं और क्षतिग्रस्त किताबों सहित सरकारी संपत्ति को हुए नुकसान पर क्या कार्रवाई करते हैं।











