August 7, 2026 2:10 am

Written By

Share करें

✓ Link copy हो गया!

सम्बंधित जानकारी

नाग पंचमी 2026: कब है, क्या है पूजा का शुभ मुहूर्त? जानें सही पूजन विधि और धार्मिक महत्व

Nag Panchami 2026: सनातन धर्म में श्रावण (सावन) मास के शुक्ल पक्ष की पंचमी तिथि को मनाया जाने वाला नाग पंचमी का पर्व भगवान शिव और नाग देवता की आराधना के लिए अत्यंत शुभ माना जाता है। वर्ष 2026 में 17 अगस्त, सोमवार को नाग पंचमी का पर्व मनाया जाएगा। खास बात यह है कि इस दिन सावन सोमवार का दुर्लभ संयोग भी बन रहा है, जिससे शिव पूजा और नाग पूजन का महत्व कई गुना बढ़ जाता है।

नाग पंचमी 2026: तिथि और शुभ मुहूर्त

  • नाग पंचमी: 17 अगस्त 2026, सोमवार
  • पंचमी तिथि प्रारंभ: 16 अगस्त 2026, शाम 4:52 बजे
  • पंचमी तिथि समाप्त: 17 अगस्त 2026, शाम 5:00 बजे
  • नाग पूजा का शुभ मुहूर्त: प्रातः 6:04 बजे से 8:39 बजे तक
  • पूजा अवधि: लगभग 2 घंटे 35 मिनट

उदयातिथि के आधार पर नाग पंचमी का पर्व 17 अगस्त को मनाया जाएगा।

नाग पंचमी 2026 की सही पूजन विधि

1. स्नान और संकल्प

प्रातःकाल ब्रह्म मुहूर्त में उठकर स्नान करें, स्वच्छ वस्त्र धारण करें और व्रत एवं पूजा का संकल्प लें।

2. नाग देवता की स्थापना

पूजा स्थान पर लकड़ी की चौकी पर लाल या पीला वस्त्र बिछाएं। उस पर मिट्टी, चांदी या तांबे की नाग देवता की प्रतिमा स्थापित करें। यदि प्रतिमा उपलब्ध न हो तो चौकी या दीवार पर गोबर से नाग-नागिन का प्रतीक बनाकर पूजा की जा सकती है।

3. भगवान शिव और नाग देवता का अभिषेक

सबसे पहले भगवान शिव का जल एवं कच्चे दूध से अभिषेक करें। इसके बाद नाग देवता की प्रतिमा पर तांबे के लोटे से जल और दूध अर्पित करें।

महत्वपूर्ण: जीवित सांपों को दूध पिलाना उनके स्वास्थ्य के लिए हानिकारक होता है। इसलिए केवल शिवलिंग या नाग देवता की प्रतिमा पर ही दूध और जल अर्पित करें।

4. पूजन सामग्री अर्पित करें

नाग देवता को हल्दी, कुमकुम, रोली, अक्षत, दूर्वा, बेलपत्र और सुगंधित पुष्प अर्पित करें।

5. विशेष भोग

इस दिन धान का लावा (खील), भुने हुए चने, गुड़, दूध से बनी मिठाइयां तथा अन्य सात्विक प्रसाद का भोग लगाया जाता है।

6. मंत्र जाप

पूजा के समय नव नागों—अनंत, वासुकी, शेष, पद्मनाभ, कंबल, शंखपाल, धृतराष्ट्र, तक्षक और कालिया—का स्मरण करें तथा निम्न मंत्र का जाप करें—

“ॐ नवकुलाय विद्यमहे विषदंताय धीमहि तन्नः सर्पः प्रचोदयात्॥”

सरल मंत्र:

  • ॐ नागदेवतायै नमः।
  • ॐ नमः शिवाय।

7. आरती और क्षमा प्रार्थना

धूप-दीप से भगवान शिव एवं नाग देवता की आरती करें और पूजा में हुई किसी भी भूल-चूक के लिए क्षमा याचना करें।

नाग पंचमी का धार्मिक और ज्योतिषीय महत्व

कालसर्प दोष एवं राहु-केतु दोष की शांति

ज्योतिष मान्यताओं के अनुसार जिन लोगों की कुंडली में कालसर्प दोष या राहु-केतु से संबंधित बाधाएं हों, उनके लिए इस दिन भगवान शिव का रुद्राभिषेक, नाग पूजा तथा महामृत्युंजय मंत्र का जाप विशेष फलदायी माना जाता है।

सर्प भय से रक्षा

धार्मिक मान्यता है कि नाग पंचमी के दिन श्रद्धापूर्वक पूजा करने से परिवार को विषैले जीवों के भय से सुरक्षा तथा सुख-समृद्धि का आशीर्वाद प्राप्त होता है।

नाग पंचमी पर रखें ये सावधानियां

  • जीवित सांपों को दूध न पिलाएं और उन्हें किसी प्रकार की हानि न पहुंचाएं।
  • प्रकृति एवं वन्यजीवों का सम्मान करें।
  • सात्विक भोजन ग्रहण करें और क्रोध, हिंसा तथा नकारात्मक विचारों से दूर रहें।
  • भगवान शिव और नाग देवता का स्मरण कर परिवार की सुख-समृद्धि और आरोग्य की कामना करें।

अस्वीकरण: नाग पंचमी से जुड़े धार्मिक और ज्योतिषीय फल विभिन्न शास्त्रीय मान्यताओं एवं परंपराओं पर आधारित हैं। इन्हें आस्था के रूप में ग्रहण करें।

Digital Bharat News
Author: Digital Bharat News

Digital Bharat News डेस्क पर प्रकाशित प्रत्येक समाचार हमारी संपादकीय टीम की सख्त जांच-परख और सत्यापन प्रक्रिया से गुजरता है। हमारे स्ट्रिंगर्स, विश्वसनीय स्रोतों और अनुभवी पत्रकारों द्वारा तैयार की गई ग्राउंड रिपोर्ट्स, स्पेशल रिपोर्ट्स, विशेष साक्षात्कार और रीयल-टाइम अपडेट्स को वरिष्ठ संपादकों द्वारा तथ्यों, स्रोतों और संदर्भों के आधार पर सावधानीपूर्वक सत्यापित किया जाता है। हमारा उद्देश्य पाठकों तक तेज़, निष्पक्ष, सटीक और भरोसेमंद समाचार पहुँचाना है, ताकि वे हर महत्वपूर्ण घटना की प्रमाणिक और संतुलित जानकारी प्राप्त कर सकें।

error: Content is protected !!