लखनऊ। उत्तर प्रदेश के पूर्व पुलिस महानिदेशक (डीजीपी) एवं राज्यसभा सांसद बृज लाल ने प्रदेश में नकल संस्कृति और भर्ती प्रक्रियाओं में अनियमितताओं को लेकर समाजवादी पार्टी (सपा) पर निशाना साधा है। उन्होंने आरोप लगाया कि पिछले तीन दशकों में प्रतियोगी परीक्षाओं में नकल, पेपर लीक और भर्ती घोटालों की जड़ें सपा शासनकाल में मजबूत हुईं।

बृज लाल ने अपने लेख में कहा कि 1992 में लागू नकल विरोधी कानून को बाद की सरकारों में प्रभावी ढंग से लागू नहीं किया गया। उनका दावा है कि सेल्फ-सेंटर (अपने ही विद्यालय में परीक्षा) जैसी व्यवस्थाओं के कारण नकल माफिया को बढ़ावा मिला और परीक्षा प्रणाली की विश्वसनीयता प्रभावित हुई।
उन्होंने आरोप लगाया कि वर्ष 2012 से 2017 के बीच विभिन्न प्रतियोगी परीक्षाओं में पेपर लीक, भर्ती में धांधली, भाई-भतीजावाद और भ्रष्टाचार के कई मामले सामने आए। लेख में मेडिकल प्रवेश परीक्षा, प्रशासनिक सेवा परीक्षा, ग्राम विकास अधिकारी भर्ती तथा पुलिस भर्ती जैसी प्रक्रियाओं का उल्लेख करते हुए इन पर उठे विवादों का हवाला दिया गया है।
बृज लाल ने यह भी दावा किया कि उस समय भर्ती प्रक्रियाओं में राजनीतिक हस्तक्षेप और जातीय पक्षपात के आरोपों से युवाओं का भरोसा कमजोर हुआ। उनके अनुसार, इससे मेधावी अभ्यर्थियों को नुकसान उठाना पड़ा।

वहीं, उन्होंने मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ सरकार की परीक्षा प्रणाली में सुधार के प्रयासों की सराहना की। बृज लाल के अनुसार, 2017 के बाद राज्य सरकार ने नकल और पेपर लीक रोकने के लिए कड़ा कानून लागू किया, जिसमें दोषियों के खिलाफ आजीवन कारावास, भारी जुर्माना तथा परीक्षा संचालन एजेंसियों पर सख्त कार्रवाई जैसे प्रावधान किए गए हैं। उन्होंने कहा कि परीक्षा केंद्रों पर सीसीटीवी निगरानी, बहु-स्तरीय सुरक्षा व्यवस्था और प्रशासनिक जवाबदेही जैसी व्यवस्थाओं से परीक्षा प्रणाली अधिक पारदर्शी बनी है।
बृज लाल ने कहा कि उत्तर प्रदेश जैसे बड़े राज्य में युवाओं के भविष्य के लिए निष्पक्ष और पारदर्शी परीक्षा एवं भर्ती व्यवस्था अत्यंत आवश्यक है।
(नोट: यह लेख राज्यसभा सांसद एवं उत्तर प्रदेश के पूर्व डीजीपी बृज लाल द्वारा व्यक्त विचारों पर आधारित है। इसमें लगाए गए आरोप उनके दावे हैं। संबंधित पक्ष की प्रतिक्रिया इस लेख में शामिल नहीं है।)










