October 31, 2026 3:33 pm

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विंढमगंज-कोन क्षेत्र में निजी स्कूलों की मान्यता पर उठे सवाल, कागजों में मानक पूरे तो धरातल पर क्यों दिखती हैं कमियां?

स्कूली वाहनों में क्षमता से अधिक बच्चों को बैठाने का आरोप, मान्यता के अनुरूप शिक्षण माध्यम और विद्यालयों की सुविधाओं की जांच की उठी मांग

विंढमगंज (सोनभद्र)। विंढमगंज-कोन क्षेत्र में संचालित निजी विद्यालयों की मान्यता, शिक्षण व्यवस्था और बच्चों की सुरक्षा को लेकर सवाल उठने लगे हैं। विद्यालयों को उत्तर प्रदेश सरकार से मान्यता तो मिल जाती है, लेकिन धरातल पर निर्धारित मानकों का कितना पालन हो रहा है, इसकी निष्पक्ष जांच जरूरी है। मान्यता देने से पहले विद्यालयों का स्थलीय निरीक्षण और मान्यता मिलने के बाद नियमित निगरानी की व्यवस्था पर भी सवाल खड़े हो रहे हैं।

विद्यालयों में पर्याप्त कक्षाएं, योग्य शिक्षक, स्वच्छ पेयजल, छात्र-छात्राओं के लिए अलग-अलग शौचालय, सुरक्षित भवन और खेलकूद की सुविधाएं उपलब्ध होनी चाहिए। इसके बावजूद यदि कहीं निर्धारित मानकों की अनदेखी हो रही है तो शिक्षा विभाग को स्थलीय निरीक्षण कर वास्तविक स्थिति स्पष्ट करनी चाहिए।

वहीं क्षेत्र के कुछ निजी विद्यालयों में मान्यता प्राप्त शिक्षण माध्यम और वास्तविक पढ़ाई के माध्यम को लेकर भी जांच की आवश्यकता है। कई विद्यालय अंग्रेजी माध्यम से शिक्षा देने का दावा करते हैं। ऐसे में विभाग यह स्पष्ट करे कि संबंधित विद्यालयों को किस माध्यम और किन कक्षाओं तक की मान्यता प्राप्त है तथा वास्तविक शिक्षण व्यवस्था क्या है। अभिभावकों को भी विद्यालय की मान्यता और सुविधाओं की सही जानकारी मिलनी चाहिए।

स्कूली वाहनों में बच्चों की सुरक्षा भी गंभीर मुद्दा

विद्यालयों में बच्चों को लाने-ले जाने वाले वाहनों की स्थिति भी चिंता का विषय है। आरोप है कि कुछ स्कूली वाहनों में निर्धारित क्षमता से अधिक बच्चों को भेड़-बकरियों की तरह ठूंसकर बैठाया जाता है। इससे बच्चों की सुरक्षा खतरे में पड़ सकती है। परिवहन विभाग को ऐसे वाहनों की फिटनेस, परमिट, बीमा, चालक का लाइसेंस, सीटों की संख्या और सुरक्षा व्यवस्था की जांच करनी चाहिए। ओवरलोडिंग करने वाले वाहनों के विरुद्ध सख्त कार्रवाई जरूरी है।

शिक्षा और परिवहन विभाग से जांच की मांग

क्षेत्रवासियों और अभिभावकों का कहना है कि विंढमगंज-कोन क्षेत्र के निजी विद्यालयों की मान्यता, शिक्षकों की योग्यता, शिक्षण माध्यम और बुनियादी सुविधाओं की जांच कराई जाए। साथ ही स्कूली वाहनों की नियमित जांच के लिए अभियान चलाया जाए।

अब सवाल यह है कि मान्यता मिलने के बाद विद्यालयों की निगरानी कौन करता है और बच्चों की सुरक्षा के साथ लापरवाही बरतने वालों पर कार्रवाई कब होगी? शिक्षा के नाम पर संचालित संस्थानों में नियमों का पालन सुनिश्चित करना और बच्चों को सुरक्षित वातावरण देना संबंधित विभागों की प्राथमिक जिम्मेदारी होनी चाहिए।

VIKASH RAGHUWANSHI
Author: VIKASH RAGHUWANSHI

संपादक | सामाजिक कार्यकर्ता 📍 कचनरवा/कोन, सोनभद्र, उत्तर प्रदेश 📰 स्थानीय खबरों की बुलंद आवाज़ समाजहित एवं जनसमस्याओं के लिए सदैव तत्पर। गांव, गरीब और आम जनता की आवाज़ को प्रमुखता से उठाना मेरा उद्देश्य है। सच • निष्पक्षता • जनसेवा जनहित के मुद्दों को सामने लाना और समाज के प्रति अपनी जिम्मेदारी निभाना मेरा संकल्प है।

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