जीमूतवाहन की पूजा-अर्चना कर सुख-समृद्धि और आरोग्य की कामना
दुद्धी, सोनभद्र। संतान की दीर्घायु, आरोग्य और सुख-समृद्धि की कामना को लेकर शनिवार को दुद्धी क्षेत्र में जीवित्पुत्रिका (जितिया) व्रत की धूम रही। माताओं ने पूरे दिन निर्जला व्रत रखकर संध्या बेला में विधि-विधान से भगवान जीमूतवाहन का पूजन-अर्चन किया और अपनी संतानों के मंगलमय जीवन की कामना की।

कस्बे के शिवाजी तालाब स्थित शिव मंदिर, संकट मोचन मंदिर, माँ काली मंदिर, डीहवार बाबा मंदिर, लौवा पहाड़ी स्थित हीरेश्वर मंदिर, कैलाश कुंज,नदी,तालाब एवं छठ घाट सहित आसपास के गांवों के प्राचीन मंदिरों, तालाबों और नदी घाटों पर व्रती महिलाओं की भीड़ रही। महिलाओं ने शाम को स्नान-ध्यान के बाद भगवान जीमूतवाहन की पूजा की और व्रत की कथा सुनी।
इस दौरान पुरोहित रवींद्र शुक्ला ने जीवित्पुत्रिका व्रत की कथा सुनाते हुए कहा कि भगवान जीमूतवाहन दया, त्याग और परोपकार के प्रतीक माने जाते हैं। उन्होंने नागवंशी युवक को गरुड़ के संकट से बचाने के लिए स्वयं को उसके स्थान पर प्रस्तुत कर दिया था। उनके इस अद्भुत त्याग से प्रसन्न होकर देवताओं ने जीवन रक्षा का आशीर्वाद दिया।
उन्होंने कहा कि जीवित्पुत्रिका व्रत मां के निःस्वार्थ प्रेम, त्याग, समर्पण और संतान के प्रति अटूट विश्वास का प्रतीक है। माताएं निर्जला व्रत रखकर अपनी संतानों के दीर्घायु, स्वस्थ एवं सुखी जीवन की कामना करती हैं।
रविवार की सुबह व्रती महिलाएं स्नान-ध्यान एवं पूजा-अर्चना के बाद विधि-विधान से व्रत का पारण करेंगी। इसके साथ ही जीवित्पुत्रिका व्रत का समापन होगा।











