न्यायालय के आदेश के बाद भी नहीं मिला कब्जा, प्रार्थी ने राजस्व व पुलिस टीम पर लगाए गंभीर आरोप
दिरगज का दावा—नापी के बाद टीम ने कब्जा तो दिलाया, लेकिन कुछ देर बाद छोड़ने को कहा; थाना प्रभारी पर भी गंभीर आरोप
(दुद्धी सोनभद्र रिपोर्ट नितेश कुमार)
दुद्धी/सोनभद्र। न्यायालय उप जिलाधिकारी, दुद्धी-सोनभद्र द्वारा पारित आदेश के अनुपालन को लेकर अब मामला एक बार फिर चर्चा में आ गया है। ग्राम महुली निवासी दिरगज पुत्र रामनन्दन ने आरोप लगाया है कि न्यायालय के आदेश के बावजूद उन्हें विवादित भूमि पर स्थायी रूप से कब्जा नहीं मिल पा रहा है। प्रार्थी का कहना है कि कुछ दिन पूर्व राजस्व विभाग की टीम मौके पर पहुंची और भूमि की नापी करने के बाद उसे कब्जा भी दिलाया गया, लेकिन बाद में राजस्व कर्मियों द्वारा कब्जा छोड़ देने की बात कही गई।
प्रार्थी के अनुसार, संबंधित मामले में न्यायालय उप जिलाधिकारी, दुद्धी द्वारा 01 अगस्त 2025 को आदेश पारित किया गया था। मामला वाद संख्या टी202516660205663, दिरगज बनाम रामचन्द्र व अन्य, अंतर्गत धारा 134, उत्तर प्रदेश राजस्व संहिता, 2006 से संबंधित है। मामला ग्राम जाताजुआ, परगना एवं तहसील दुद्धी, जनपद सोनभद्र स्थित भूमि से जुड़ा बताया गया है।
न्यायालय के आदेश में वादी की भूमि गाटा संख्या 934ख, रकबा 0.0070 हेक्टेयर तथा गाटा संख्या 945, रकबा 0.0510 हेक्टेयर, कुल दो गाटों का कुल रकबा 0.0580 हेक्टेयर बताया गया है। आदेश में विवादित भूमि से संबंधित प्रतिवादियों को हटाते हुए वादी को शांतिपूर्ण कब्जा दिलाए जाने का निर्देश दिया गया था।
नापी के बाद कब्जा दिलाने का प्रार्थी ने किया दावा
दिरगज पुत्र रामनन्दन का कहना है कि न्यायालय के आदेश के अनुपालन के लिए कुछ दिन पहले लेखपाल एवं राजस्व विभाग की टीम मौके पर पहुंची। टीम द्वारा संबंधित भूमि की नापी की गई और नापी के बाद प्रार्थी को मौके पर कब्जा भी दिलाया गया। हालांकि, प्रार्थी का आरोप है कि कब्जा दिलाने के बाद राजस्व कर्मियों द्वारा उन्हें वहां से कब्जा छोड़ देने के लिए कहा जाने लगा।
प्रार्थी के मुताबिक, इस दौरान राजस्व विभाग के कर्मचारियों तथा लेखपाल ओम राजेश्वर सहित संबंधित कर्मियों से भी इस संबंध में बातचीत हुई। प्रार्थी का कहना है कि न्यायालय का स्पष्ट आदेश होने के बावजूद यदि मौके पर कब्जा दिलाने के बाद उसे वापस छोड़ने के लिए कहा जा रहा है तो इससे वह असमंजस की स्थिति में है।
थाना प्रभारी से भी कार्रवाई की मांग का दावा
प्रार्थी ने यह भी आरोप लगाया कि जब उसने मामले को लेकर विंढमगंज थाना प्रभारी से संपर्क किया और न्यायालय के आदेश का हवाला देते हुए कार्रवाई की मांग की, तो उसे कथित तौर पर यह कहा गया कि “जहां आपको जाना है, वहां जाइए, यहां से नहीं हो पाएगा। आपको आदेश जहां से मिला है, आप वहीं पर जाएं और उन्हीं से कार्रवाई कराएं।”
प्रार्थी के अनुसार, वह न्यायालय के आदेश की प्रति लेकर अपनी समस्या के समाधान की उम्मीद में अधिकारियों के पास पहुंचा था, लेकिन उसे अपेक्षित सहयोग नहीं मिला। प्रार्थी का कहना है कि यदि न्यायालय द्वारा आदेश पारित किया जा चुका है और उसके अनुपालन के लिए राजस्व एवं पुलिस विभाग की संयुक्त टीम भी गठित की गई है, तो फिर मौके पर आदेश का पूर्ण रूप से अनुपालन क्यों नहीं कराया जा रहा है।
प्रार्थी ने मिलीभगत का लगाया आरोप
दिरगज ने राजस्व विभाग के कुछ कर्मचारियों एवं पुलिस कर्मियों पर कब्जाधारियों से मिलीभगत का गंभीर आरोप भी लगाया है। प्रार्थी का आरोप है कि इसी वजह से न्यायालय का आदेश होने और भूमि की नापी किए जाने के बावजूद उसे वास्तविक एवं शांतिपूर्ण कब्जा नहीं मिल पा रहा है।
हालांकि, मिलीभगत के इन आरोपों की स्वतंत्र रूप से पुष्टि नहीं हुई है। संबंधित राजस्व कर्मियों, पुलिस विभाग अथवा आरोपित पक्ष का पक्ष सामने आने के बाद ही मामले की पूरी तस्वीर स्पष्ट हो सकेगी।
थाना दिवस में भी पहुंचा प्रार्थी
प्रार्थी ने बताया कि अपनी समस्या को लेकर वह थाना दिवस में भी पहुंचा और अधिकारियों के समक्ष अपनी बात रखी। प्रार्थी के अनुसार, उसने न्यायालय के आदेश की प्रति दिखाते हुए संबंधित भूमि पर कब्जा दिलाने तथा आदेश का पूर्ण अनुपालन कराने की मांग की, लेकिन उसका कहना है कि वहां भी उसे संतोषजनक समाधान नहीं मिल सका।
प्रशासन से आदेश का पूर्ण अनुपालन कराने की मांग
प्रार्थी दिरगज पुत्र रामनन्दन ने प्रशासन के उच्चाधिकारियों से मांग की है कि न्यायालय उप जिलाधिकारी, दुद्धी द्वारा पारित 01 अगस्त 2025 के आदेश का निष्पक्ष एवं पूर्ण रूप से अनुपालन कराया जाए। साथ ही मौके पर राजस्व एवं पुलिस विभाग की मौजूदगी में उसे शांतिपूर्ण कब्जा दिलाते हुए मामले का स्थायी समाधान कराया जाए।
गौरतलब है कि मामले में पहले ही तहसीलदार दुद्धी की अध्यक्षता में राजस्व एवं पुलिस विभाग की संयुक्त टीम गठित की जा चुकी है। टीम को आपसी समन्वय स्थापित कर न्यायालय के आदेश का नियमानुसार अनुपालन कराने के निर्देश दिए गए हैं।
अब देखना यह है कि संयुक्त टीम की कार्रवाई के बाद प्रार्थी को न्यायालय के आदेश के अनुरूप विवादित भूमि पर शांतिपूर्ण कब्जा मिल पाता है या नहीं। वहीं, प्रार्थी द्वारा लगाए गए राजस्व एवं पुलिस विभाग से जुड़े आरोपों पर संबंधित अधिकारियों का पक्ष सामने आना भी महत्वपूर्ण होगा।










