नई दिल्ली: Meta के CEO मार्क जुकरबर्ग ने भारत में अपने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर Child Sexual Abuse Material (CSEAM) और Deepfake Content की मौजूदगी को लेकर खेद जताया है। इलेक्ट्रॉनिक्स एवं सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय (MeitY) के सूत्रों के अनुसार, Meta के वरिष्ठ वैश्विक अधिकारियों और मंत्रालय के बीच हुई बैठक में जुकरबर्ग की ओर से औपचारिक माफी पहुंचाई गई।

यह घटनाक्रम ऐसे समय में सामने आया है जब हाल ही में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का Facebook वीडियो करीब 5 से 6 घंटे तक प्लेटफॉर्म से हट जाने के मामले ने राजनीतिक और तकनीकी हलकों में बड़ा विवाद खड़ा कर दिया था।
PM मोदी का वीडियो हटने पर सरकार की नाराजगी
प्रधानमंत्री मोदी ने 23 जुलाई को छात्रों और Gen Z को संबोधित करते हुए एक वीडियो साझा किया था, जिसमें उन्होंने पेपर लीक को गंभीर समस्या बताते हुए दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई और फास्ट ट्रैक कोर्ट बनाने की आवश्यकता पर जोर दिया था।
हालांकि, यह वीडियो Facebook से कुछ घंटों के लिए हट गया, जिसके बाद सरकार और संसदीय समिति ने इसे गंभीरता से लिया। बाद में Meta ने इसे तकनीकी गलती बताते हुए वीडियो बहाल कर दिया।
संसदीय समिति ने मांगी थी 3 दिन में माफी
भाजपा सांसद निशिकांत दुबे की अध्यक्षता वाली सूचना प्रौद्योगिकी संबंधी संसदीय स्थायी समिति ने Meta प्रमुख को तीन दिन के भीतर माफी मांगने के निर्देश दिए थे।
समिति ने चेतावनी दी थी कि यदि Meta ने जवाबदेही नहीं दिखाई तो कंपनी को भारत में मिलने वाली Safe Harbour Protection वापस लेने की दिशा में विचार किया जा सकता है। यदि ऐसा होता है, तो Meta के खिलाफ कानूनी कार्रवाई और FIR दर्ज होने का रास्ता खुल सकता है।
दिल्ली में Meta की ग्लोबल टीम के साथ बैठक
सरकार ने इस पूरे मामले को लेकर Meta की वैश्विक टीम को दिल्ली बुलाया। 5 अगस्त से शुरू हुई दो दिवसीय बैठक में आईटी मंत्रालय और Meta के अधिकारियों के बीच कंटेंट मॉडरेशन, प्लेटफॉर्म की जवाबदेही और भारतीय कानूनों के पालन जैसे मुद्दों पर विस्तृत चर्चा हुई।
CSEAM और Deepfake पर भी Meta ने जताया अफसोस
MeitY के सूत्रों के अनुसार, बैठक में Meta ने अपने प्लेटफॉर्म पर CSEAM (Child Sexual Abuse Material) और Deepfake जैसी आपत्तिजनक सामग्री की उपलब्धता पर चिंता जताई और भविष्य में ऐसी सामग्री पर और सख्ती बरतने का भरोसा दिया।
सूत्रों के मुताबिक, Meta ने यह भी स्वीकार किया कि कुछ प्रकार के कंटेंट को अधिक लोगों तक पहुंचाने के लिए भुगतान किए जाने जैसी अनियमितताओं पर भी चर्चा हुई और कंपनी ने इस संबंध में खेद व्यक्त किया।
महिलाओं के खिलाफ आपत्तिजनक कंटेंट पर सख्ती की मांग
संसदीय समिति ने उन सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स के खिलाफ भी कार्रवाई की मांग की है, जहां महिलाओं के खिलाफ अपमानजनक सामग्री और CSEAM उपलब्ध होने के आरोप हैं।
समिति का मानना है कि जो प्लेटफॉर्म एल्गोरिदम के जरिए तय करते हैं कि किस यूजर को कौन-सा कंटेंट दिखाया जाए, उन्हें केवल Intermediary मानकर कानूनी सुरक्षा नहीं दी जानी चाहिए। ऐसे मामलों में IT Act के तहत मिलने वाली Safe Harbour Protection लागू नहीं होनी चाहिए।
Google India का मामला भी उठा
समिति ने Google India से जुड़े एक कथित साइबर फ्रॉड मामले का भी उल्लेख किया। शिकायतकर्ताओं का आरोप है कि फर्जी निवेश ऐप्स के जरिए उन्हें 48 लाख रुपये से अधिक का नुकसान हुआ। समिति ने इस मामले में भी सरकार से उचित कार्रवाई करने की सिफारिश की है।
क्यों महत्वपूर्ण है यह मामला?
PM मोदी का वीडियो हटने की घटना ने भारत में Big Tech कंपनियों की जवाबदेही, Content Moderation, Deepfake, ऑनलाइन सुरक्षा और सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स की कानूनी जिम्मेदारी को लेकर बहस को तेज कर दिया है। अब सभी की नजर इस बात पर है कि सरकार आने वाले समय में डिजिटल प्लेटफॉर्म्स के लिए नियमों को कितना सख्त बनाती है।









