October 13, 2026 4:51 am

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विधानसभा चुनाव 2027 की तैयारी तेज, मतदाता सूची दुरुस्त करने में जुटा तहसील प्रशासन एसडीएम अशोक कुमार गुप्ता ने बीएलओ और सुपरवाइजरों को दिए निर्देश, नए मतदाताओं के नाम जोड़ने और विलोपित नामों का सत्यापन करने पर जोर दुद्धी, सोनभद्र। विधानसभा चुनाव 2027 के मद्देनजर मतदाता सूची को त्रुटिरहित बनाने के लिए निर्वाचन आयोग के निर्देश पर तहसील प्रशासन सक्रिय हो गया है। इसी क्रम में दुद्धी तहसील सभागार में उपजिलाधिकारी अशोक कुमार गुप्ता की अध्यक्षता में समीक्षा बैठक आयोजित की गई। इसमें तहसील क्षेत्र के सभी सुपरवाइजरों और बूथ लेवल अधिकारियों (बीएलओ) को मतदाता सूची पुनरीक्षण के संबंध में आवश्यक दिशा-निर्देश दिए गए। बैठक में एसडीएम ने कहा कि स्वच्छ और त्रुटिरहित मतदाता सूची तैयार करना प्रशासन की प्राथमिकता है। उन्होंने बीएलओ को अपने-अपने क्षेत्रों में घर-घर जाकर पात्र मतदाताओं का सत्यापन करने तथा 18 वर्ष की आयु पूरी करने वाले युवाओं को चिह्नित कर उनका फॉर्म-6 भरवाने का निर्देश दिया, ताकि कोई भी पात्र युवा मतदान के अधिकार से वंचित न रहे। विलोपित नामों का होगा भौतिक सत्यापन एसडीएम ने मतदाता सूची से हटाए गए नामों के संबंध में विशेष सतर्कता बरतने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि बीएलओ संबंधित मतदाताओं के घर जाकर भौतिक सत्यापन करें। जांच में कोई पात्र मतदाता सूची से बाहर पाया जाता है तो नियमानुसार आवश्यक दस्तावेजों के साथ फॉर्म-6 भरवाकर उसका नाम जोड़ने की प्रक्रिया पूरी की जाए। लापरवाही पर होगी कार्रवाई एसडीएम ने स्पष्ट किया कि निर्वाचन संबंधी कार्यों में किसी भी प्रकार की लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी। सभी बीएलओ को निर्धारित समयसीमा के भीतर सत्यापन और आवेदन संबंधी कार्य पूरा करने के निर्देश दिए गए। बैठक में तहसील प्रशासन के अधिकारियों के साथ बड़ी संख्या में बीएलओ और सुपरवाइजर मौजूद रहे।

देवशयनी एकादशी 2026: कब है शुभ मुहूर्त? जानें चातुर्मास की शुरुआत और भगवान विष्णु को शयन कराने की सही विधि

सनातन धर्म में प्रत्येक एकादशी का विशेष महत्व है, लेकिन आषाढ़ शुक्ल पक्ष की देवशयनी एकादशी सबसे अधिक पुण्यदायी मानी जाती है। इसे आषाढ़ी एकादशी, हरिशयनी एकादशी और पद्मनाभा एकादशी के नाम से भी जाना जाता है। मान्यता है कि इसी दिन भगवान श्रीहरि विष्णु क्षीरसागर में शेषनाग की शैया पर चार माह के लिए योगनिद्रा में चले जाते हैं। इसी के साथ चातुर्मास का शुभारंभ होता है, जो साधना, भक्ति, जप-तप और आत्मचिंतन का विशेष काल माना जाता है।

देवशयनी एकादशी 2026: तिथि और शुभ मुहूर्त

वर्ष 2026 में देवशयनी एकादशी का व्रत 25 जुलाई, शनिवार को रखा जाएगा, क्योंकि उदया तिथि के अनुसार एकादशी का व्रत इसी दिन मान्य होगा।

शुभ समय

  • एकादशी तिथि प्रारंभ: 24 जुलाई 2026, सुबह 09:12 बजे
  • एकादशी तिथि समाप्त: 25 जुलाई 2026, सुबह 11:34 बजे
  • अभिजीत मुहूर्त: दोपहर 12:19 बजे से 01:11 बजे तक
  • गोधूलि मुहूर्त: शाम 07:17 बजे से 07:39 बजे तक
  • व्रत पारण: 26 जुलाई 2026, सुबह 06:13 बजे से 08:50 बजे तक

क्यों विशेष है देवशयनी एकादशी?

धार्मिक मान्यताओं के अनुसार इस दिन भगवान विष्णु योगनिद्रा में प्रवेश करते हैं और अगले चार महीनों तक विश्राम करते हैं। इस अवधि को चातुर्मास कहा जाता है। इस दौरान विवाह, गृह प्रवेश, मुंडन जैसे मांगलिक कार्य सामान्यतः नहीं किए जाते, जबकि पूजा-पाठ, व्रत, दान और आध्यात्मिक साधना का महत्व कई गुना बढ़ जाता है।

देवशयनी एकादशी पूजा विधि

1. ब्रह्म मुहूर्त में स्नान और संकल्प

सुबह जल्दी उठकर स्नान करें और स्वच्छ वस्त्र धारण करें। घर के मंदिर की साफ-सफाई कर भगवान विष्णु की प्रतिमा या चित्र को एक स्वच्छ चौकी पर स्थापित करें।

2. भगवान विष्णु का पूजन

भगवान को पीले वस्त्र, पीला चंदन, पीले पुष्प और तुलसी दल (एक दिन पूर्व तोड़ा गया) अर्पित करें। धूप, दीप, नैवेद्य और पंचामृत से पूजा करें।

3. आरती और शयन मंत्र

पूजा के बाद भगवान विष्णु की आरती करें और उन्हें प्रतीकात्मक रूप से शयन कराते हुए इस मंत्र का जाप करें—

“सुप्ते त्वयि जगन्नाथ जगत्सुप्तं भवेदिदम्।
विबुद्धे त्वयि बुद्धं च जगत्सर्वं चराचरम्।।”

अर्थ: हे जगन्नाथ! आपके शयन करने पर समस्त संसार विश्राम करता है और आपके जागने पर संपूर्ण चराचर जगत जागृत हो जाता है।

4. दान-पुण्य और भजन

पूजा के बाद अपनी सामर्थ्य के अनुसार अन्न, वस्त्र या दक्षिणा का दान करें। रात्रि में भगवान विष्णु के भजन, विष्णु सहस्रनाम या हरिनाम संकीर्तन करना अत्यंत शुभ माना जाता है।

चातुर्मास का आध्यात्मिक महत्व

देवशयनी एकादशी से शुरू होकर देवउठनी (प्रबोधिनी) एकादशी तक चलने वाले चार महीने आत्मसंयम, भक्ति और साधना के लिए समर्पित माने जाते हैं। इस दौरान सात्विक जीवन, जप, तप, दान और धर्म-कर्म करने से विशेष पुण्य की प्राप्ति होती है।

धार्मिक मान्यताओं से जुड़ी जानकारी विभिन्न पुराणों और पारंपरिक मान्यताओं पर आधारित है। इसका उद्देश्य केवल आस्था और सांस्कृतिक परंपराओं की जानकारी देना है।

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Author: Digital Bharat News

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