October 13, 2026 3:11 am

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विधानसभा चुनाव 2027 की तैयारी तेज, मतदाता सूची दुरुस्त करने में जुटा तहसील प्रशासन एसडीएम अशोक कुमार गुप्ता ने बीएलओ और सुपरवाइजरों को दिए निर्देश, नए मतदाताओं के नाम जोड़ने और विलोपित नामों का सत्यापन करने पर जोर दुद्धी, सोनभद्र। विधानसभा चुनाव 2027 के मद्देनजर मतदाता सूची को त्रुटिरहित बनाने के लिए निर्वाचन आयोग के निर्देश पर तहसील प्रशासन सक्रिय हो गया है। इसी क्रम में दुद्धी तहसील सभागार में उपजिलाधिकारी अशोक कुमार गुप्ता की अध्यक्षता में समीक्षा बैठक आयोजित की गई। इसमें तहसील क्षेत्र के सभी सुपरवाइजरों और बूथ लेवल अधिकारियों (बीएलओ) को मतदाता सूची पुनरीक्षण के संबंध में आवश्यक दिशा-निर्देश दिए गए। बैठक में एसडीएम ने कहा कि स्वच्छ और त्रुटिरहित मतदाता सूची तैयार करना प्रशासन की प्राथमिकता है। उन्होंने बीएलओ को अपने-अपने क्षेत्रों में घर-घर जाकर पात्र मतदाताओं का सत्यापन करने तथा 18 वर्ष की आयु पूरी करने वाले युवाओं को चिह्नित कर उनका फॉर्म-6 भरवाने का निर्देश दिया, ताकि कोई भी पात्र युवा मतदान के अधिकार से वंचित न रहे। विलोपित नामों का होगा भौतिक सत्यापन एसडीएम ने मतदाता सूची से हटाए गए नामों के संबंध में विशेष सतर्कता बरतने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि बीएलओ संबंधित मतदाताओं के घर जाकर भौतिक सत्यापन करें। जांच में कोई पात्र मतदाता सूची से बाहर पाया जाता है तो नियमानुसार आवश्यक दस्तावेजों के साथ फॉर्म-6 भरवाकर उसका नाम जोड़ने की प्रक्रिया पूरी की जाए। लापरवाही पर होगी कार्रवाई एसडीएम ने स्पष्ट किया कि निर्वाचन संबंधी कार्यों में किसी भी प्रकार की लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी। सभी बीएलओ को निर्धारित समयसीमा के भीतर सत्यापन और आवेदन संबंधी कार्य पूरा करने के निर्देश दिए गए। बैठक में तहसील प्रशासन के अधिकारियों के साथ बड़ी संख्या में बीएलओ और सुपरवाइजर मौजूद रहे।

चातुर्मास में क्या खाएं और क्या नहीं? जानिए 4 महीनों के नियम और 5 बड़े फायदे

Chaturmas Food Guide: सनातन धर्म में चातुर्मास का विशेष धार्मिक और आध्यात्मिक महत्व है। यह अवधि देवशयनी एकादशी (आषाढ़ शुक्ल एकादशी) से शुरू होकर देवप्रबोधिनी एकादशी (कार्तिक शुक्ल एकादशी) तक चलती है। मान्यता है कि इस दौरान भगवान विष्णु योगनिद्रा में रहते हैं और भक्त पूजा, जप, तप, दान तथा सात्विक जीवन का पालन करते हैं।

धार्मिक महत्व के साथ-साथ चातुर्मास को स्वास्थ्य की दृष्टि से भी महत्वपूर्ण माना जाता है। वर्षा ऋतु में पाचन शक्ति कमजोर हो जाती है, इसलिए हल्का, ताजा और सुपाच्य भोजन करने की सलाह दी जाती है। इसी कारण परंपरा में खान-पान से जुड़े कुछ विशेष नियम बताए गए हैं।

चातुर्मास में महीने के अनुसार क्या न खाएं?

1. श्रावण मास

  • हरी पत्तेदार सब्जियां जैसे पालक, मेथी और अन्य साग से परहेज।
  • मान्यता है कि बारिश में इनमें कीड़े और सूक्ष्मजीवों की संभावना बढ़ जाती है।

2. भाद्रपद मास

  • दही, मट्ठा और छाछ का सेवन नहीं करने की सलाह दी जाती है।
  • पारंपरिक मान्यता के अनुसार इस समय पेट संबंधी संक्रमण का जोखिम अधिक रहता है।

3. आश्विन मास

  • दूध का सेवन कम या बंद रखने का नियम बताया गया है।

4. कार्तिक मास

  • चना, उड़द, मसूर, अरहर जैसी कुछ दालों तथा बैंगन और मूली जैसी सब्जियों से परहेज करने की परंपरा है।

पूरे चातुर्मास में इनसे दूरी रखें

  • प्याज और लहसुन
  • मांसाहार
  • मदिरा
  • बासी भोजन
  • तामसिक भोजन

चातुर्मास में क्या खाएं?

  • खिचड़ी और दलिया
  • मूंग की दाल (जहां परंपरा अनुसार स्वीकार्य हो)
  • लौकी, तोरई और कद्दू जैसी मौसमी सब्जियां
  • अच्छी तरह धोकर और पकाकर बनाया गया भोजन
  • उबला या गुनगुना पानी
  • सेंधा नमक का सीमित उपयोग

चातुर्मास के नियम अपनाने के 5 संभावित लाभ

1. पाचन तंत्र को आराम

हल्का भोजन करने से अपच, गैस और एसिडिटी जैसी समस्याओं का जोखिम कम हो सकता है।

2. संक्रमण से बचाव

बरसात में स्वच्छ और ताजा भोजन करने से फूड-बॉर्न संक्रमण का खतरा कम करने में मदद मिल सकती है।

3. शरीर को आराम

संतुलित और हल्का भोजन शरीर पर अतिरिक्त बोझ कम डालता है तथा स्वस्थ जीवनशैली अपनाने में मदद करता है।

4. मानसिक शांति

सात्विक भोजन और संयम का पालन कई लोगों के लिए ध्यान, पूजा और मानसिक एकाग्रता में सहायक माना जाता है।

5. मौसम के अनुसार संतुलित जीवनशैली

स्वच्छ भोजन, पर्याप्त पानी और संयमित आहार मानसून के दौरान समग्र स्वास्थ्य बनाए रखने में सहायक हो सकते हैं।

ध्यान रखें

चातुर्मास के अधिकांश खान-पान संबंधी नियम धार्मिक परंपराओं और आयुर्वेदिक मान्यताओं पर आधारित हैं। आधुनिक वैज्ञानिक शोध इन सभी नियमों की स्पष्ट पुष्टि नहीं करते। हालांकि, मानसून में स्वच्छ, ताजा और अच्छी तरह पका हुआ भोजन करना, दूषित भोजन से बचना और संतुलित आहार लेना चिकित्सा विज्ञान भी उचित मानता है।

अस्वीकरण: यह जानकारी धार्मिक परंपराओं और सामान्य स्वास्थ्य संबंधी सुझावों पर आधारित है। किसी भी विशेष आहार, व्रत या स्वास्थ्य संबंधी बदलाव से पहले डॉक्टर या योग्य आहार विशेषज्ञ की सलाह अवश्य लें।

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Author: Digital Bharat News

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