कोन। पुराने विद्यालय भवन को ध्वस्त करने के बाद उसके मलबे की नीलामी की प्रक्रिया चर्चा का विषय बनी हुई है। नीलामी में शामिल होने के लिए लोग पहुंचे, लेकिन बेस मूल्य अधिक होने के कारण किसी ने बोली नहीं लगाई। इसके चलते नीलामी की प्रक्रिया पूरी नहीं हो सकी।

जानकारी के अनुसार, पुराने विद्यालय भवन को इस उद्देश्य से ध्वस्त किया गया था कि वहां नए भवन का निर्माण कराया जा सके। हालांकि, इस मामले में पहले पुराने भवन को ध्वस्त कर दिया गया और उसके बाद नीलामी की प्रक्रिया अपनाई जा रही है। सामान्यतः पुराने भवन की सामग्री की नीलामी के बाद ध्वस्तीकरण की प्रक्रिया अपनाई जाती है, ताकि सामग्री का उचित मूल्य निर्धारित किया जा सके।
वहीं, विद्यालय भवन ध्वस्तीकरण के दौरान सरकारी स्कूली किताबें भी मलबे में दब गई थीं। बाद में उन्हें बाहर निकाला गया, लेकिन इस दौरान किताबों को काफी नुकसान पहुंचने की बात सामने आई है। सरकारी किताबों की इस तरह दुर्दशा होने से संबंधित व्यवस्था पर भी सवाल उठ रहे हैं।
अब ध्वस्त विद्यालय भवन के मलबे की नीलामी में बेस मूल्य अधिक होने के कारण किसी के बोली नहीं लगाने से प्रक्रिया आगे नहीं बढ़ सकी। ऐसे में सवाल उठता है कि बेस मूल्य का निर्धारण किस आधार पर किया गया और नीलामी की प्रक्रिया को सफल बनाने के लिए विभाग आगे क्या कदम उठाएगा।
फिलहाल, मामले में संबंधित विभाग की अगली कार्रवाई का इंतजार है।












