July 23, 2026 2:25 am

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अब दवा असली है या नकली, एक स्कैन में चलेगा पता; वैक्सीन, एंटीबायोटिक और कैंसर की दवाओं पर QR Code अनिवार्य

नई दिल्ली: नकली और घटिया दवाओं पर लगाम लगाने के लिए केंद्र सरकार ने बड़ा कदम उठाया है। अब वैक्सीन, एंटीबायोटिक, कैंसर रोधी दवाओं और शेड्यूल H2 के तहत आने वाली दवाओं की पैकेजिंग पर QR Code या बारकोड लगाना अनिवार्य होगा। QR Code स्कैन करते ही दवा की असलियत, निर्माण से लेकर सप्लाई चेन तक की पूरी जानकारी तुरंत मिल सकेगी।

केंद्रीय स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय ने औषधि नियम, 1945 (Drugs Rules, 1945) में संशोधन कर इस व्यवस्था को अधिसूचित किया है। इसका उद्देश्य नकली दवाओं की पहचान आसान बनाना, दवाओं की ट्रेसबिलिटी बढ़ाना और मरीजों की सुरक्षा सुनिश्चित करना है।

कहां लगाया जाएगा QR Code?

नए नियमों के अनुसार शेड्यूल H2 के अंतर्गत आने वाली दवाओं की प्राथमिक पैकेजिंग (Primary Packaging) पर QR Code या बारकोड लगाना अनिवार्य होगा। यदि पैक पर पर्याप्त जगह नहीं होगी तो इसे सेकेंडरी पैकेजिंग पर लगाया जाएगा।

इस QR Code को किसी भी अधिकृत सॉफ्टवेयर या ऐप से स्कैन कर दवा की प्रामाणिकता और सप्लाई चेन में उसकी स्थिति की पुष्टि की जा सकेगी।

QR Code स्कैन करते ही मिलेगी ये 9 अहम जानकारियां

प्रत्येक QR Code में दवा से जुड़ी निम्नलिखित जानकारी उपलब्ध होगी—

  • यूनिक प्रोडक्ट आइडेंटिफिकेशन (UPI) कोड
  • दवा का जेनेरिक नाम
  • ब्रांड नाम
  • निर्माता का नाम और पता
  • बैच नंबर
  • निर्माण तिथि
  • एक्सपायरी डेट
  • मैन्युफैक्चरिंग लाइसेंस नंबर
  • दवा में प्रयुक्त सहायक पदार्थों (Excipients) का विवरण

क्यों महत्वपूर्ण है यह फैसला?

अब तक QR Code की व्यवस्था केवल देश के शीर्ष 300 दवा ब्रांडों तक सीमित थी। नए संशोधन के बाद इसका दायरा बढ़ाकर सभी वैक्सीन, एंटीमाइक्रोबियल (एंटीबायोटिक), कैंसर रोधी, नारकोटिक और साइकोट्रॉपिक दवाओं तक कर दिया गया है।

इससे—

  • नकली और घटिया दवाओं की पहचान आसान होगी।
  • पूरी सप्लाई चेन की डिजिटल ट्रैकिंग संभव होगी।
  • नियामकीय निगरानी और पारदर्शिता बढ़ेगी।
  • मरीजों को सुरक्षित और प्रमाणिक दवाएं मिल सकेंगी।
  • एंटी-माइक्रोबियल रेजिस्टेंस (AMR) से निपटने में भी मदद मिलेगी।

कब से लागू होंगे नए नियम?

सरकार ने उद्योग को तैयारी का समय देने के लिए इसे चरणबद्ध तरीके से लागू करने का फैसला किया है।

  • 1 जुलाई 2027 से: वैक्सीन, कैंसर रोधी दवाएं, नारकोटिक एवं साइकोट्रॉपिक दवाओं पर QR Code अनिवार्य होगा।
  • 1 जुलाई 2028 से: एंटीमाइक्रोबियल (एंटीबायोटिक) दवाओं पर यह व्यवस्था लागू होगी।

हालांकि, सरकार ने दवा कंपनियों को तय समयसीमा से पहले ही इस प्रणाली को स्वैच्छिक रूप से अपनाने के लिए भी प्रोत्साहित किया है।

मरीजों को क्या होगा फायदा?

नई व्यवस्था लागू होने के बाद उपभोक्ता केवल एक QR Code स्कैन करके यह जान सकेंगे कि दवा कहां बनी, किस कंपनी ने बनाई, उसका बैच नंबर क्या है और वह असली है या नहीं। इससे नकली दवाओं के कारोबार पर अंकुश लगेगा, दवाओं की गुणवत्ता सुनिश्चित होगी और फार्मास्यूटिकल सप्लाई चेन में पारदर्शिता बढ़ेगी। यह पहल सार्वजनिक स्वास्थ्य सुरक्षा को मजबूत करने और “नशा मुक्त भारत” अभियान को आगे बढ़ाने की दिशा में भी महत्वपूर्ण कदम मानी जा रही है।

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Author: Digital Bharat News

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