WhatsApp Username Feature: केंद्र सरकार WhatsApp और Telegram जैसे मैसेजिंग प्लेटफॉर्म पर आने वाले यूजरनेम-आधारित मैसेजिंग फीचर को लेकर सतर्क है। इलेक्ट्रॉनिक्स एवं सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय (MeitY) इस फीचर पर कंपनियों से मिले जवाबों की कानूनी समीक्षा कर रहा है। मंत्रालय के सूत्रों के अनुसार, अगले करीब 20 दिनों में इस मामले में कोई अधिसूचना या अगला फैसला सामने आ सकता है।

कंपनियों के जवाबों की हो रही कानूनी जांच
सूत्रों के मुताबिक, WhatsApp, Telegram और Zoho Bharat Eye ने सरकार द्वारा जारी नोटिस का जवाब मंत्रालय को सौंप दिया है। अब MeitY की कानूनी टीम इन जवाबों का विस्तृत परीक्षण कर रही है। जांच का उद्देश्य यह पता लगाना है कि प्रस्तावित फीचर मौजूदा कानूनों और आईटी नियमों के अनुरूप है या नहीं तथा आवश्यकता पड़ने पर क्या नियामकीय या कानूनी कार्रवाई की जा सकती है।
क्या है WhatsApp का Username फीचर?
WhatsApp एक ऐसे फीचर पर काम कर रहा है, जिसकी मदद से यूजर्स मोबाइल नंबर साझा किए बिना एक-दूसरे से जुड़ सकेंगे। Telegram और Signal की तरह इसमें प्रत्येक यूजर अपना एक यूनिक यूजरनेम चुन सकेगा और संपर्क के लिए मोबाइल नंबर की जगह उसी यूजरनेम का उपयोग करेगा।
Meta का कहना है कि इससे यूजर्स की प्राइवेसी बेहतर होगी और उन्हें अपनी व्यक्तिगत जानकारी पर अधिक नियंत्रण मिलेगा। हालांकि भारत सरकार का मानना है कि यदि मोबाइल नंबर सार्वजनिक रूप से दिखाई नहीं देंगे, तो साइबर अपराधियों की पहचान और जांच करना अधिक चुनौतीपूर्ण हो सकता है।
सरकार को किस बात की है चिंता?
सरकार की सबसे बड़ी चिंता यह है कि यूजरनेम आधारित प्रणाली का दुरुपयोग साइबर अपराधी कर सकते हैं। आशंका है कि इसके जरिए—
- फिशिंग (Phishing) हमलों को बढ़ावा मिल सकता है।
- फर्जी पहचान (Impersonation) बनाकर लोगों से ठगी की जा सकती है।
- डिजिटल अरेस्ट (Digital Arrest) जैसे साइबर फ्रॉड को अंजाम देना आसान हो सकता है।
- अन्य ऑनलाइन वित्तीय और पहचान संबंधी अपराध बढ़ सकते हैं।
इसी वजह से 1 जुलाई को केंद्र सरकार ने Meta से कहा था कि जब तक इस फीचर के दुरुपयोग को रोकने के लिए प्रभावी सुरक्षा उपाय स्पष्ट नहीं किए जाते, तब तक इसका रोलआउट आगे नहीं बढ़ाया जाए।
WhatsApp के जवाब की समीक्षा जारी
इलेक्ट्रॉनिक्स एवं सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय को सप्ताहांत में WhatsApp का जवाब प्राप्त हुआ, जिसकी फिलहाल कानूनी समीक्षा की जा रही है। मंत्रालय का कहना है कि सभी संबंधित कंपनियों के जवाबों का परीक्षण पूरा होने के बाद ही आगे की कार्रवाई या किसी संभावित अधिसूचना पर निर्णय लिया जाएगा।
Meta ने क्या कहा?
Meta ने सरकार को बताया है कि WhatsApp के Username फीचर में सुरक्षा से जुड़े कई अतिरिक्त उपाय शामिल किए जाएंगे, ताकि दुरुपयोग की संभावना को कम किया जा सके।
हालांकि सरकार सिर्फ तकनीकी सुरक्षा उपायों तक सीमित नहीं है। आईटी अधिनियम और आईटी नियमों के तहत बड़े सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म के रूप में WhatsApp की कानूनी जिम्मेदारियों का भी परीक्षण किया जा रहा है। सरकार यह भी देख रही है कि यदि भविष्य में इस फीचर के कारण साइबर अपराधों में बढ़ोतरी होती है, तो ऐसी स्थिति में Meta की जवाबदेही किस प्रकार तय की जा सकती है।
फिलहाल क्या स्थिति है?
अभी सरकार ने इस मामले में कोई अंतिम निर्णय घोषित नहीं किया है। सभी कंपनियों के जवाबों की समीक्षा पूरी होने के बाद ही यह स्पष्ट होगा कि Username फीचर को मौजूदा स्वरूप में मंजूरी मिलेगी, अतिरिक्त सुरक्षा शर्तों के साथ लागू किया जाएगा या फिर इसके रोलआउट पर कोई नई नियामकीय व्यवस्था लागू होगी।





