October 13, 2026 4:49 am

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विधानसभा चुनाव 2027 की तैयारी तेज, मतदाता सूची दुरुस्त करने में जुटा तहसील प्रशासन एसडीएम अशोक कुमार गुप्ता ने बीएलओ और सुपरवाइजरों को दिए निर्देश, नए मतदाताओं के नाम जोड़ने और विलोपित नामों का सत्यापन करने पर जोर दुद्धी, सोनभद्र। विधानसभा चुनाव 2027 के मद्देनजर मतदाता सूची को त्रुटिरहित बनाने के लिए निर्वाचन आयोग के निर्देश पर तहसील प्रशासन सक्रिय हो गया है। इसी क्रम में दुद्धी तहसील सभागार में उपजिलाधिकारी अशोक कुमार गुप्ता की अध्यक्षता में समीक्षा बैठक आयोजित की गई। इसमें तहसील क्षेत्र के सभी सुपरवाइजरों और बूथ लेवल अधिकारियों (बीएलओ) को मतदाता सूची पुनरीक्षण के संबंध में आवश्यक दिशा-निर्देश दिए गए। बैठक में एसडीएम ने कहा कि स्वच्छ और त्रुटिरहित मतदाता सूची तैयार करना प्रशासन की प्राथमिकता है। उन्होंने बीएलओ को अपने-अपने क्षेत्रों में घर-घर जाकर पात्र मतदाताओं का सत्यापन करने तथा 18 वर्ष की आयु पूरी करने वाले युवाओं को चिह्नित कर उनका फॉर्म-6 भरवाने का निर्देश दिया, ताकि कोई भी पात्र युवा मतदान के अधिकार से वंचित न रहे। विलोपित नामों का होगा भौतिक सत्यापन एसडीएम ने मतदाता सूची से हटाए गए नामों के संबंध में विशेष सतर्कता बरतने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि बीएलओ संबंधित मतदाताओं के घर जाकर भौतिक सत्यापन करें। जांच में कोई पात्र मतदाता सूची से बाहर पाया जाता है तो नियमानुसार आवश्यक दस्तावेजों के साथ फॉर्म-6 भरवाकर उसका नाम जोड़ने की प्रक्रिया पूरी की जाए। लापरवाही पर होगी कार्रवाई एसडीएम ने स्पष्ट किया कि निर्वाचन संबंधी कार्यों में किसी भी प्रकार की लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी। सभी बीएलओ को निर्धारित समयसीमा के भीतर सत्यापन और आवेदन संबंधी कार्य पूरा करने के निर्देश दिए गए। बैठक में तहसील प्रशासन के अधिकारियों के साथ बड़ी संख्या में बीएलओ और सुपरवाइजर मौजूद रहे।

WhatsApp-Telegram Username Feature पर सरकार की नजर, 20 दिनों में आ सकता है बड़ा फैसला

WhatsApp Username Feature: केंद्र सरकार WhatsApp और Telegram जैसे मैसेजिंग प्लेटफॉर्म पर आने वाले यूजरनेम-आधारित मैसेजिंग फीचर को लेकर सतर्क है। इलेक्ट्रॉनिक्स एवं सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय (MeitY) इस फीचर पर कंपनियों से मिले जवाबों की कानूनी समीक्षा कर रहा है। मंत्रालय के सूत्रों के अनुसार, अगले करीब 20 दिनों में इस मामले में कोई अधिसूचना या अगला फैसला सामने आ सकता है।

कंपनियों के जवाबों की हो रही कानूनी जांच

सूत्रों के मुताबिक, WhatsApp, Telegram और Zoho Bharat Eye ने सरकार द्वारा जारी नोटिस का जवाब मंत्रालय को सौंप दिया है। अब MeitY की कानूनी टीम इन जवाबों का विस्तृत परीक्षण कर रही है। जांच का उद्देश्य यह पता लगाना है कि प्रस्तावित फीचर मौजूदा कानूनों और आईटी नियमों के अनुरूप है या नहीं तथा आवश्यकता पड़ने पर क्या नियामकीय या कानूनी कार्रवाई की जा सकती है।

क्या है WhatsApp का Username फीचर?

WhatsApp एक ऐसे फीचर पर काम कर रहा है, जिसकी मदद से यूजर्स मोबाइल नंबर साझा किए बिना एक-दूसरे से जुड़ सकेंगे। Telegram और Signal की तरह इसमें प्रत्येक यूजर अपना एक यूनिक यूजरनेम चुन सकेगा और संपर्क के लिए मोबाइल नंबर की जगह उसी यूजरनेम का उपयोग करेगा।

Meta का कहना है कि इससे यूजर्स की प्राइवेसी बेहतर होगी और उन्हें अपनी व्यक्तिगत जानकारी पर अधिक नियंत्रण मिलेगा। हालांकि भारत सरकार का मानना है कि यदि मोबाइल नंबर सार्वजनिक रूप से दिखाई नहीं देंगे, तो साइबर अपराधियों की पहचान और जांच करना अधिक चुनौतीपूर्ण हो सकता है।

सरकार को किस बात की है चिंता?

सरकार की सबसे बड़ी चिंता यह है कि यूजरनेम आधारित प्रणाली का दुरुपयोग साइबर अपराधी कर सकते हैं। आशंका है कि इसके जरिए—

  • फिशिंग (Phishing) हमलों को बढ़ावा मिल सकता है।
  • फर्जी पहचान (Impersonation) बनाकर लोगों से ठगी की जा सकती है।
  • डिजिटल अरेस्ट (Digital Arrest) जैसे साइबर फ्रॉड को अंजाम देना आसान हो सकता है।
  • अन्य ऑनलाइन वित्तीय और पहचान संबंधी अपराध बढ़ सकते हैं।

इसी वजह से 1 जुलाई को केंद्र सरकार ने Meta से कहा था कि जब तक इस फीचर के दुरुपयोग को रोकने के लिए प्रभावी सुरक्षा उपाय स्पष्ट नहीं किए जाते, तब तक इसका रोलआउट आगे नहीं बढ़ाया जाए।

WhatsApp के जवाब की समीक्षा जारी

इलेक्ट्रॉनिक्स एवं सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय को सप्ताहांत में WhatsApp का जवाब प्राप्त हुआ, जिसकी फिलहाल कानूनी समीक्षा की जा रही है। मंत्रालय का कहना है कि सभी संबंधित कंपनियों के जवाबों का परीक्षण पूरा होने के बाद ही आगे की कार्रवाई या किसी संभावित अधिसूचना पर निर्णय लिया जाएगा।

Meta ने क्या कहा?

Meta ने सरकार को बताया है कि WhatsApp के Username फीचर में सुरक्षा से जुड़े कई अतिरिक्त उपाय शामिल किए जाएंगे, ताकि दुरुपयोग की संभावना को कम किया जा सके।

हालांकि सरकार सिर्फ तकनीकी सुरक्षा उपायों तक सीमित नहीं है। आईटी अधिनियम और आईटी नियमों के तहत बड़े सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म के रूप में WhatsApp की कानूनी जिम्मेदारियों का भी परीक्षण किया जा रहा है। सरकार यह भी देख रही है कि यदि भविष्य में इस फीचर के कारण साइबर अपराधों में बढ़ोतरी होती है, तो ऐसी स्थिति में Meta की जवाबदेही किस प्रकार तय की जा सकती है।

फिलहाल क्या स्थिति है?

अभी सरकार ने इस मामले में कोई अंतिम निर्णय घोषित नहीं किया है। सभी कंपनियों के जवाबों की समीक्षा पूरी होने के बाद ही यह स्पष्ट होगा कि Username फीचर को मौजूदा स्वरूप में मंजूरी मिलेगी, अतिरिक्त सुरक्षा शर्तों के साथ लागू किया जाएगा या फिर इसके रोलआउट पर कोई नई नियामकीय व्यवस्था लागू होगी।

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Author: Digital Bharat News

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