नई दिल्ली: NEET-UG परीक्षा में कथित अनियमितताओं और शिक्षा व्यवस्था में सुधार की मांग को लेकर कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) के नेतृत्व में चल रहा ‘चलो संसद’ मार्च अब राष्ट्रीय बहस का विषय बन गया है। केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की मांग को लेकर जंतर-मंतर पर प्रदर्शन कर रहे छात्रों पर पुलिस की कार्रवाई के बाद बॉलीवुड की कई प्रमुख हस्तियां खुलकर छात्रों के समर्थन में सामने आई हैं। सड़क से लेकर सोशल मीडिया तक इस मुद्दे पर प्रतिक्रियाओं का सिलसिला तेज हो गया है।

इन कलाकारों ने जताया समर्थन
छात्र आंदोलन के समर्थन में जिन प्रमुख कलाकारों ने अपनी आवाज उठाई, उनमें शामिल हैं—
- नसीरुद्दीन शाह
- शबाना आजमी
- प्रकाश राज
- दिलजीत दोसांझ
- भूमि पेडनेकर
- हुमा कुरैशी
- रितेश देशमुख और जेनेलिया देशमुख
- स्वरा भास्कर
- कुणाल कामरा
- सोनाक्षी सिन्हा
- जीनत अमान
- सुतापा सिकदर
- नंदिता दास
- सोनू सूद
- वीर दास
- सोहा अली खान
- दीया मिर्जा
किस कलाकार ने क्या कहा?
प्रकाश राज और शबाना आजमी
प्रकाश राज और शबाना आजमी जंतर-मंतर पहुंचकर छात्रों के बीच शामिल हुए। प्रकाश राज ने संविधान की प्रति हाथ में लेकर छात्रों को संबोधित किया और “इंकलाब जिंदाबाद” के नारे लगाए। उन्होंने सोशल मीडिया पर लिखा, “देश का युवा बस पूछ रहा है (#JustAsking).”
शबाना आजमी ने कहा कि उन्होंने प्रदर्शन स्थल पर युवा छात्राओं और बच्चों पर पुलिस कार्रवाई देखी। उनके अनुसार, सरकार को छात्रों से बातचीत करनी चाहिए और उनकी चिंताओं को गंभीरता से सुनना चाहिए।
दिलजीत दोसांझ
दिलजीत दोसांझ ने एक्स पर लिखा कि छात्रों के साथ हुआ व्यवहार गलत है और उनकी बात सुनी जानी चाहिए। उन्होंने सरकार से संवाद की अपील करते हुए कहा कि लोकतंत्र में जनता की आवाज का सम्मान होना चाहिए। साथ ही उन्होंने यह भी लिखा कि उन्हें पहले भी कई बार “एंटी-नेशनल” कहा जा चुका है।
भूमि पेडनेकर
भूमि पेडनेकर ने इंस्टाग्राम पोस्ट में कहा कि हिंसा किसी समस्या का समाधान नहीं है। उन्होंने पेपर लीक, शिक्षा में असमानता और शिक्षकों की कमी जैसे मुद्दों का उल्लेख करते हुए कहा कि छात्रों का भविष्य राजनीति से ऊपर होना चाहिए।
हुमा कुरैशी
हुमा कुरैशी ने शांतिपूर्ण प्रदर्शनकारियों पर बल प्रयोग पर दुख जताया। उन्होंने कहा कि हर नागरिक को सम्मानपूर्वक सुने जाने का अधिकार है और इस मामले में जवाबदेही तय होनी चाहिए।
रितेश देशमुख और जेनेलिया देशमुख
दोनों कलाकारों ने संयुक्त बयान जारी करते हुए कहा कि वे देश के युवाओं के साथ एकजुटता से खड़े हैं। उनके अनुसार, छात्रों की आवाज बिना किसी डर के सुनी जानी चाहिए क्योंकि युवा लोकतंत्र की सबसे बड़ी ताकत हैं।
सुतापा सिकदर
पटकथा लेखिका सुतापा सिकदर ने भावुक पोस्ट में लिखा कि आंदोलन कर रहे अधिकांश छात्र सामान्य परिवारों से आते हैं, जो सीमित संसाधनों के बावजूद न्याय की उम्मीद में संघर्ष कर रहे हैं। उन्होंने छात्रों की परिस्थितियों के प्रति संवेदनशीलता दिखाने की अपील की।
कलाकारों के समर्थन की मुख्य वजह
इन कलाकारों का कहना है कि शिक्षा व्यवस्था में पारदर्शिता, परीक्षा प्रणाली में सुधार और छात्रों के भविष्य की सुरक्षा सबसे महत्वपूर्ण मुद्दे हैं। उनका मानना है कि यदि छात्र शांतिपूर्ण ढंग से अपनी मांगें रख रहे हैं तो लोकतांत्रिक व्यवस्था में उनके साथ संवाद होना चाहिए। कई कलाकारों ने पुलिस बल प्रयोग पर सवाल उठाते हुए कहा कि लोकतंत्र में असहमति का जवाब बातचीत से दिया जाना चाहिए, न कि बल प्रयोग से।
नोट: इस पूरे घटनाक्रम में छात्रों और समर्थकों द्वारा लगाए गए आरोप, पुलिस की कार्रवाई और राजनीतिक मांगें संबंधित पक्षों के दावे हैं। इन पर संबंधित एजेंसियों और अधिकारियों की आधिकारिक प्रतिक्रिया तथा जांच की प्रक्रिया को भी ध्यान में रखा जाना चाहिए।





