विंढमगंज। दुर्गा पूजा के अवसर पर राम-जानकी मंदिर एवं मां काली मंदिर में बंगाल की सभ्यता और परंपरा की मनमोहक झलक देखने को मिली। मां दुर्गा के विसर्जन से पूर्व महिलाओं ने पारंपरिक रीति-रिवाज के अनुसार खोइछा भराई की रस्म निभाई। मां के चरणों में प्रणाम कर सुख-समृद्धि और परिवार की खुशहाली की कामना की। इसके बाद महिलाओं ने एक-दूसरे को सिंदूर लगाकर बंगाल की प्रसिद्ध सिंदूर खेला की परंपरा निभाई।




राम-जानकी मंदिर में ग्राम प्रधान तारा देवी, ज्योति केशरी, नैना गुप्ता, पूजा उपाध्याय, पुष्पा, पम्मी, काजल, साधना, लिया और लक्ष्मी सहित अन्य महिलाएं मौजूद रहीं। महिलाओं ने मां दुर्गा की खोइछा भराई की रस्म में भाग लिया और पारंपरिक तरीके से मां को प्रणाम कर विदाई की रस्म निभाई।
वहीं, मां काली मंदिर में शालू जायसवाल, गुड़िया केशरी, शांति देवी, पम्मी जायसवाल, नेहा जायसवाल, सरोज जायसवाल और नीतू केशरी सहित अन्य महिलाओं ने उत्साहपूर्वक भाग लिया। इस दौरान महिलाओं ने तरसा ढोल की थाप पर मां के दरबार में झूमकर अपनी श्रद्धा व्यक्त की। ढोल की गूंज और मां के जयकारों से मंदिर परिसर भक्तिमय हो उठा।
सिंदूर खेला के दौरान महिलाओं ने एक-दूसरे को सिंदूर लगाकर सुख-समृद्धि और अखंड सौभाग्य की कामना की। मां दुर्गा के विसर्जन से पहले आयोजित इस पारंपरिक रस्म में महिलाओं का उत्साह देखते ही बना। मां की विदाई के भावुक क्षणों में श्रद्धालुओं ने अगले वर्ष फिर से मां के आगमन की कामना की। दोनों मंदिरों में आस्था, उल्लास और बंगाल की पारंपरिक संस्कृति का अनूठा संगम देखने को मिला।












