October 13, 2026 4:25 am

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विधानसभा चुनाव 2027 की तैयारी तेज, मतदाता सूची दुरुस्त करने में जुटा तहसील प्रशासन एसडीएम अशोक कुमार गुप्ता ने बीएलओ और सुपरवाइजरों को दिए निर्देश, नए मतदाताओं के नाम जोड़ने और विलोपित नामों का सत्यापन करने पर जोर दुद्धी, सोनभद्र। विधानसभा चुनाव 2027 के मद्देनजर मतदाता सूची को त्रुटिरहित बनाने के लिए निर्वाचन आयोग के निर्देश पर तहसील प्रशासन सक्रिय हो गया है। इसी क्रम में दुद्धी तहसील सभागार में उपजिलाधिकारी अशोक कुमार गुप्ता की अध्यक्षता में समीक्षा बैठक आयोजित की गई। इसमें तहसील क्षेत्र के सभी सुपरवाइजरों और बूथ लेवल अधिकारियों (बीएलओ) को मतदाता सूची पुनरीक्षण के संबंध में आवश्यक दिशा-निर्देश दिए गए। बैठक में एसडीएम ने कहा कि स्वच्छ और त्रुटिरहित मतदाता सूची तैयार करना प्रशासन की प्राथमिकता है। उन्होंने बीएलओ को अपने-अपने क्षेत्रों में घर-घर जाकर पात्र मतदाताओं का सत्यापन करने तथा 18 वर्ष की आयु पूरी करने वाले युवाओं को चिह्नित कर उनका फॉर्म-6 भरवाने का निर्देश दिया, ताकि कोई भी पात्र युवा मतदान के अधिकार से वंचित न रहे। विलोपित नामों का होगा भौतिक सत्यापन एसडीएम ने मतदाता सूची से हटाए गए नामों के संबंध में विशेष सतर्कता बरतने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि बीएलओ संबंधित मतदाताओं के घर जाकर भौतिक सत्यापन करें। जांच में कोई पात्र मतदाता सूची से बाहर पाया जाता है तो नियमानुसार आवश्यक दस्तावेजों के साथ फॉर्म-6 भरवाकर उसका नाम जोड़ने की प्रक्रिया पूरी की जाए। लापरवाही पर होगी कार्रवाई एसडीएम ने स्पष्ट किया कि निर्वाचन संबंधी कार्यों में किसी भी प्रकार की लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी। सभी बीएलओ को निर्धारित समयसीमा के भीतर सत्यापन और आवेदन संबंधी कार्य पूरा करने के निर्देश दिए गए। बैठक में तहसील प्रशासन के अधिकारियों के साथ बड़ी संख्या में बीएलओ और सुपरवाइजर मौजूद रहे।

राम जन्मभूमि मंदिर मामला फिर सुप्रीम कोर्ट पहुंचा, निर्मोही अखाड़े ने ट्रस्ट पर उठाए सवाल

अयोध्या स्थित श्रीराम जन्मभूमि मंदिर के प्रबंधन, वित्तीय लेन-देन और धार्मिक परंपराओं को लेकर मामला एक बार फिर सुप्रीम कोर्ट पहुंच गया है। श्री पंच रामानंदी निर्मोही अखाड़ा ने शीर्ष अदालत में याचिका दाखिल कर श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट के पुनर्गठन, वित्तीय लेन-देन के फोरेंसिक ऑडिट और रामानंदी परंपरा के अनुसार पूजा-सेवा बहाल करने की मांग की है।

निर्मोही अखाड़े का आरोप है कि मौजूदा ट्रस्ट एक निजी संस्था की तरह कार्य कर रहा है और केंद्र सरकार ने 9 नवंबर 2019 के सुप्रीम कोर्ट के ऐतिहासिक फैसले की मूल भावना का पूरी तरह पालन नहीं किया है। इस याचिका पर सुप्रीम कोर्ट में 27 जुलाई को सुनवाई प्रस्तावित है।

अखाड़े के अधिवक्ता तरुणजीत वर्मा ने बताया कि यह आवेदन ‘मोहम्मद सिद्दीकी बनाम सुरेश दास’ (सिविल अपील संख्या 10866 एवं 10867) के तहत दाखिल किया गया है।

याचिका में प्रमुख मांगें

याचिका में आठ प्रमुख राहतों की मांग की गई है, जिनमें शामिल हैं:

  • 9 नवंबर 2019 के सुप्रीम कोर्ट के फैसले का पूर्ण और सही अनुपालन सुनिश्चित किया जाए।
  • मंदिर के चढ़ावे और चंदे से जुड़े वित्तीय लेन-देन का फोरेंसिक ऑडिट कराया जाए।
  • 1950 और 1982 में कुर्क की गई भगवान रामलला की अष्टधातु और चांदी की मूर्तियों सहित सभी धार्मिक वस्तुओं को एक स्थान पर रखकर पूजा की व्यवस्था की जाए। यदि ऐसा संभव न हो तो ये वस्तुएं निर्मोही अखाड़े को सौंपने का निर्देश दिया जाए।
  • ट्रस्ट के कार्यों की निगरानी के लिए हाईकोर्ट स्तर की मॉनिटरिंग कमेटी गठित की जाए।
  • मंदिर में पूजा, सेवा, भोग और धार्मिक अनुष्ठान रामानंदी संप्रदाय की पारंपरिक विधि के अनुसार कराए जाएं।
  • रामानंदी बैरागी संतों को ट्रस्ट के निर्णयों की निगरानी में उचित भूमिका दी जाए।

2019 के फैसले का हवाला

याचिका में सुप्रीम कोर्ट के 9 नवंबर 2019 के फैसले के पैराग्राफ 804 और 805(4) का उल्लेख किया गया है। अखाड़े का कहना है कि अदालत ने अपने निर्णय में निर्मोही अखाड़े की ऐतिहासिक भूमिका को स्वीकार करते हुए मंदिर प्रबंधन में उसे उचित प्रतिनिधित्व देने का निर्देश दिया था, जिसका पर्याप्त पालन नहीं हुआ।

अब 27 जुलाई की सुनवाई में यह स्पष्ट होगा कि सुप्रीम कोर्ट इस याचिका पर क्या रुख अपनाता है और क्या मंदिर ट्रस्ट के प्रबंधन या संरचना को लेकर कोई नया निर्देश जारी करता है।

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Author: Digital Bharat News

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