October 21, 2026 5:25 am

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आज होगा असत्य पर सत्य की विजय, भारती इंटर कॉलेज खेल मैदान व छठ पूजा स्थल पर होगा रावण दहन विंढमगंज (सोनभद्र)। असत्य पर सत्य की विजय और अधर्म पर धर्म की जीत का प्रतीक विजयादशमी का पर्व आज विंढमगंज क्षेत्र में धूमधाम से मनाया जाएगा। स्थानीय भारती इंटर कॉलेज के खेल मैदान एवं छठ पूजा स्थल पर विशालकाय रावण के पुतले का दहन किया जाएगा। विंढमगंज में रावण दहन की यह ऐतिहासिक परंपरा करीब 50 वर्षों से चली आ रही है। इस भव्य आयोजन को देखने के लिए सोनभद्र सहित आसपास के क्षेत्रों और पड़ोसी राज्यों से भी बड़ी संख्या में लोग पहुंचते हैं। विजयादशमी के अवसर पर दोनों स्थलों पर मेले को लेकर उत्साह का माहौल रहता है। क्षेत्र के विभिन्न दुर्गा पूजा पंडालों में स्थापित मां दुर्गा की प्रतिमाओं की आकर्षक झांकियां भी खेल मैदान में पहुंचती हैं। हजारों की संख्या में महिला, पुरुष और बच्चे इस आयोजन में शामिल होकर मेले की रौनक बढ़ाते हैं। राम-रावण युद्ध होगा आकर्षण का केंद्र रावण दहन कार्यक्रम का मुख्य आकर्षण भगवान श्रीराम और दशानन रावण के बीच होने वाला प्रतीकात्मक युद्ध होता है। युद्ध के अंतिम चरण में भगवान श्रीराम का बाण रावण के विशालकाय पुतले को धराशायी कर देता है। इसके साथ ही पूरा मैदान जय श्रीराम के जयकारों से गूंज उठता है और असत्य पर सत्य की विजय का संदेश जन-जन तक पहुंचता है। राम जानकी मंदिर के कार्यकर्ताओं की रहती है अहम भूमिका इस ऐतिहासिक आयोजन को सफल बनाने में राम जानकी मंदिर के कार्यकर्ताओं का महत्वपूर्ण योगदान रहता है। कार्यकर्ता महीनों पहले से तैयारियों में जुट जाते हैं और अथक मेहनत से मेले को आकर्षक स्वरूप प्रदान करते हैं। रावण के विशालकाय पुतले के निर्माण से लेकर अन्य व्यवस्थाओं तक में आयोजन समिति के सदस्यों का योगदान सराहनीय रहता है। सुरक्षा व्यवस्था को लेकर पुलिस प्रशासन सतर्क मेले में उमड़ने वाली भारी भीड़ को देखते हुए स्थानीय पुलिस प्रशासन भी सुरक्षा व्यवस्था को लेकर सतर्क रहता है। थाना प्रभारी अपने हमराहियों के साथ मौके पर मुस्तैद रहकर शांति व्यवस्था बनाए रखने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं, ताकि श्रद्धालुओं और दर्शकों को किसी प्रकार की परेशानी न हो तथा आयोजन शांतिपूर्ण ढंग से संपन्न हो सके। विजयादशमी के अवसर पर विंढमगंज के दोनों आयोजन स्थलों पर उत्सव का माहौल देखने को मिलेगा। लोगों को उस ऐतिहासिक क्षण का इंतजार है, जब भगवान श्रीराम के बाण से रावण का विशालकाय पुतला धू-धू कर जलेगा और पूरा क्षेत्र असत्य पर सत्य की विजय के जयघोष से गूंज उठेगा।

रक्षाबंधन के दिन घर के बड़े बेटे आशीष का निधन, बहनों की राखी रह गई अधूरी; दो मासूम बच्चों के सिर से उठा पिता का साया

विंढमगंज। थाना क्षेत्र के बुटवेढ़वा निवासी आशीष चंद्रवंशी उर्फ डिम्पू (45 वर्ष), पुत्र लल्लू चंद्रवंशी का शुक्रवार की सुबह करीब तीन बजे वाराणसी में इलाज के दौरान निधन हो गया। वह पिछले कुछ दिनों से अस्वस्थ चल रहे थे और बनारस में उनका उपचार चल रहा था। निधन के बाद शुक्रवार को उनका शव घर पहुंचा तो परिवार में कोहराम मच गया। रक्षाबंधन के पावन पर्व पर हुई इस दुखद घटना से पूरे विंढमगंज बाजार क्षेत्र में शोक की लहर दौड़ गई।

आशीष परिवार के बड़े बेटे और अपनी बहनों के भाई थे। रक्षाबंधन के दिन जहां बहनें अपने भाइयों की कलाई पर राखी बांधकर उनकी लंबी उम्र और खुशहाल जीवन की कामना करती हैं, वहीं आशीष की बहनों के लिए यह पर्व जिंदगी भर का गहरा दर्द बन गया। जिस भाई की कलाई पर राखी बांधने की उम्मीद रही होगी, उसी दिन उसका पार्थिव शरीर घर पहुंचा। भाई को खोने का गम बहनों के लिए कितना असहनीय रहा होगा, इसका अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि घर में रक्षाबंधन की खुशियों की जगह चारों ओर मातम छा गया।आशीष बेहद मेहनती और सरल स्वभाव के व्यक्ति थे। वह अपनी आजीविका के लिए विंढमगंज बाजार में चाट-फुल्की का ठेला लगाते थे। इसी छोटी सी आमदनी से वह पत्नी और बच्चों का भरण-पोषण करते थे। आर्थिक परिस्थितियां भले ही सामान्य थीं, लेकिन बच्चों के भविष्य को लेकर उनका सपना बहुत बड़ा था।

परिजनों और परिचितों के अनुसार आशीष अपने दोनों बच्चों की पढ़ाई को लेकर काफी सजग रहते थे। वह अक्सर कहते थे कि “अपने बच्चों को खूब पढ़ाऊंगा और उन्हें अफसर बनाऊंगा।” बच्चों के बेहतर भविष्य के लिए वह दिन-रात मेहनत करते थे। लेकिन अचानक बीमारी और असमय निधन ने उनके इस सपने को अधूरा छोड़ दिया।

आशीष अपने पीछे पत्नी और करीब 10 एवं 12 वर्ष के दो मासूम बच्चों को छोड़ गए हैं। पिता के निधन से दोनों बच्चों के सिर से पिता का साया उठ गया है। वहीं परिवार के सामने अब भरण-पोषण के साथ बच्चों की पढ़ाई जारी रखने की बड़ी चुनौती खड़ी हो गई है। जिस पिता ने अपने बच्चों को अफसर बनाने का सपना देखा था, आज उनके जाने के बाद यही सवाल परिवार और समाज के सामने है कि इन मासूम बच्चों का भविष्य अब कैसे संवरेगा। शुक्रवार को शव घर पहुंचते ही पत्नी, बच्चों और बहनों का रो-रोकर बुरा हाल हो गया। आशीष के अंतिम दर्शन के लिए रिश्तेदारों, परिचितों और स्थानीय लोगों की भीड़ जुट गई। बाजार के दुकानदार और उन्हें जानने वाले लोग भी उनके निधन से बेहद दुखी नजर आए।रक्षाबंधन का पर्व इस परिवार के लिए इस बार खुशियों के बजाय कभी न भूलने वाला गम दे गया। बहनों की राखी की डोर तो वही रहेगी, लेकिन अब उस कलाई पर भाई का हाथ हमेशा के लिए नहीं रहेगा। वहीं दो मासूम बच्चों के लिए पिता का साया और उनका अफसर बनने का सपना एक भावुक याद बनकर रह गया है।

Om prakash Rawat
Author: Om prakash Rawat

📰 पत्रकार | सामाजिक कार्यकर्ता 📍 विंढमगंज, सोनभद्र, उत्तर प्रदेश ✍️ स्थानीय खबरों की आवाज़ 🤝 समाजहित एवं जनसमस्याओं के लिए हमेशा तत्पर 🏡 गांव, गरीब और आम जनता की बात 📢 सच, निष्पक्षता और जनसेवा मेरा संकल्प

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