धोखाधड़ी मामले में दम्पति के विरुद्ध एफआईआर दर्ज करने का आदेश
– एसीजेएम कोर्ट ने अनपरा थानाध्यक्ष को रिपोर्ट दर्ज कर विवेचना करने एवं कृत कार्रवाई से अवगत कराने का आदेश दिया है
– धोखाधड़ी कर 5 लाख 75 हजार रुपये गबन करने का है आरोप
सोनभद्र ब्यूरो चीफ दिनेश उपाध्याय-(ओबरा/सोनभद्र/उत्तर प्रदेश)–डिजिटल भारत न्यूज 24×7 LIVE
सोनभद्र। धोखाधड़ी कर 5 लाख 75 हजार रुपये गबन किए जाने के मामले में अपर सिविल जज सीनियर डिवीजन/एसीजेएम, सोनभद्र अजय सिंह की अदालत ने बुधवार को सुनवाई करते हुए प्रथम दृष्टया संज्ञेय अपराध मानते हुए दम्पति के विरुद्ध अनपरा थानाध्यक्ष को एफआईआर दर्ज करने एवं विवेचना का आदेश दिया है। साथ ही कृत कार्रवाई से कोर्ट को अवगत कराने का आदेश दिया है। यह आदेश पंकज कुमार सिंह पुत्र शिव दयाल सिंह निवासी सिरसोती, नकटू, थाना बीजपुर, जिला सोनभद्र द्वारा अधिवक्ता अरुण कुमार सिंघल के जरिए दाखिल 173(4)बीएनएसएस प्रार्थना पत्र पर सुनवाई करते हुए कोर्ट ने दिया है।दिए प्रार्थना पत्र में पंकज कुमार सिंह ने अवगत कराया है कि आकाश कुमार सिंह पुत्र वीरेंद्र प्रताप सिंह व श्वेता सिंह पत्नी आकाश कुमार सिंह निवासी ग्राम चेतवा, थाना बीजपुर, जिला सोनभद्र जो पूर्व से परिचित थे उसके घर आए और श्वेता सिंह अपने को सिटी म्युचुअल बेनिफिट इंडिया लिमिटेड शाखा अनपरा औड़ी मोड़, थाना अनपरा, जिला सोनभद्र का एजेंट बताई। उसने कहा कि 4वर्ष के लिए एक आरडी प्लान करा लीजिए। 10 हजार रुपये प्रतिमाह 4 वर्ष तक जमा करना होगा। 4 वर्ष बाद 6 लाख 10 हजार 800 रुपये मिलेगा।

श्वेता सिंह की बातों पर विश्वास करके 31 जुलाई 2021 को 10 हजार रुपये नगद देकर आरडी करा लिया। अनपरा ब्रांच ऑफिस में 20-25 पन्नों पर हस्ताक्षर कराया गया। उसके बाद पुनः 11 अगस्त 2021 को 2 लाख रुपये फिक्स डिपाजिट 3 वर्ष के लिए चेक के माध्यम से किया गया। जिसे भारतीय स्टेट बैंक शाखा बभनी से आकाश कुमार सिंह ने प्राप्त किया है। जो 3 वर्ष बाद 2 लाख 81 हजार रुपये मिलने की बात कही गई। जब 3 वर्ष पूर्ण हो गया तो पैसे के भुगतान के लिए कहा गया तो पहले जल्द ही दिलाने की बात कही गई। बाद में पैसा मांगने पर गाली गलौज और जान मारने की धमकी दी जा रही है। उनका कहना है कि अब कंपनी नहीं है तो पैसा नहीं मिलेगा। इसकी सूचना अनपरा थाने में दी गई लेकिन कोई सुनवाई नहीं हुई। तब 21 जुलाई 2026 को रजिस्टर्ड डाक से एसपी सोनभद्र को सूचना दिया। वहां से भी कोई कार्रवाई नहीं होने पर कोर्ट में प्रार्थना पत्र दाखिल किया गया है।मामले की सुनवाई करते हुए अदालत ने अधिवक्ता अरुण कुमार सिंघल के तर्कों को सुनने, अनपरा थाने से आई रिपोर्ट जिसमें कोई मुकदमा दर्ज न होने पर संज्ञेय अपराध मानते हुए अनपरा थानाध्यक्ष को एफआईआर दर्ज करने एवं विवेचना करने का आदेश दिया है। कोर्ट ने कृत कार्रवाई से अवगत कराने का आदेश अनपरा थानाध्यक्ष को दिया है।











