जिलाधिकारी से तत्काल हस्तक्षेप की मांग,कार्यदायी संस्था के खिलाफ ग्रामीणों में आक्रोश
कोन/सोनभद्र। विकास खंड कोन क्षेत्र में जल जीवन मिशन के तहत संचालित हर्रा-कदरा ग्राम समूह पेयजल योजना को लेकर ग्रामीणों में आक्रोश बढ़ता जा रहा है। फ्लोरोसिस प्रभावित क्षेत्रों में भी नियमित एवं शुद्ध पेयजल उपलब्ध नहीं होने से शनिवार को कचनरवा के टोला असनाबांध में ग्रामीणों ने जोरदार प्रदर्शन कर जल निगम एवं कार्यदायी संस्था के खिलाफ नारेबाजी की।

ग्रामीणों का आरोप है कि कार्यदायी संस्था विष्णु प्रकाश आर पुंगलिया लिमिटेड की कथित लापरवाही के चलते योजना का लाभ लोगों को नहीं मिल पा रहा है। कई स्थानों पर नल कनेक्शन होने के बावजूद वर्षों से पानी की आपूर्ति नहीं हुई है। ग्रामीणों का कहना है कि कुछ स्थानों पर कागजों में कार्य पूर्ण दिखाए जाने के बावजूद धरातल पर स्थिति अलग है।
ग्रामीणों के मुताबिक कचनरवा के असनाबांध वार्ड नंबर-3 में करीब दो वर्षों से जलापूर्ति बाधित है। इस संबंध में मुख्यमंत्री हेल्पलाइन एवं संबंधित पोर्टल पर शिकायतें भी की गईं, लेकिन ग्रामीणों का आरोप है कि समस्या का वास्तविक समाधान किए बिना ही जांच आख्या लगा दी गई।
फ्लोराइड प्रभावित क्षेत्रों में गंभीर स्थिति-
ग्रामीणों ने बताया कि सिधवादामर, कुड़वा समेत कई स्थानों पर लोग आज भी नदी-नाले, चुआड़ एवं अन्य स्रोतों से पानी लेने को मजबूर हैं। सामाजिक कार्यकर्ता जोखन प्रसाद यादव एवं वन समिति अध्यक्ष बिहारी प्रसाद यादव ने कहा कि दूषित पानी के सेवन से क्षेत्र में फ्लोरोसिस की समस्या गंभीर बनी हुई है। बच्चों के दांत पीले पड़ने और लोगों में बीमारी के लक्षण दिखाई देने की बात भी ग्रामीणों ने कही।
ग्रामीणों का आरोप है कि डीआई पाइपलाइन, एचडीपी एवं एमडीपीई पाइपलाइन कई स्थानों पर मानक के अनुरूप गहराई में नहीं बिछाई गई है तथा पाइप की गुणवत्ता को लेकर भी सवाल उठ रहे हैं।
कचनरवा ग्राम पंचायत के असनाबांध वार्ड-3 एवं वार्ड-2, बड़ाप, मधुरी, नरोइयादामर, रोहिनवादामर, बागेसोती, सिंगा, डुबवा, धौरवादामर, सेमरवादामर, गोबरदाहा, डीलवाहा, शिवाखाड़ी, धीचोरवा, बिछमरवा, केवाल, पीपरखाड़, भालुकूदर, गीधिया, ललकीदामर, भरनासीली, चरकपथली और नकतवार सहित कई गांवों में जलापूर्ति प्रभावित होने का ग्रामीणों ने दावा किया। ग्रामीणों का कहना है कि टंकी से सटे बड़ाप गांव, कचनरवा यादव बस्ती एवं मुख्य बाजार के कई परिवार भी अब तक नल कनेक्शन से वंचित हैं।
वर्षों से बंद हैंडपंप, मरम्मत पर भी उठे सवाल-
कचनरवा के असनाबांध में रामप्यारे बियार के घर के पास लगा हैंडपंप भी कई वर्षों से बंद पड़ा है। स्थानीय लोगों का कहना है कि इसकी जानकारी संबंधित प्रतिनिधियों एवं ग्राम पंचायत स्तर के अधिकारियों को कई बार दी गई, लेकिन अब तक ठोस कार्रवाई नहीं हुई। ग्रामीणों ने आरोप लगाया कि हैंडपंपों की मरम्मत के नाम पर प्रतिवर्ष लाखों रुपये खर्च किए जाने के बावजूद कई हैंडपंप बंद पड़े हैं।
शनिवार को सुधीर की अगुवाई में हुए प्रदर्शन में जिला पंचायत सदस्य छविंद्र नाथ, समाजसेवी गंगा प्रसाद यादव, बिहारी प्रसाद यादव, रामप्यारे बियार, मोहर, बचई समेत बड़ी संख्या में ग्रामीण मौजूद रहे। प्रदर्शनकारियों ने नियमित पेयजल आपूर्ति सुनिश्चित कराने की मांग की।
ग्रामीणों ने मुख्यमंत्री एवं जिलाधिकारी से मामले में तत्काल हस्तक्षेप कर योजना की उच्चस्तरीय जांच कराने, पेयजल आपूर्ति सुचारु कराने तथा दोषी पाए जाने वालों के खिलाफ कठोर कार्रवाई की मांग की है।
विभाग ने जल्द सुधार का दिया आश्वासन-
इस संबंध में एई ममूर अली (जल निगम) ने बताया कि कुछ गांवों में जलापूर्ति शुरू कर दी गई है। कुछ स्थानों पर पाइप क्षतिग्रस्त होने के कारण समस्या उत्पन्न हुई है, जिसे जल्द ठीक कराया जाएगा। इसके बाद लोगों को नियमित रूप से पानी मिलने लगेगा।
वहीं एडीओ पंचायत महिपाल लकड़ा ने असनाबांध में बंद हैंडपंप के मामले में कहा कि प्रकरण की जांच कर आवश्यक कार्रवाई की जाएगी।
अब देखना यह है कि विभागीय अधिकारियों के आश्वासन के बाद फ्लोरोसिस प्रभावित ग्रामीणों को कब तक नियमित एवं शुद्ध पेयजल उपलब्ध हो पाता है।











