अधिवक्ताओं ने स्टांप एवं पंजीयन विभाग मंत्री के नाम संबोधित ज्ञापन उप निबंधन अधिकारी ओबरा को सौंपा ज्ञापन
सोनभद्र ब्यूरो चीफ दिनेश उपाध्याय-(ओबरा/सोनभद्र/उत्तर प्रदेश)–डिजिटल भारत न्यूज 24×7 LIVE
ओबरा/सोनभद्र।उत्तर प्रदेश में संपत्तियों के नए मूल्यांकन/सर्किल रेट (नवीन दर सूची) को लेकर ओबरा तहसील और उप निबंधक (सब-registrar) कार्यालयों में वकीलों (अधिवाक्तओं) द्वारा विरोध-प्रदर्शन कर माननीय मंत्री जी के नाम ज्ञापन सौंपा गया नई एकीकृत दर सूची और नियमों में बदलाव के बाद कई जगहों पर स्थानीय स्तर पर विसंगतियों या दरों में संशोधन की मांग को लेकर अधिवक्ता संघर्ष समिति ने ज्ञापन दिया।प्रस्तावित दर सूची को अत्यधिक जटिल एवं छह चरणों में इस प्रकार तैयार किया गया है कि इसे समझना सामान्य नागरिकों की बात तो दूर, अधिकांश अधिवक्ताओं एवं विभागीय अधिकारियों के लिए भी कठिन हो गया है। ऐसी व्यवस्था जनसुविधा के बजाय जन असुविधा उत्पन्न करेगी।शासन का उद्देश्य प्रक्रियाओं को सरल, पारदर्शी एवं जनहितकारी बनाना होना चाहिए, किंतु विभाग के उच्च अधिकारियों द्वारा तैयार की जा रही यह व्यवस्था इसके विपरीत दिखाई देती है। इससे आम नागरिकों को अनावश्यक भ्रम एवं कठिनाइयों का सामना करना पड़ेगा। संघर्ष समिति के संयोजक एडवोकेट उमेश चंद शुक्ला ने कहा कि प्रस्तावित नवीन एवं जटिल दर सूची को वर्तमान स्वरूप में लागू न किया जाए। यदि दरों में वृद्धि आवश्यक हो तो वर्तमान में लागू दर सूची के आधार पर ही आवश्यक संशोधन किया जाए, जिससे व्यवस्था सरल, पारदर्शी एवं जनहितकारी बनी रहे तथा आम जनता को किसी प्रकार की अनावश्यक परेशानी का सामना न करना पड़े।इस प्रकार की जटिल व्यवस्था का सीधा प्रभाव उत्तर प्रदेश सरकार की जनहितकारी छवि पर पड़ेगा।

यदि जनता अपनी ही भूमि के क्रय-विक्रय की प्रक्रिया को समझने में असमर्थ रहेगी, तो शासन के प्रति अनावश्यक असंतोष उत्पन्न होना स्वाभाविक है।माननीय मंत्री जी, आप विगत चार वर्षों से जनपद सोनभद्र के प्रभारी मंत्री रहे हैं तथा इस जनपद की भौगोलिक, सामाजिक एवं आर्थिक परिस्थितियों से भली-भांति परिचित हैं। इसके बावजूद यदि ऐसी व्यवस्था लागू होती है, जिससे आमजन का शोषण या उत्पीड़न होने की आशंका हो, तो यह अत्यंत चिंताजनक विषय है।प्रस्तावित व्यवस्था में कृषि भूमि के क्रय हेतु ग्रामीण क्षेत्र में 300 वर्गमीटर तथा विकासशील क्षेत्र में 500 वर्गमीटर की सीमा लागू करने का प्रस्ताव इस जनपद की वास्तविक परिस्थितियों के अनुकूल प्रतीत नहीं होता। सोनभद्र में अनुसूचित जाति एवं अनुसूचित जनजाति की बड़ी आबादी निवास करती है। ऐसी स्थिति में यह व्यवस्था व्यवहारिक न होकर आम नागरिकों के लिए अतिरिक्त आर्थिक एवं प्रशासनिक बोझ सिद्ध हो सकती है।इस अवसर पर संजय द्विवेदी दिनेश पांडे नंदलाल नंदलाल पाठक सुशील पांडे अर्जुन शर्मा अजय यादव मनीष मिश्रा अमित उपाध्याय मनोज पाठक कमलेश यादव राजीव कुमार दत्ता कौशल पांडे विरेंद्र पांडेय एस के जैन सहित अन्य अधिवक्ता मौजूद रहे ।





