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अमेरिका में गौतम अडानी से जुड़े मामले में नया मोड़ आ गया है. अमेरिकी न्याय विभाग उनके खिलाफ दर्ज एक केस को वापस लेना चाहता है, लेकिन संघीय जज निकोलस गराउफिस ने इस फैसले पर सवाल उठाते हुए सरकार से 13 जुलाई तक विस्तृत जवाब मांगा है. गराउफिस वह जज हैं जो ट्रंप प्रशासन को भी हड़काने से पीछे नहीं हटे हैं. आइए जानें उनके बारे में.
जज निकोलस जॉर्ज गराउफिस. (Credit-कोलंबिया यूनिवर्सिटी)
वॉशिंगटन: उद्योगपति गौतम अडानी से जुड़े अमेरिकी केस में नया मोड़ आ गया है. अमेरिकी न्याय विभाग (DOJ) ने मई में अदालत को बताया था कि वह गौतम अडानी के खिलाफ दायर आपराधिक मुकदमा आगे नहीं चलाना चाहता. लेकिन अब अमेरिकी संघीय जज निकोलस जॉर्ज गराउफिस (Nicholas Garaufis) ने सरकार से ऐसे सवाल पूछ दिए हैं, जिन्होंने पूरे मामले को फिर चर्चा में ला दिया है. ब्रुकलिन की संघीय अदालत के जज गराउफिस ने फिलहाल केस बंद करने से इनकार कर दिया है. उन्होंने अमेरिकी न्याय विभाग से कहा है कि वह 13 जुलाई तक विस्तार से बताए कि आखिर केस वापस लेने का फैसला क्यों किया गया.
आखिर कौन हैं जज निकोलस गराउफिस?
77 वर्षीय निकोलस जॉर्ज गराउफिस अमेरिका के सबसे अनुभवी संघीय जजों में गिने जाते हैं. उनका जन्म 28 सितंबर 1948 को न्यू जर्सी में हुआ था. उनके दादा-दादी ग्रीस से अमेरिका आए थे. उन्होंने कोलंबिया यूनिवर्सिटी से पढ़ाई की और कानून की डिग्री भी वहीं से हासिल की. वकालत शुरू करने से पहले वह न्यूयॉर्क के सरकारी स्कूलों में शिक्षक भी रह चुके हैं.
जॉर्ज गराउफिस का कोर्टरूम स्केच.
बिल क्लिंटन ने बनाया था जज
करीब दो दशक तक वकालत और सरकारी कानूनी सेवाओं में काम करने के बाद उन्हें साल 2000 में तत्कालीन अमेरिकी राष्ट्रपति बिल क्लिंटन ने न्यूयॉर्क के ईस्टर्न डिस्ट्रिक्ट फेडरल कोर्ट का जज नियुक्त किया था. अमेरिकी सीनेट ने बिना किसी विरोध के उनकी नियुक्ति को मंजूरी दी थी. 2014 में उन्होंने ‘सीनियर जज’ का दर्जा लिया, लेकिन आज भी बड़े और संवेदनशील मामलों की सुनवाई कर रहे हैं. ट्रंप प्रशासन को वह कई मुद्दों पर लताड़ लगा चुके हैं.
ब्रुकलिन कोर्टहाउस.
कई बड़े केस संभाले
- गराउफिस ने अपने करियर में अमेरिका के कई हाई-प्रोफाइल मामलों की सुनवाई की है. उनका सबसे चर्चित मामला NXIVM सेक्स कल्ट का था, जिसमें संगठन के प्रमुख कीथ रेनियर को महिलाओं का शोषण करने और उन्हें ब्लैकमेल कर गुलाम बनाने का दोषी ठहराया गया था.
- इसके अलावा उन्होंने न्यूयॉर्क फायर डिपार्टमेंट में नस्लीय भेदभाव से जुड़े मामले में ऐतिहासिक फैसला दिया, जिससे अश्वेत और हिस्पैनिक समुदाय के लोगों की भर्ती का रास्ता खुला.
- उन्होंने ‘डिफर्ड एक्शन फॉर चाइल्डहुड अराइवल्स’ (DACA) कार्यक्रम से जुड़े मामले में भी अहम आदेश दिया था, जिससे अमेरिका में रहने वाले लाखों प्रवासी युवाओं को राहत मिली. वहीं माफिया सरगना विन्सेंट बासियानो को उम्रकैद की सजा सुनाने वाला फैसला भी काफी चर्चित रहा.
अडानी केस में क्या कहा?
अमेरिकी न्याय विभाग ने अदालत को बताया था कि वह 2024 में दर्ज सिक्योरिटीज फ्रॉड और वायर फ्रॉड के आरोपों वाला मामला आगे नहीं बढ़ाना चाहता. लेकिन जज गराउफिस ने कहा कि सरकार का बयान ‘बहुत छोटा, सामान्य और निष्कर्षात्मक’ है. अदालत को यह जानने का अधिकार है कि आखिर केस वापस लेने की ठोस वजह क्या है. इसी कारण उन्होंने न्याय विभाग को 13 जुलाई तक विस्तृत जवाब दाखिल करने का निर्देश दिया है.
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Yogendra Mishra holds a degree in Journalism from the University of Allahabad. He has been actively associated with the media industry since 2017 and brings extensive experience across various domains of journa…और पढ़ें












