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बड़े-बड़े प्रोड्यूसर-डायरेक्टर भी बी-ग्रेड फिल्मों की फिल्मों को हिकारत भरी नजरों से देखते हैं. बॉलीवुड के एक बहुत बड़े डायरेक्टर-प्रोड्यूसर ने एक बी-ग्रेड फिल्म की मूवी की कहानी से आइडिया चुराया. उस पर ऐसी फिल्म बनाई कि बॉक्स ऑफिस पर तहलका मचा दिया. मजेदार बात यह रही कि फिल्म सिर्फ एक सिनेमा घर में रिलीज हुई थी. फिल्म रिलीज से पहले पूरे देश में जमकर बवाल हुआ. ऐसे में दर्शकों में फिल्म को लेकर दीवानगी बढ़ गई. इसी का फायदा उठाया गया और मूवी सुपरहिट साबित हुई. यह फिल्म कौन सी थी, आइये जानते हैं. यह सामाजिक मुद्दे पर बनी शुरुआती फिल्मों में से एक है. मूवी हिंदी सिनेमा के इतिहास में मील का पत्थर साबित हुई.
जो फिल्मों रिलीज से पहले विवादों से घिर जाती हैं, उनको देखने की ललक दर्शकों में बढ़ जाती है. 46 साल पहले बॉलीवुड के एक बड़े निर्माता-निर्देशक ने बी-ग्रेड फिल्म की मूवी से आइडिया चुराकर फिल्म बनाई. फिल्म की स्टोरी बहुत ही जबर्दस्त थी. फिल्म सामाजिक मुद्दे पर बनी थी. मजेदार बात यह है कि फिल्म को सिर्फ एक सिनेमाघर पर रिलीज किया लेकिन इसे लेकर हाइप इतनी ज्यादा बन गई थी कि कई डिस्ट्रीब्यूटर्स ने ऊंचे दाम पर खरीदा. फिल्म सुपरहिट साबित हुई. यह फिल्म थी ‘इंसाफ का तराजू’ जो कि 11 नवंबर 1980 में रिलीज हुई थी. इस फिल्म को लेकर बहुत बड़ी कंट्रोवर्सी हुई थी.

‘इंसाफ का तराजू’ को बॉलीवुड के जाने-माने निर्माता-निर्देशक बीआर चोपड़ा ने डायरेक्ट-प्रोड्यूस किया था. कहानी-स्क्रीनप्ले और डायलॉग शब्द कुमार ने लिखे थे. फिल्म की शुरुआत में धर्मेंद्र स्पेशल रोल में नजर आए थे. फिल्म नायिका प्रधान थी. जीनत अमान लीड हीरोइन थीं. इसके अलावा राज बब्बर का रोल सबसे ज्यादा पावरफुल था. दीपक पाराशर, पदमिनी कोल्हापुरे, इफ्तिखार, सिमी ग्रेवाल, श्रीराम लागू ने भी फिल्म में अपनी एक्टिंग का जलवा दिखाया था.

फिल्म का म्यूजिक रविंद्र जैन ने कंपोज किया था. यह अमेरिकन फिल्म लिपिस्टिक (1976) का रीमेक थी. यह एक बी-ग्रेड फिल्म थी. इसी फिल्म से आइडिया चुराकर बीआर चोपड़ा ने यह मूवी बनाई जो कि अपने समय की बहुत ही विवादित फिल्म थी. फिल्म के रेप सीन्स पर खूब विवाद हुआ था. बीआर चोपड़ा ने कहानी को भारतीय समाज और संवेदनाओं को ध्यान में रखकर बनाया था. फिल्म ने समाज को सीख भी दी और कई सवाल भी किए. फिल्म ने दर्शकों को झकझोर कर रख दिया था.
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फिल्म एक सामाजिक मैसेज देती है. अगर कोई औरत खुले विचारों की है, पार्टी करती है तो इसका मतलब यह नहीं कि वो चरित्रहीन है. फिल्म की बेसिक थीम यही थी. फिल्म छोटे बजट की थी. शूटिंग महज दो माह में पूरी हो गई थी. फिल्म को रिलीज करवाने में बीआर चोपड़ा के पसीने छूट गए थे. दरअसल, फिल्म के रेप सीन बड़े-बड़े पोस्टर के साथ मशहूर लेखक-पत्रकार खुशवंत सिंह ने अपनी पत्रिका में छाप दिए थे. फिर क्या था, फिल्म विवादों में आ गई.

फिल्म में पद्मिनी कोल्हापुरे पर 8 मिनट लंबा रेप सीन फिल्माया गया था. सेंसर बोर्ड ने ऐसे कई सीन पर आपत्ति जताई. बीआर चोपड़ा ने कोर्ट का दरवाजा खटखटाया और जीत हासिल की. जैसे-तैसे फिल्म रिलीज करवाई. जब यह फिल्म आई, तब राज बब्बर इंडस्ट्री में नए थे. आउट साइडर थे. फिल्मों में छोटे-मोटे रोल निभाते थे. ऐसे समय में बीआर चोपड़ा ने मौका दिया. रवि चोपड़ा ने कपड़े दिए थे.

फिल्म में नजर आए टॉप मॉडल दीपक पाराशर और राज बब्बर उन दिनों कई फिल्मों में साथ नजर आए. दोनों की केमिस्ट्री बहुत शानदार थी. 1981-82 के दौरान दोनों निकाह और अरमान फिल्म में भी नजर आए. राज बब्बर को ‘इंसाफ का तराजा’ से बहुत फायदा हुआ जबकि दीपक पाराशर का करियर चंद फिल्मों में सिमट गया.

मजेदार बात यह है कि जब राज बब्बर की मां ने यह फिल्म दिल्ली में एक थिएटर में देखी तो पाया कि थिएटर्स पर लोग मोटी-मोटी गालियां दे रहे हैं. राज बब्बर ने अपने एक इंटरव्यू में कहा था, ‘मैंने अपना रोल जीनत अमान की वजह से शानदार ढंग से निभायाथा. उन्हें चोट भी लगी. मैंने उन्हें बांधा लेकिन उन्हें मैं सैल्यूट करता हूं. उनसे गजब का को-ऑपरेशन मिला था. उन्होंने मेरे काम की बहुत तारीफ की.’ 40 लाख के बजट में बनी ‘इंसाफ का तराजू’ एक सुपरहिट फिल्म साबित हुई थी. यह उस साल 11वीं सबसे ज्यादा कमाई करने वाली फिल्म थी.












