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FIFA World cup 2026: एज्टेका स्टेडियम में खेले जाने वाले इंग्लैंड और मेक्सिको के बीच मुकाबले पर फैंस की निगाहें टिकी रहेगी. ये वही स्टेडियम है जहां, इंग्लैंड के खिलाफ 1966 विश्व कप के क्वार्टर फाइनल में हैंड ऑफ गॉड वाला वाक्या हुआ था. इस मैच में डिएगो माराडोना का एक उनके हाथ लगकर पोस्ट में गया था, लेकिन रेफरी को पता नहीं चला था.
मेक्सिको बनाम इंग्लैंड
नई दिल्ली: मैक्सिको सिटी की ऊंचाई से लेकर डिएगो माराडोना के कुख्यात ‘हैंड ऑफ गॉड’ गोल की यादों तक इंग्लैंड के लिए सह-मेजबान के खिलाफ होने वाला मैच किसी भी तरह से आसान नहीं होगा, जहां उसे विषम परिस्थितियों का सामना करना पड़ सकता है. अंतिम 16 का यह मैच एज्टेका स्टेडियम में खेला जाएगा जहां मैक्सिको का रिकॉर्ड शानदार रहा है. यह स्टेडियम 1986 में खेले गए विश्व कप क्वार्टर फाइनल में इंग्लैंड के खिलाफ माराडोना के दो यादगार गोल का गवाह रहा है.
इनमें से एक बार गेंद माराडोना के हाथ को स्पर्श करके गई थी लेकिन रेफरी इसका अंदाजा नहीं लगा पाए थे. माराडोना ने बाद में इसे ‘हैंड आफ गॉड’ की संज्ञा दी थी. यह स्थान समुद्र तल से 7,300 फीट (2,200 मीटर) से अधिक की ऊंचाई पर स्थित है और इंग्लैंड की टीम के लिए यहां की परिस्थितियों से सामंजस्य बिठाना आसान नहीं होगा.
मेक्सिको के लिए लकी रहा है एज्टेका स्टेडियम
विश्व कप में इस स्टेडियम के रिकॉर्ड मैक्सिको के पक्ष में रहे हैं. उसने यहां विश्व कप में अभी तक जो 10 मैच खेले हैं उनमें वह अजेय रहा है. इंग्लैंड के कोच थॉमस ट्यूशेल के लिए हालांकि यहां की ऊंचाई चिंता का विषय है. ट्यूशेल ने कहा, ‘‘मुझे लगता है कि ऊंचाई से सामंजस्य बिठाना आसान नहीं होगा. यह मैक्सिको के लिए बहुत बड़ा फायदा हो सकता है. इस तरह की परिस्थितियों से सामंजस्य बिठाने के लिए काफी समय की जरूरत पड़ती है.’’
ऊंचाई वाले स्थान पर खिलाड़ियों को वायुमंडल के दबाव और कम ऑक्सीजन से जूझना पड़ सकता है. खेल वैज्ञानिकों के अनुसार इस तरह की परिस्थितियों से सामंजस्य बिठाने के लिए कम से कम दो सप्ताह की जरूरत पड़ती है. इंग्लैंड ने इससे पहले अपने सभी मैच अमेरिका में खेले हैं जहां भीषण गर्मी पड़ रही है. एज्टेका स्टेडियम इंग्लैंड के लिए दर्दनाक यादें समेटे हुए है.
40 साल पहले हुए था हैंड ऑफ गॉड वाला कांड
40 साल पहले इसी स्टेडियम में अर्जेंटीना ने 1966 के चैंपियन को क्वार्टर फाइनल में हराया था. वह मैच माराडोना के लिए दो यादगार पल का साक्षी रहा था. उन्होंने एक गोल हाथ से किया और दूसरा गोल ऐसा किया जिसे कई लोग टूर्नामेंट के इतिहास का सर्वश्रेष्ठ गोल मानते हैं. उन्होंने मैदान के बीच में गेंद को संभाला और ड्रिबल करते हुए इंग्लैंड के कई खिलाड़ियों को पीछे छोड़ा. उन्होंने आखिर में गोलकीपर पीटर शिल्टन को छकाकर गोल दागा था. ट्यूशेल ने कहा था कि चार दशक बाद किस्मत इंग्लैंड का साथ देगी. उन्होंने कहा, ‘‘मुझे उम्मीद है कि इस बार किस्मत हमारा साथ देगी. हम इस बार जीत हासिल करने नहीं सफल रहेंगे.’’
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जितेंद्र कुमार डिजिटल पत्रकारिता की दुनिया में बीते 10 सालों से सक्रिय हैं. इस वक्त नेटवर्क 18 समूह में हिंदी स्पोर्ट्स सेक्शन में चीफ सब एडिटर के पद पर कार्यरत हैं. क्रिकेट के साथ बॉक्सिंग, कबड्डी, बैडमिंटन, ह…और पढ़ें












