—Advertisement—

Tump To Deport Iranian Women : ईरानी महिलाओं के साथ ऐसा सुलूक करेंगे ट्रंप! सुनकर कांप जाएंगे सुप्रीम लीडर

Author Picture
Published On: June 27, 2026

—Advertisement—

होमदुनियाअमेरिका

ईरानी महिलाओं के साथ ऐसा सुलूक करेंगे ट्रंप! सुनकर कांप जाएंगे सुप्रीम लीडर

Last Updated:

ट्रंप ने तेहरान पर दबाव बनाने के लिए इमिग्रेशन को ही एक नया हथियार बना लिया है. फारस की खाड़ी में ईरानी ठिकानों को तबाह करने के साथ-साथ अब ट्रंप प्रशासन अमेरिका के भीतर रह रहे बेकसूर ईरानी शरणार्थियों को चुन-चुनकर निशाना बना रहा है, जिसके तहत बिना किसी आपराधिक रिकॉर्ड वाली दो ईरानी महिलाओं को जबरन ‘सेंट्रल अफ्रीकन रिपब्लिक’ जैसे बेहद अशांत और गृहयुद्ध से जूझ रहे देश में डिपोर्ट करने की सीक्रेट प्लानिंग की गई है.

Zoom

ईरानी महिलाओं को डिपोर्ट करेंगे ट्रंप

वॉशिंगटन: ईरान की खुन्नस अब ट्रंप बेकसूर नागरिकों से निकालेंगे. अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान को घुटनों पर लाने के लिए सिर्फ मिलिट्री का इस्तेमाल नहीं किया है, बल्कि उन्होंने इमिग्रेशन को भी एक घातक हथियार बना लिया है. ट्रंप ने प्रवासियों को अमेरिका से निकाल कर सीधे ‘सेंट्रल अफ्रीकन रिपब्लिक’ (CAR) जैसे अशांत देश में फेंकने की सीक्रेट प्लानिंग कर ली है. इस फैसले के तहत जिन दो बेगुनाह ईरानी महिलाओं को निशाना बनाया गया है, उन्हें देश से निकालने का कोई कानूनी कारण भी नहीं है, उन्हें सिर्फ ईरान पर प्रेशर बनाने के लिए इस्तेमाल किया जा रहा है.

ईरानी महिलाओं को कहां डिपोर्ट करेंगे ट्रंप

एक तरफ फारस की खाड़ी और ओमान तट के पास अमेरिकी नौसेना लगातार ईरानी जहाजों को निशाना बना रही है. दूसरी तरफ वॉशिंगटन के भीतर बैठे ईरानी शरणार्थियों को इसका हर्जाना भुगतना पड़ रहा है. वकीलों के मुताबिक, जिन दो ईरानी महिलाओं को गुरुवार को विशेष विमान से सेंट्रल अफ्रीकन रिपब्लिक डिपोर्ट किया जा रहा है, उनका कोई भी आपराधिक रिकॉर्ड नहीं है. युद्ध के इस दौर में ट्रंप प्रशासन ने इन्हें केवल इसलिए निशाना बनाया है ताकि तेहरान को ये कड़ा संदेश दिया जा सके कि जंग के दौरान किसी भी ईरानी नागरिक को अमेरिकी जमीन पर रहने का अधिकार नहीं मिलेगा.

ट्रंप की जिद: खामेनेई के समर्थकों को चुन-चुनकर निकालेंगे

ईरान के साथ चल रही इस आर-पार की लड़ाई के बीच ट्रंप प्रशासन ने अमेरिका में रह रहे उन ईरानी नागरिकों पर हंटर चलाना शुरू कर दिया है, जिन पर तेहरान सरकार के प्रति हमदर्दी रखने का जरा सा भी शक है.
प्रशासन ने हाल ही में हमीदेह सुलेमानी अफशर और उनकी बेटी सहित कई ईरानी नागरिकों के वीजा और ग्रीन कार्ड को तुरंत प्रभाव से रद्द कर दिया. ट्रंप का सीधा एजेंडा है कि जब अमेरिकी सेना बॉर्डर पर ईरान से लड़ रही है तो देश के भीतर किसी भी ऐसे तत्व को बर्दाश्त नहीं किया जाएगा जो सीधे या परोक्ष रूप से ईरान के सुप्रीम लीडर खामेनेई के शासन से जुड़ा हो.

महिलाओं को ईरान नहीं भेज सकते थे

इस मिशन को अंजाम देने के लिए ट्रंप ने अमेरिकी अदालतों के आदेशों को भी ताक पर रख दिया गया. इमिग्रेशन वकीलों ने दावा किया है कि कोर्ट ने इन महिलाओं को ‘विथहोल्डिंग ऑफ रिमूवल’ के तहत सुरक्षा दी थी, क्योंकि खुद अमेरिकी जज मानते थे कि अगर इन्हें ईरान भेजा गया तो खामेनेई की पुलिस इन्हें टॉर्चर करेगी या जान से मार देगी लेकिन ट्रंप सरकार ने इसका एक बेहद शातिर और तोड़ निकाला. उन्होंने इन महिलाओं को ईरान भेजने के बजाय अफ्रीका के एक ऐसे देश में भेजने का सौदा कर लिया, जहां गृहयुद्ध और भुखमरी का राज है.

अमेरिका ने किया मानवाधिकारों का कत्ल

जंग के इस माहौल में ट्रंप का ये कदम सीधे तौर पर मानवाधिकारों का कत्ल माना जा रहा है. खुद अमेरिकी सरकार जिस सेंट्रल अफ्रीकन रिपब्लिक को ‘नो-गो जोन’ मानती है और अपने नागरिकों को वहां न जाने की चेतावनी देती है, उसी खतरनाक इलाके में इन ईरानी महिलाओं को लावारिस छोड़ दिया जाएगा. वहां न तो उनका कोई परिवार है और न ही कोई सहारा. एक्सपर्ट्स का मानना है कि ट्रंप इस जंग में ईरान के खिलाफ इतनी नफरत से भर चुके हैं कि वे हर उस व्यक्ति का जीवन नर्क बना देना चाहते हैं जिसका ताल्लुक ईरान की सरजमीं से है.

About the Author

authorimg

Utkarsha Srivastava

If world leaders are arguing, borders are shifting, or a geopolitical storm is brewing somewhere on the planet, chances are Utkarsha Srivastava is already reading and writing about it.

A digital journalist w…और पढ़ें

Related News
Home
Facebook
Telegram
X