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सिनेमा के वो दिग्गज जिन्होंने कान्स में बढ़ाया देश का मान, राजेश खन्ना को था बनाया सुपरस्टार

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Published On: July 5, 2026

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Chetan Anand Death Anniversary: क्या आप जानते हैं कि कान्स फिल्म फेस्टिवल में देश का नाम रोशन करने वाले चेतन आनंद ने जब 1962 के युद्ध पर ‘हकीकत’ बनाई, तो सिनेमाघरों में सन्नाटा क्यों छा गया था? जानिए इस महान फिल्मकार की पुण्यतिथि पर उनके जीवन और उस अमर गाने ‘कर चले हम फिदा’ से जुड़ी बेहद इमोशनल कर देने वाली कहानी.

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नई दिल्ली: हिंदी सिनेमा में देश और सेना पर तो बहुत सी फिल्में बनी हैं, लेकिन कुछ फिल्में ऐसी होती हैं जो सीधे दिल को छू जाती हैं. ऐसी ही एक शानदार फिल्म है ‘हकीकत’, जो साल 1964 में आई थी. 1962 के भारत-चीन युद्ध पर बनी इस फिल्म ने फौजियों की बहादुरी और उनके बलिदान को इतने सच्चे ढंग से दिखाया कि आज भी जब यह टीवी पर आती है, तो लोग सब काम छोड़कर भावुक हो जाते हैं. फिल्म का गाना ‘कर चले हम फिदा जानों तन साथियों’ तो आज भी हर देशभक्ति के मौके पर हमारी रगों में जोश भर देता है.

इस कालजयी फिल्म को बनाने वाले महान फिल्मकार चेतन 6 जुलाई को दुनिया को अलविदा कह दिया था. उन्होंने अपने पूरे करियर में लीक से हटकर सिनेमा बनाया और जब भी देशप्रेम की बात आती है, उनका नाम सबसे पहले लिया जाता है. चलिए आज याद करते हैं उनकी शानदार सिनेमाई जर्नी को, जिसने भारतीय सिनेमा का चेहरा हमेशा के लिए बदल दिया.

‘हकीकत’ से बनी देशभक्ति की नई मिसाल

चेतन आनंद की फिल्म ‘हकीकत’ सिर्फ एक फिल्म नहीं, बल्कि देशभक्ति की सबसे सच्ची मिसाल है. मदन मोहन का कमाल का संगीत और कैफी आजमी के लिखे दिल को छू लेने वाले गीतों ने इस फिल्म को हमेशा-हमेशा के लिए अमर बना दिया. धर्मेंद्र, बलराज साहनी और प्रिया राजवंश जैसे बेहतरीन कलाकारों से सजी इस फिल्म ने चेतन आनंद को पूरे देश में एक अलग और बड़ी पहचान दिलाई थी. यह फिल्म आज भी युद्ध की विभीषिका और सैनिकों के बलिदान की सबसे प्रामाणिक कहानी मानी जाती है.

पहली फिल्म से ही अंतरराष्ट्रीय पहचान

चेतन आनंद की सिनेमाई जर्नी वाकई हैरान करने वाली है. उन्होंने अपने करियर में भले ही गिनी-चुनी फिल्में बनाईं, लेकिन उनका हर एक काम लाजवाब था. साल 1946 में आई उनकी पहली ही फिल्म ‘नीचा नगर’ ने इतिहास रच दिया था. यह प्रतिष्ठित कान्स फिल्म फेस्टिवल में ‘ग्रैंड प्रिक्स’ अवॉर्ड जीतने वाली पहली भारतीय फिल्म बनी थी. वहीं, साल 1966 में आई फिल्म ‘आखिरी खत’ के जरिए उन्होंने हिंदी सिनेमा को उसका पहला सुपरस्टार यानी राजेश खन्ना दिया था. चाहे धर्मेंद्र हों या राजकुमार, चेतन आनंद ने बॉलीवुड के हर बड़े सुपरस्टार के साथ बेहतरीन फिल्में दीं.

टीवी पर भी कायम रहा जादू

चेतन आनंद हमेशा कुछ नया और अनोखा करने के लिए जाने जाते थे. उन्होंने सुपरस्टार राजकुमार के साथ फिल्म ‘हीर रांझा’ बनाई, जिसके सारे डायलॉग्स कविता के रूप में थे, वहीं ‘हिंदुस्तान की कसम’ में एक बार फिर भारत-पाकिस्तान युद्ध की कहानी को पर्दे पर उतारा. बड़े पर्दे पर अपना जादू चलाने के बाद उन्होंने छोटे पर्दे का रुख किया. साल 1988 में वे दूरदर्शन पर ‘परम वीर चक्र’ सीरियल लेकर आए. इस शो के जरिए उन्होंने घर-घर में भारत के वीर जवानों की बहादुरी की वो सच्ची कहानियां पहुंचाईं, जिन्हें देखकर हर देशवासी का सीना गर्व से चौड़ा हो गया. आज भी उनकी बनाई विरासत नए निर्देशकों के लिए प्रेरणा का स्रोत बनी हुई है.

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गार्गी द्विवेदीSub Editor

मैं इस समय News18 App टीम का हिस्सा हूं. News18 App पर आप आसानी से अपनी मनपसंद खबरें पढ़ सकते हैं. मुझे खबरें लिखने का 3 साल से ज्यादा का अनुभव है और फिलहाल मैं सब एडिटर के पद पर हूं. इससे पहले मैंने, दैनिक जाग…और पढ़ें

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