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Superhit Song Of 90s On Infidelity: ‘तड़प-तड़प के इस दिल से’, ‘परदेसी-परदेसी जाना नहीं’, ‘अच्छा सिला दिया तूने मेरे प्यार का’, ‘वो किसी और किसी और से मिलके आ रहे हैं’, ‘दिल के अरमां आंसुओं में बह गए’… बेवफाई पर बने ऐसे न जाने कितने गाने हैं, जो टूटे दिल वालों की प्लेलिस्ट में आज भी सबसे ऊपर मिलते हैं. वक्त बदल गया, म्यूजिक का अंदाज बदल गया, लेकिन दर्द भरे गीतों की चमक कभी फीकी नहीं पड़ी. इन्हीं गानों की भीड़ में एक ऐसा गीत भी आया था, जो किसी फिल्म का हिस्सा नहीं था, जिसके पीछे कोई सुपरस्टार नहीं था फिर भी उसकी दीवानगी ऐसी थी कि गांव की चौपाल से लेकर शहरों की बसों, चाय की दुकानों और शादी-ब्याह के डीजे तक हर जगह वही बजता था. क्या आप अंदाजा लगा पाए कि हम किस गाने की बात कर रहे हैं.
नई दिल्ली. कहते हैं कि प्यार जितना खूबसूरत होता है. उसका टूटना उतना ही दर्दनाक होता है. जब दिल टूटता है तो इंसान अकेलेपन के अंधेरे में खो जाता है. ऐसे में शब्दों की कमी को सिर्फ संगीत ही पूरा कर सकता है. हिंदी सिनेमा ने हमें बेवफाई और जुदाई के कई ऐसे नगमे दिए हैं, जिन्हें सुनकर आज भी आंखें नम हो जाती हैं. फिर चाहे वह फिल्म ‘धड़कन’ का भावुक गाना ‘दिल ने ये कहा है दिल से’ हो, ‘हम दिल दे चुके सनम’ का तड़पा देने वाला ‘तड़प तड़प के इस दिल से आह निकलती रही’ या फिर हाल के दौर का ‘चन्ना मेरेया. इन सभी गानों के पीछे बड़े-बड़े फिल्म स्टार्स, करोड़ों का बजट और बड़ी फिल्मों का सहारा था. फोटो साभार- वीडियो ग्रैब

लेकिन क्या आपको सालों पुराना वो गाना याद है, जो आज भी बेवफाई में आशिकों का फेवरेट है. ये वो गाना है, जो 15 मिनट से ज्यादा लंबा है. गाने में कोई सुपरस्टार नहीं न ही ये गाना किसी फिल्म का हिस्सा है. लेकिन लेकिन जब वह रेडियो, टेप रिकॉर्डर और पान की दुकानों पर गूंजा तो उसने गांव की पगडंडियों से लेकर शहर के आलीशान मोहल्लों तक हर टूटे दिल के आशिक को रोने पर मजबूर कर दिया. बात कर रहे हैं साल 1997 में आए अल्ताफ राजा का सबसे सुपरहिट गाना ‘तुम तो ठहरे परदेसी, साथ क्या निभाओगे, सुबह पहली गाड़ी से घर को लौट जाओगे.’

इस गाने की सबसे बड़ी खासियत इसकी कहानी थी. यह सिर्फ एक गीत नहीं, बल्कि एक पूरी दास्तान थी. प्यार, बिछड़ना, इंतजार, शिकायत और दर्द… हर एहसास को इसमें इस तरह पिरोया गया कि सुनने वालों को अपनी ही कहानी नजर आने लगी. यही वजह थी कि 15 मिनट से ज्यादा लंबा होने के बावजूद लोग इसे बिना स्किप किए पूरा सुनते थे. फोटो साभार- वीडियो ग्रैब
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90 के दशक का वो आखिरी दौर था, जब भारतीय म्यूजिक इंडस्ट्री में ‘पॉप और इंडी-पॉप’ एल्बम्स का जादू सिर चढ़कर बोल रहा था. उसी दौर में ‘वीनस’ म्यूजिक कंपनी के बैनर तले एक सीधे-साधे, कव्वाली बैकग्राउंड से आने वाले सिंगर की एंट्री हुई. जिनका नाम है अल्ताफ राजा. उनकी आवाज में एक अजीब सा सूनापन और दर्द था, जो सीधे दिल के पार उतर जाता था. फोटो साभार- वीडियो ग्रैब

जब उनका गाना ‘तुम तो ठहरे परदेसी’ रिलीज हुआ, तो किसी ने नहीं सोचा था कि करीब 15.20 मिनट लंबा यह कव्वाली-नुमा गाना इतिहास रच देगा. उस दौर में जहां 4 से 5 मिनट के गानों का चलन था, वहां 15 मिनट से ज्यादा लंबे गाने को सुनना और उसे पसंद करना अपने आप में एक चमत्कार था. लेकिन, इस गाने के शेरों-शायरी और बीच-बीच में आने वाले डायलॉग्स ने लोगों को ऐसा बांधा कि कोई भी इसे बीच में बंद नहीं कर पाता था. फोटो साभार- वीडियो ग्रैब

इस गाने की सबसे बड़ी खासियत थी इसके बोल. गाने के बीच में अल्ताफ राजा ने साल के सभी 12 महीनों का जिक्र करते हुए बेवफाई और इंतजार की जो दास्तान बयां की, उसने लोगों को अपना दीवाना बना दिया. गाने के बोल कुछ ऐसे हैं- ‘आया है साल का पहला महीना, जनवरी में तो मुश्किल है जीना, फरवरी में भी आहें भरी हैं, मार्च में भी ये आंखें रोई हैं…’ जैसे-जैसे गाना दिसंबर तक पहुंचता है, सुनने वाले का दिल पूरी तरह बैठ जाता है. गांव से लेकर शहरों तक, यह गाना हर उस इंसान की दास्तान बन गया, जिसने कभी न कभी मोहब्बत में धोखा खाया था या जिसका महबूब उससे दूर किसी परदेस में बैठा था. फोटो साभार- वीडियो ग्रैब

समय बदला, कैसेट का दौर खत्म हुआ और सीडी से होते हुए हम आज यूट्यूब और रील्स के डिजिटल जमाने में आ गए हैं. लेकिन ‘तुम तो ठहरे परदेसी’ का जादू आज भी कम नहीं हुआ है. करीब तीन दशक बाद भी ‘तुम तो ठहरे परदेसी’ सिर्फ एक गाना नहीं, बल्कि भारतीय पॉप म्यूजिक के इतिहास का ऐसा अध्याय है, जिसने यह साबित किया कि दर्द की कोई एक्सपायरी डेट नहीं होती. जब भी बेवफाई के सबसे यादगार गीतों की बात होगी, यह 15 मिनट 20 सेकंड लंबा गीत हमेशा सबसे खास नामों में गिना जाएगा. फोटो साभार- वीडियो ग्रैब

अल्ताफ राजा का यह गाना इस बात का सबसे बड़ा सबूत है कि सच्ची कला और दिल से निकले हुए दर्द को किसी बड़े स्टार या महंगे प्रमोशन की जरूरत नहीं होती. अगर आवाज में सच्चा दर्द हो तो वह 15 मिनट का गाना भी सदियों के लिए अमर हो जाता है. यह गाना सिर्फ एक गीत नहीं, बल्कि 90 के दशक के हर उस आशिक की धड़कन है, जिसने कभी न कभी किसी ‘परदेसी’ से दिल लगाया था. फोटो साभार- वीडियो ग्रैब












