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अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने कहा है कि ईरान की फ्रीज संपत्तियों के एक हिस्से का इस्तेमाल अमेरिकी किसानों से गेहूं, मक्का और सोयाबीन खरीदने में किया जाएगा. ट्रंप ने इसे अमेरिकी किसानों के लिए नया बाजार बताया है. हालांकि ईरान ने साफ किया है कि उसकी संपत्तियों का इस्तेमाल कैसे होगा, इसका फैसला सिर्फ तेहरान करेगा.
ट्रंप ने कहा कि अमेरिका ईरान के लिए गेहूं और सोयाबन खरीदेगा.
वॉशिंगटन: अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान के साथ चल रही बातचीत के बीच बड़ा ऐलान किया है. ट्रंप ने सीधे तौर पर कहा है कि अमेरिका और ईरान अब व्यापार करने वाले हैं. उन्होंने कहा कि अमेरिका, ईरान की फ्रीज किए गए पैसों के एक हिस्से का इस्तेमाल अमेरिकी किसानों से गेहूं, मक्का और सोयाबीन खरीदने के लिए करेगा. ट्रंप ने इसे अमेरिकी किसानों के लिए ‘नया बाजार’ बताया और कहा कि यह प्रक्रिया जल्द शुरू होगी. यानी जो पैसा अमेरिका ने फ्रीज कर रखा है, उसी से वह अपने किसानों की फसल खरीदेगा औप फिर उसे ईरान को दे देगा. ट्रंप का यह बयान दिखाता है कि वह ईरान को किसी दूसरे देश से सामान खरीदने का विकल्प नहीं दे रहे हैं.
व्हाइट हाउस में पत्रकारों से बातचीत के दौरान ट्रंप ने कहा, ‘हमारे सामने एक नया बाजार खुलने जा रहा है और उसका नाम है ईरान. वहां खाने-पीने के सामान की कमी है. हम ईरान के कुछ पैसे का इस्तेमाल करेंगे और उससे अमेरिकी किसानों से गेहूं, सोयाबीन और मक्का खरीदेंगे. यह काफी बड़ा कार्यक्रम होगा.’ यह बयान ऐसे समय आया है जब अमेरिका और ईरान के बीच युद्ध खत्म करने के लिए अंतिम समझौते पर बातचीत जारी है. इससे पहले दोनों देशों के बीच हुए अंतरिम समझौते के तहत ईरान की करीब 12 अरब डॉलर की फ्रीज संपत्तियां जारी करने पर सहमति बनने की खबर सामने आई थी.
पैसा देने में भी शर्तें थोप रहा अमेरिका
अमेरिका का कहना है कि यह पैसा सीधे ईरान को नहीं दिया जाएगा. इसे अमेरिकी निगरानी वाले एस्क्रो अकाउंट में रखा जाएगा और इसका इस्तेमाल सिर्फ मानवीय जरूरतों के लिए होगा. इनमें खाद्यान्न, दवाइयां और मेडिकल सामान शामिल हैं. ट्रंप प्रशासन चाहता है कि ईरान इन्हीं पैसों से अमेरिकी किसानों से सामान खरीदे. अमेरिकी उपराष्ट्रपति जेडी वेंस भी पहले कह चुके हैं कि ईरान की फ्रीज संपत्तियां अमेरिकी किसानों को फायदा पहुंचाएंगी और इससे ईरान के लोगों तक जरूरी खाद्यान्न पहुंचेगा. ट्रंप ने भी ट्रुथ सोशल पर लिखा था कि यह पैसा केवल अमेरिका से खरीदे गए गेहूं, मक्का, सोयाबीन और मेडिकल सप्लाई पर ही खर्च होगा.
ईरान ने क्या कहा?
अल जजीरा की रिपोर्ट के मुताबिक ईरान ने अमेरिकी दावे से साफ तौर पर असहमति जताई है. ईरानी विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता इस्माइल बाघेई ने कहा कि फ्रीज संपत्तियों पर फैसला लेने का अधिकार सिर्फ ईरान का होगा. उन्होंने कहा कि ईरान अपनी जरूरत और कीमत-गुणवत्ता के आधार पर तय करेगा कि कौन-सा सामान किस देश से खरीदा जाएगा. अमेरिका शर्तें नहीं थोप सकता. एक्सपर्ट्स का मानना है कि ट्रंप प्रशासन इस योजना के जरिए एक साथ दो लक्ष्य हासिल करना चाहता है. पहला, ईरान को सीधे नकद राशि दिए बिना मानवीय सहायता उपलब्ध कराना और दूसरा, चीन के साथ व्यापारिक तनाव से प्रभावित अमेरिकी किसानों के लिए नया निर्यात बाजार तैयार करना.
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Yogendra Mishra holds a degree in Journalism from the University of Allahabad. He has been actively associated with the media industry since 2017 and brings extensive experience across various domains of journa…और पढ़ें












