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US Judge revert Trump Administration Decision : अमेरिका में एक बार फिर से अदालत ने डोनाल्ड ट्रंप प्रशासन को झटका देते हुए सरकारी डेटाबेस के इस्तेमाल पर रोक लगा दी. मार्च, 2025 में राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने एक कार्यकारी आदेश पर दस्तखत किए थे. इसके तहत संघीय चुनावों में मतदाता पंजीकरण के लिए नागरिकता का दस्तावेजी प्रमाण देना अनिवार्य बनाने की योजना थी. इस पर रोक लगा दी गई है.
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप.
US Judge Trump Decision : अमेरिका में एक संघीय अदालत ने ट्रंप प्रशासन को बड़ा झटका देते हुए उस सरकारी डेटाबेस के इस्तेमाल पर रोक लगा दी है, जिसमें लाखों अमेरिकी नागरिकों की निजी और संवेदनशील जानकारी जमा की गई थी. अदालत ने माना कि इस व्यवस्था से नागरिकों की गोपनीयता और मतदान के अधिकार को नुकसान पहुंच सकता है. जज स्पार्कल सूकानन ने अपने फैसले में कहा कि सरकार ने अमेरिकी नागरिकों की निजी जानकारी का उपयोग ऐसे तरीके से किया, जिससे उनके संवैधानिक अधिकारों पर खतरा पैदा हो गया. उन्होंने कहा कि जब गोपनीयता और मतदान जैसे बुनियादी अधिकार प्रभावित हो रहे हों, तब अदालत मूकदर्शक नहीं बन सकती.
जज के मुताबिक संघीय एजेंसियों ने चुनाव व्यवस्था में बदलाव से जुड़े एक कार्यकारी आदेश को लागू करने की जल्दबाजी में लाखों लोगों की व्यक्तिगत जानकारी इकट्ठा की और उसका दोबारा इस्तेमाल किया. इसमें नागरिकता से संबंधित ऐसा डेटा भी शामिल था, जिसकी सटीकता को लेकर पहले से सवाल मौजूद थे.अदालत ने यह भी कहा कि कई राज्यों ने संघीय सरकार के साथ मिलकर इस डेटाबेस का उपयोग किया और गलत या अधूरी जानकारी के आधार पर कुछ अमेरिकी नागरिकों को मतदाता सूची से हटाने की कार्रवाई की. इससे योग्य मतदाताओं के मतदान अधिकार प्रभावित होने की आशंका पैदा हुई.
ट्रंप के आदेश को अदालत ने पलटा
यह मामला सितंबर 2025 में दायर एक मुकदमे से जुड़ा है, जिसे मतदान अधिकार और गोपनीयता की रक्षा करने वाले कई संगठनों ने मिलकर दाखिल किया था. इस अभियान का नेतृत्व लीग ऑफ वीमेन वोटर्स ने किया था. याचिका में अमेरिकी गृह सुरक्षा विभाग द्वारा संचालित (SAVE)सिस्टेमैटिक एलियन वेरिफिकेशन फॉर एंटाइटलमेंट्स प्रणाली में किए गए बदलावों को चुनौती दी गई थी. मार्च, 2025 में राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने एक कार्यकारी आदेश पर दस्तखत किए थे. इसके तहत संघीय चुनावों में मतदाता पंजीकरण के लिए नागरिकता का दस्तावेजी प्रमाण देना अनिवार्य बनाने की योजना थी. प्रशासन का तर्क था कि इससे चुनावी प्रक्रिया अधिक सुरक्षित और पारदर्शी बनेगी.
क्यों अदालत ने लिया फैसला?
हालांकि अदालत ने माना कि इस आदेश को लागू करने के दौरान नागरिकों की निजी जानकारी का व्यापक स्तर पर संग्रह और साझा किया गया, जिससे संवैधानिक अधिकारों पर असर पड़ सकता है. फैसले के बाद लीग ऑफ वूमेन वोटर्स ने स्वागत करते हुए कहा कि अदालत ने सरकार की उस कोशिश को रोक दिया है, जिसके तहत लाखों लोगों की संवेदनशील जानकारी को एक बड़े डेटाबेस में इकट्ठा किया गया था. संगठन का कहना है कि इस तरह की व्यवस्था लोगों को अनावश्यक जांच और मतदाता सूची से गलत तरीके से हटाए जाने के जोखिम में डाल सकती है.
इस फैसले को अमेरिका में गोपनीयता के अधिकार और मतदान अधिकारों की सुरक्षा के लिए एक महत्वपूर्ण कानूनी जीत माना जा रहा है.
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News18 में इंटरनेशनल डेस्क पर कार्यरत हैं. टीवी पत्रकारिता का भी अनुभव है और इससे पहले Zee Media Ltd. में कार्य किया. डिजिटल वीडियो प्रोडक्शन की जानकारी है. टीवी पत्रकारिता के दौरान कला-साहित्य के साथ-साथ अंतरर…और पढ़ें













