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1980 की वो फिल्म, जब रोमांस छोड़ साइको किलर बने थे राजेश खन्ना, थिएटर में काका का रोल देख घबरा गए थी ऑडियंस

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Published On: June 26, 2026

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राजेश खन्ना ने अपने करियर में कई हिट और सुपरहिट फिल्मों में काम किया है. उनके रोमांस करने का अपना अलग ही अंदाज था. लेकिन क्या आप जानते हैं कि साल 1980 में आई एक फिल्म में उन्होंने साइको किलर का रोल निभाया था. साइको के रोल में उनकी एक्टिंग देख पूनम ढिल्लों भी उनकी मुरीद हो गई थीं.

नई दिल्ली. बॉलीवुड के पहले सुपरस्टार राजेश खन्ना का एक्टिंग में कोई सानी नहीं रहा. अपने रोल से वह लोगों के रोंगटे खड़े कर देते थे. उनके कई रोल तो लोगों के जहन में बस जाते थे.लेकिन इससे परे साल 1980 में उन्होंने रोमांस छोड़कर साइको किलर का रोल निभाकर इतिहास रच दिया था.

हम बात कर रहे हैं, राजेश खन्ना और पूनम ढिल्लो की साल 1980 में आई फिल्म ‘रेड रोज’की. इस फिल्म में राजेश खन्ना के साथ पूनम ढिल्लों लीड रोल में नजर आई थी. फिल्म की कहानी भी काफी अलग तरह की थी, लेकिन फिल्म उस समय कुछ खास कमाल नहीं दिखा पाई थी.

यूं तो राजेश खन्ना अपनी फिल्मों में रोमांस का तरीका ही बदल देते थे. लेकिन रोमांस के बादशाह कहलाने वाले राजेश खन्ना इस फिल्म में साइको किलर के रोल में नजर आए थे.ये उनकी यादगार साइकोलॉजिकल थ्रिलर फिल्मों में गिनी जाती है.

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मशहूर फिल्ममेकर भारतीराजा ने इस फिल्म को डायरेक्ट किया था.उनकी फिल्म रेड रोज तमिल सुपरहिट फिल्म Sigappu Rojakkal का हिंदी रीमेक थी. लेकिन फिल्म उम्मीद के मुताबिक प्रदर्शन नहीं कर पाई थी. लोग तो रोमांस के बादशाह का ये रोल देख थिएटर में घबरा गए थे.

बात अगर फिल्म की कहानी की करें तो वह आनंद (राजेश खन्ना) पर आधारित है. आनंद एक अमीर,सक्सेस और बेहद हैंडसम बिजनेसमैन है. बहुत ही सभ्य और शालीन किस्म के इंसान. लेकिन असल जिंदगी वह कुछ और ही होते हैं. फिल्म में राजेश के रोल को देखकर सेंसर बोर्ड ने भी आपत्ति की थी.

राजेश खन्ना फिल्म में महिलाओं को अपने प्यार के जाल में फंसाकर, उन्हें मौत के घाट उतार देते हैं और फिर उनकी बॉडी के पास एक लाल गुलाब छोड़ जाता है. फिल्म में वह महिलाओं से नफरते करते हैं और बचपन में हुए एक हादसे की वजह से खतरनाक सीरियल किलर बन जाते हैं.

इस कहानी का पर्दाफाश उस वक्त होता है, जब उनकी शादी शारदा नाम की लड़की (पूनम ढिल्लो) से हो जाती है. उसकी सादगी और मासूमियत से आनंद को प्यार हो जाता है. दोनों शादी कर लेते हैं. लेकिन शादी के बाद वह कुछ महसूस करने लगती है.

लेकिन सच तब सामने आता है, जब शारदा को घर के तहखाने में अजीब-अजीब चीजें मिलने लगती हैं. वहां उन्हें लड़कियों की लाशें और आनंद की डायरी हाथ लग जाती है और उसे पता चलता है कि उसका पति एक सीरियल किलर है. इसके बाद खुद को बचाने के लिए वह शारदा पर भी हमला करता है, ताकि उसका राज न खुल जाए. लेकिन वक्त रहते पुलिस वहां आ जाती है और शारदा को बचा लेती है. इसके बाद आनंद को जेल भेजने के बजाय मेंटल हॉस्पिटल भेज दिया जाता है.

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