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अमेरिकी उपराष्ट्रपति जेडी वेंस ने पाकिस्तान ने प्रेस की आजादी का मजाक उड़ाया है. अमेरिका ने लगातार ईरान शांति समझौते की शर्तों को जारी करने में देरी क्यों की इसे लेकर सवाल उठ रहे हैं. इस पर जेडी वेंस जवाब दिया की पाकिस्तान में अमेरिका जैसी प्रेस की आजादी नहीं है.
अमेरिकी उपराष्ट्रपति JD वेंस से ईरान-अमेरिका डील की शर्तें सार्वजनिक करने पर सवाल किया गया. उनसे पूछा गया कि ईरान के साथ हुए समझौते की शर्तें सार्वजनिक करने में इतनी देर क्यों की. इसका जवाब देते हुए उन्होंने पाकिस्तान पर तंज कस दिया. उन्होंने कहा कि पाकिस्तान और कतर में अमेरिका जैसी प्रेस की आजादी नहीं है, इसलिए वहां चीजें अलग तरह से होती हैं. यहां जेडी वेंस के कहना का मतलब है कि पाकिस्तान और कतर में मीडिया उतनी आजाद नहीं है, जितनी अमेरिका में. इसलिए वहां बातचीत को सीक्रेट रखना आसान होता है.
क्या है पूरा मामला?
ये बात क्यों कही गई इसे समझते हैं. डेमोक्रेट्स और ट्रांसपेरेंसी के सपोर्टर्स ट्रंप प्रशासन की आलोचना कर थे. उन्होंने कहा गया कि प्रेसिडेंट डोनाल्ड ट्रंप ने 15 जून को अंतरिम एग्रीमेंट की घोषणा की, लेकिन एमओयू की शर्तें रोके रखीं. लगातार सवाल उठाए गए कि अमेरिका ने इन शर्तों को रोककर क्यों रखा.
वेंस ने आगे कहा, ‘पाकिस्तान में यह उम्मीद नहीं है कि टेक्स्ट अमेरिकी लोगों के लिए बाहर आएगा ताकि वे असल में पूछताछ कर सकें. देख सकें, एनालाइज कर सकें और खुद समझ सकें.’ असल में पाकिस्तान अमेरिका और ईरान के बीच मध्यस्थ था. लेकिन उनकी प्रेस की तरफ से कभी भी डील की बातें बाहर नहीं आई थीं. इसी पर वह तंज कर रहे हैं.
लेबनान में शांति बहाल होने के बाद अब डोनाल्ड ट्रंप के विशेष दूत स्टीव विटकॉफ न्यूक्लियर डील के पहले दौर की बातचीत के लिए स्विट्जरलैंड रवाना हो रहे हैं. इस बीच, अमेरिका में इस डील की शर्तों को सबको सामने लाने में देरी पर सवाल उठाए गए हैं. इसी में से एक सवाल पर जवाब देते हुए उपराष्ट्रपति जेडी वेंस ने मजाकिया लहजे में पाकिस्तान और कतर की प्रेस स्वतंत्रता पर तंज कसा दिया.
इजरायल-हिजबुल्लाह सीजफायर के लिए राजी
फ्रांस में हुए समझौते के बाद भी लेबनान में अचानक भड़की लड़ाई ने इस शांति प्रक्रिया को खतरे में डाल दिया था. इस तनाव के कारण अमेरिकी उपराष्ट्रपति जेडी वेंस ने स्विट्जरलैंड में होने वाली न्यूक्लियर डील में जाने का अपना कार्यक्रम रद्द कर दिया था. हालांकि, स्थिति को संभालते हुए इजरायल और हिजबुल्लाह शुक्रवार को लेबनान में एक नए युद्धविराम समझौते पर सहमत हो गए हैं. इससे शांति की उम्मीदें फिर जिंदा हो गई हैं.
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