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नगर पंचायत ओबरा प्रकरण में जांच रिपोर्ट दबाने का आरोप

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Published On: July 3, 2026

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  • मुख्यमंत्री से तत्काल हस्तक्षेप की मांग

ओबरा/सोनभद्र। नगर पंचायत ओबरा में कथित वित्तीय अनियमितताओं शासन के आदेशों की अवहेलना तथा माननीय उच्च न्यायालय के निर्देशों के अनुपालन से जुड़े मामले में शिकायतकर्ता ने उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री को विस्तृत अनुस्मारक भेजकर तत्काल हस्तक्षेप की मांग की है।अनुस्मारक में कहा गया है कि उत्तर प्रदेश शासन के नगर विकास अनुभाग-1 द्वारा 15 मई 2026 को जिलाधिकारी, सोनभद्र को शिकायत की सक्षम स्तर से जांच कराकर स्पष्ट संस्तुति सहित तथ्यात्मक आख्या तत्काल शासन को उपलब्ध कराने के निर्देश दिए गए थे। इसके बावजूद आज तक जांच रिपोर्ट शासन को नहीं भेजी गई, जिससे पूरे प्रकरण पर गंभीर प्रश्न खड़े हो रहे हैं।शिकायतकर्ता राकेश केशरी ने आरोप लगाया है कि जांच रिपोर्ट में हो रहा असामान्य विलंब शासन की मंशा के विपरीत है और इससे निष्पक्ष जांच प्रभावित होने की आशंका बढ़ रही है। उनका कहना है कि यदि समयबद्ध कार्रवाई नहीं हुई तो दोषी अधिकारियों को बचाने अथवा मामले में लीपापोती की आशंका से इनकार नहीं किया जा सकता।मुख्यमंत्री को भेजे गए अनुस्मारक में कहा गया है कि प्रदेश सरकार भ्रष्टाचार और अनियमितताओं के विरुद्ध जीरो टॉलरेंस की नीति पर कार्य कर रही है। ऐसे में शासन के स्पष्ट निर्देशों के बावजूद जांच रिपोर्ट का लंबित रहना इस नीति की भावना के विपरीत है और इससे आमजन का विश्वास भी प्रभावित हो सकता है।मुख्यमंत्री से आग्रह किया गया है कि इस प्रकरण में तत्काल हस्तक्षेप करते हुए शासन के आदेशों का अनुपालन सुनिश्चित कराया जाए, जिलाधिकारी से विलंब का स्पष्टीकरण प्राप्त किया जाए, उच्चस्तरीय एवं निष्पक्ष निगरानी में जांच पूरी कराकर रिपोर्ट तत्काल शासन को उपलब्ध कराई जाए तथा दोषी पाए जाने वाले अधिकारियों एवं संबंधित व्यक्तियों के विरुद्ध कठोर वैधानिक कार्रवाई सुनिश्चित की जाए।शिकायतकर्ता ने उम्मीद जताई है कि मुख्यमंत्री के नेतृत्व में सुशासन, पारदर्शिता और भ्रष्टाचार के विरुद्ध अपनाई गई जीरो टॉलरेंस नीति के अनुरूप इस प्रकरण में शीघ्र, निष्पक्ष एवं प्रभावी कार्रवाई होगी, जिससे जनता का शासन पर विश्वास और अधिक मजबूत होगा।

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