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कोई धुन इतनी सुरीली हो कि चार-चार फिल्मों में सुनाई दे और हर गाना दिल में उतर जाए तो मन में ऐसी ट्यून को जानने की बेताबी बढ़ जाती है. मन में यह सवाल भी आता है कि वो सुरीली ट्यून कौन सी फिल्म में पहली बार आई थी. इस पर बने गाने कौन-कौन से थे. वो फिल्में कौन सी थीं. उस संगीतकार का नाम क्या है, जिसने इसे कंपोज किया. 60 के दशक की फिल्म में यह ट्यून पहली बार सुनने को मिली थी. बॉलीवुड में 3 फिल्मों में इसी ट्यून से इंस्पायर्ड गाने सुनाई दिए. वो फिल्म कौन सी थी, आइये जानते हैं विस्तार से….
60 के दशक में शम्मी कपूर -कल्पना मोहन की एक ऐसी म्यूजिकल कॉमेडी फिल्म आई थी जिसका निर्देशन लेख टंडन ने किया था. प्रोड्यूसर एफसी मेहरा थे. फिल्म में ललिता पवार, टुन टुन, इफ्तिखार और सलीम खान भी अहम भूमिकाओं में थे. इस फिल्म का एक गाने की ट्यून आगे चलकर तीन और फिल्मों में सुनाई दी. इस फिल्म का रीमेक भी बनाया गया. फिल्म का म्यूजिक शंकर-जयकिशन ने कंपोज किया था और बेस्ट म्यूजिक डायरेक्टर का फिल्मफेयर अवॉर्ड भी जीता था. फिल्म का नाम ‘प्रोफेसर’ था.

‘प्रोफेसर’ फिल्म की कहानी शशि भूषण ने लिखी थी. स्क्रीनप्ले-डायलॉग अबरार अल्वी ने लिखे थे. गीतकार हसरत जयपुरी-शैलेंद्र थे. डायरेक्टर लेख टंडन की यह पहली फिल्म थी. वैसे गुरु दत्त इस फिल्म को किशोर कुमार-वहीदा रहमान के साथ बनाना चाहते थे. उन दिनों 3 रील तक फिल्म बनाकर सेंसर बोर्ड को दिखानी होती थी. सेंसर बोर्ड की आपत्ति के बाद गुरु दत्त ने फिल्म बंद कर दी. देवानंद और राज कपूर ने भी इस फिल्म को रिजेक्ट कर दिया.

अंत में शम्मी कपूर को इस फिल्म के लिए फाइनल किया गया लेकिन वो चाहते थे कि शक्ति सामंत या नासिर हुसैन फिल्म को डायरेक्ट करें. लेख टंडन ने स्क्रिप्ट देने से इनकार कर दिया. जो फिल्म बनकर तैयार हुई, उसने सबका दिल जीत लिया. शम्मी कपूर पूरी फिल्म में छाए रहे. फिल्म के विजुअल्स आकर्षक थे. संगीतकार शंकर-जयकिशन के बनाए गाने सुपरहिट रहे. फिल्म के पॉप्युलर गाने थे: हमारे गांव कोई आएगा (आशा-लता), आवाज देकर हमें तुम बुलाओ (मोहम्मद रफी-लता मंगेशकर), खुली पलक में झूठा गुस्सा (मोहम्मद रफी), ए गुलबदन (मोहम्मद रफी) और मैं चली मैं चली, पीछे पीछे जहां (लता मंगेशकर-मोहम्मद रफी).
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फिल्म का बजट 50 लाख के करीब था. मूवी ने 1 करोड़ की कमाई की थी. यह एक हिट फिल्म साबित हुई थी. यह 1962 की तीसरी सबसे ज्यादा कमाई करने वाली फिल्म थी. फिल्म के एक गाने ‘मैं चली मैं चली, पीछे पीछे जहां’ गाने की धुन पर आगे चलकर तीन गाने बने. एक गाना तो 1984 में रिलीज हुई एक पाकिस्तानी मूवी ‘दूरियां’ में भी सुनाई दिया. गाने के बोल थे : बस एक तेरे सिवा, कोई नहीं है मेरा.

सबसे दिलचस्प बात यह है कि पाकिस्तानी सॉन्ग ‘बस एक तेरे सिवा, कोई नहीं है मेरा’ की ट्यून को आगे चलकर 1990 में दो अलग-अलग गानों में कॉपी किया गया. ये फिल्में थीं : आशिकी और आंधियां. आशिकी जहां सुपरहिट रही, वहीं ‘आंधियां’ फ्लॉप हो गई थी.

‘आंधियां’ फिल्म 8 जून 1990 को रिलीज हुई थी जिसमें शत्रुघ्न सिन्हा, मुमताज, प्रसन्नजीत चटर्जी और मधु श्री नजर आई थीं. फिल्म का डायरेक्शन डेविड धवन ने किया था. डायलॉग अनीस बज्मी ने लिखे थे. स्क्रीनप्ले राम केलकर ने लिखा था. प्रोड्यूसर पहलाज निहलानी थे. म्यूजिक बप्पी लाहिरी का था. फिल्म का एक गाना ‘दुनिया में तेरे सिवा, कोई नहीं है मेरा’ को अनुराधा पौडवाल और उदित नारायण ने गाया था. इस गाने की बेसिक ट्यून ‘प्रोफेसर’ फिल्म के गाने ‘मैं चली मैं चली पीछे-पीछे जहां’ से इंस्पायर्ड थी.

1990 में ही एक और म्यूजिकल रोमांटिक फिल्म ‘आशिकी’ रिलीज हुई जिसने हिंदी सिनेमा को हमेशा के लिए बदलकर रख दिया. फिल्म को महेश भट्ट ने डायरेक्ट किया था. राहुल रॉय, अनु अग्रवाल लीड रोल में थे. फिल्म में नदीम-श्रवण का ब्लॉकबस्टर म्यूजिक था. गीतकार समीर थे. कुमार सानू-अनुराधा पौडवाल के गानों की धूम पूरे देश में सुनाई दी थी. हर गली-मोहल्लों, बस-ऑटो, पान की दुकानों पर ये गाने सुनाई देते थे. इसी फिल्म का एक गाना ‘जाने जिगर जाने मन, तुझको है तेरी कसम’ 1962 की प्रोफेसर फिल्म के सॉन्ग ‘मैं चली मैं चली पीछे पीछे जहां’ से इंस्पायर्ड था. वैसे यह गाना पाकिस्तानी मूवी दूरियां के सॉन्ग ‘बस एक तेरे सिवा, कोई नहीं है मेरा’ से कॉपी था.

‘आशिकी’ ने बॉलीवुड में एक्शन फिल्मों का दौर लगभग खत्म कर दिया. आशिकी फिल्म का डायरेक्शन महेश भट्ट ने किया था. उन्होंने यह फिल्म टी-सीरीज के मालिक गुलशन कुमार के साथ मिलकर प्रोड्यूस की थी. राहुल रॉय-अनु अग्रवाल की यह डेब्यू फिल्म थी. इस फिल्म ने राहुल रॉय-अनु अग्रवाल, संगीतकार नदीम-श्रवण, सिंगर कुमार सानू, गीतकार समीर अनजान को रातोंरात स्टार बनाया. ‘आशिकी’ फिल्म का काफी हिस्सा उनकी लव लाइफ से प्रेरित था. 90 लाख के बजट में बनी इस फिल्म ने 5 करोड़ से ज्यादा की कमाई की थी. यह फिल्म एक ब्लॉकबस्टर फिल्म साबित हुई थी.











