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बॉलीवुड में कई बार डायरेक्टर्स ने क्लासिक फिल्मों को रीमेक करने का बड़ा रिस्क लिया है. लेकिन, एक ही सुपरस्टार का एक ही कहानी पर बनी दो अलग-अलग फिल्मों में काम करना और उनकी बॉक्स ऑफिस सक्सेस सीधे आसमान से जमीन पर गिरना… यह अनोखा और दमदार रिकॉर्ड मेगास्टार अमिताभ बच्चन के नाम दर्ज है. हम बात कर रहे हैं बॉलीवुड की सबसे बड़ी कल्ट क्लासिक फिल्म ‘शोले’ की कहानी पर बनी दो फिल्मों की, जिनमें अमिताभ बच्चन लीड रोल में थे. पहली फिल्म जहां ‘ऑल-टाइम ब्लॉकबस्टर’ बनी, वहीं ठीक 32 साल बाद रिलीज हुई दूसरी फिल्म ‘डिजास्टर’ साबित हुई.
नई दिल्ली. फिल्म निर्देशक रमेश सिप्पी ने साल 1975 में जब ‘शोले’ बनाई, तो उसने बॉक्स ऑफिस पर कई पुराने रिकॉर्ड तोड़े. इसके 32 साल बाद, साल 2007 में दिग्गज निर्देशक रामगोपाल वर्मा ने इसी कहानी को नए जमाने के कड़क अंदाज में पेश करने का बीड़ा उठाया. दिलचस्प बात यह थी कि दोनों ही फिल्मों में लीड एक्टर के तौर पर अमिताभ बच्चन मौजूद थे. लेकिन जहां पहली फिल्म ने थिएटर्स को नोट छापने की मशीन बना दिया, वहीं दूसरी फिल्म ने दर्शकों को थिएटर्स से भागने पर मजबूर कर दिया.

शोले (1975- ऑल-टाइम ब्लॉकबस्टर): 15 अगस्त 1975 को रिलीज हुई ‘शोले’ बॉलीवुड के इतिहास का सबसे बड़ा कड़क मील का पत्थर है. फिल्म दो जय और वीरू नाम के चोरों, एक रिटायर्ड ठाकुर और खूंखार डाकू गब्बर सिंह की कहानी पर आधारित थी. फिल्म में अमिताभ बच्चन ने ‘जय’ का कल्ट शांत और संजीदा किरदार निभाया था. माउथ-ऑर्गन बजाने वाले और अपनी जान देकर दोस्ती निभाने वाले जय के रोल ने अमिताभ बच्चन को एंग्री यंग मैन के सिंहासन पर कड़क तरीके से स्थापित कर दिया था.

करीब 3 करोड़ के भारी बजट में बनी इस फिल्म ने अपने दौर में इंडियन बॉक्स ऑफिस पर लगभग 15 करोड़ की कमाई की थी, जबकि इसका कुल ग्रॉस कलेक्शन 35 करोड़ के पार चला गया था. कई थिएटर्स में यह फिल्म लगातार 5 सालों तक चलती रही और बॉक्स ऑफिस पर यह ऑल टाइम ब्लॉकबस्टर साबित हुई.
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रामगोपाल वर्मा की आग (2007— डिजास्टर): ठीक 32 साल बाद, साल 2007 में रामगोपाल वर्मा ने ‘शोले’ की मूल कहानी को पूरी तरह कॉपी करके ‘रामगोपाल वर्मा की आग’ बनाई. रामू ने रामगढ़ के गांव को मुंबई के अंडरवर्ल्ड और घने जंगलों के कड़क बैकग्राउंड से बदल दिया था. कहानी वही थी- दो शातिर चोर (अजय देवगन और प्रशांत राज) एक हाथ कटे पुलिस अफसर (मोहनलाल) के लिए एक सनकी गैंगस्टर को पकड़ने का कड़ा सौदा करते हैं.

इस फिल्म का सबसे बड़ा और कड़ा आकर्षण यह था कि जो अमिताभ कभी ‘जय’ बने थे, वे इस रीमेक में ‘बब्बन सिंह’ (यानी गब्बर सिंह का नया रूप) का खूंखार और साइको विलेन का रोल प्ले कर रहे थे.

अमिताभ बच्चन का अजीब तरह से आंखें मटकाना, बार-बार जीभ निकालना और लाउड एक्टिंग दर्शकों के गले नहीं उतरी. लोग पर्दे पर ‘जय’ को ‘गब्बर’ के रूप में पचा ही नहीं पाए. फिल्म का डायरेक्शन और स्क्रीनप्ले इतना खराब था कि क्रिटिक्स ने इसे बॉलीवुड इतिहास की सबसे घटिया रीमेक करार दिया.

भारी-भरकम बजट और कड़क स्टारकास्ट होने के बावजूद फिल्म पहले ही दिन बॉक्स ऑफिस पर औंधे मुंह गिर गई. थिएटर्स में ऐसा सन्नाटा पसरा कि डिस्ट्रीब्यूटर्स कंगाल हो गए और ट्रेड ने इसे ‘डिजास्टर’ का वर्डिक्ट दिया.












