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Iran War Donald Trump: US Congress House Resolution Donald Trump- ट्रंप को झटका ईरान पर जंग छेड़ने की ताकत पर अमेरिकी संसद ने लगाई लगाम

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Published On: June 30, 2026

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होमदुनियाअमेरिका

इजरायल-लेबनान का सीजफायर कराते रह गए ट्रंप, उधर अमेरिकी संसद ने बांध दिए हाथ

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US Iran War News: ईरान युद्ध को लेकर अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप को बड़ा राजनीतिक झटका लगा है. अमेरिकी निम्न सदन ने एक प्रस्ताव पास कर ट्रंप की युद्ध से जुड़ी शक्तियों को सीमित करने की कोशिश की है. खास बात यह रही कि चार रिपब्लिकन सांसद भी ट्रंप के खिलाफ वोटिंग में शामिल हो गए. इस बीच पेंटागन और अन्य निगरानी एजेंसियों ने भी ईरान युद्ध की जांच शुरू कर दी है.

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डोनाल्ड ट्रंप.

US Iran War News: अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप इजरायल और लेबनान में सीजफायर कराने में कामयाब हुए हैं. लेकिन ईरान युद्ध के बीच वह अपने ही देश में घिर गए हैं. अमेरिकी प्रतिनिधि सभा (निम्न सदन) ने ट्रंप की ईरान से जुड़ी युद्ध की ताकत को सीमित करने वाला प्रस्ताव पास कर दिया. इसे ट्रंप के लिए बड़ा राजनीतिक झटका माना जा रहा है. सबसे दिलचस्प बात यह रही कि ट्रंप की रिपब्लिकन पार्टी के चार सांसदों ने भी पार्टी लाइन तोड़कर इस प्रस्ताव के पक्ष में वोट दिया. वोटिंग का परिणाम पक्ष में 215 और विरोध में 208 रहा. रिपब्लिकन सांसद थॉमस मैसी, ब्रायन फिट्जपैट्रिक, टॉम बैरेट और वॉरेन डेविडसन ने डेमोक्रेट्स का साथ दिया.

आखिर क्या है पूरा मामला?

विपक्षी दल डेमोक्रेट के सांसद ग्रेगरी मीक्स की ओर से लाए गए इस प्रस्ताव का मकसद ईरान के खिलाफ सैन्य कार्रवाई में राष्ट्रपति की स्वतंत्र शक्तियों को सीमित करना है. पिछले कई हफ्तों से डेमोक्रेट सांसद ट्रंप के युद्ध से जुड़े अधिकारों को चुनौती दे रहे थे और धीरे-धीरे कुछ रिपब्लिकन सांसद भी उनके साथ आ गए. हालांकि यह प्रस्ताव कानून नहीं बनेगा. अमेरिकी संसदीय नियमों के मुताबिक यह ‘कंकरेन्ट रिजॉल्यूशन’ है, जिसे राष्ट्रपति के हस्ताक्षर की जरूरत नहीं होती. फिर भी इसे ट्रंप की नीति के खिलाफ कांग्रेस की नाराजगी के रूप में देखा जा रहा है. इसके अलावा इसकी शक्तियों को लेकर मतभेद है. कुछ लोग मानते हैं कि यह बाध्यकारी होगा, जबकि कुछ कहते हैं कि इसका प्रतीकात्मक महत्व ज्यादा है.

ट्रंप के खिलाफ क्यों बढ़ रही बेचैनी?

रान युद्ध चौथे महीने में पहुंच चुका है और अमेरिका के अंदर सवाल उठ रहे हैं कि आखिर यह संघर्ष कितने समय तक चलेगा. अमेरिकी संविधान और वॉर पावर एक्ट के तहत राष्ट्रपति कांग्रेस की मंजूरी के बिना 60 दिनों से ज्यादा समय तक अमेरिकी सेना को सक्रिय युद्ध में नहीं रख सकते. इसी बीच पेंटागन, विदेश मंत्रालय और USAID के इंस्पेक्टर जनरल्स ने संयुक्त जांच शुरू कर दी है. उन्होंने कहा है कि कानून के मुताबिक 60 दिन से ज्यादा चलने वाले विदेशी सैन्य अभियानों की समीक्षा करना जरूरी है. इस कदम को इसलिए भी महत्वपूर्ण माना जा रहा है क्योंकि इससे संकेत मिलता है कि अमेरिकी निगरानी एजेंसियां मान रही हैं कि ईरान युद्ध 28 फरवरी से शुरू हुआ था और अब कानूनी सीमा से आगे निकल चुका है.

स्पीकर ने किया ट्रंप का बचाव

हाउस स्पीकर माइक जॉनसन ने प्रस्ताव का विरोध करते हुए कहा कि यह बेहद खतरनाक कदम है. उनके मुताबिक ट्रंप इस समय ईरान के साथ शांति समझौते को अंतिम रूप देने की कोशिश कर रहे हैं और ऐसे वक्त पर राष्ट्रपति के हाथ बांधना अमेरिका की मोलभाव करने की ताकत को कमजोर करेगा. जॉनसन ने कहा, ‘ऑपरेशन एपिक फ्यूरी खत्म हो चुका है. अमेरिका अपने लक्ष्य हासिल कर चुका है. अब राष्ट्रपति शांति समझौते को आगे बढ़ाने की प्रक्रिया में हैं.’

वहीं प्रस्ताव पेश करने वाले ग्रेगरी मीक्स ने वोटिंग के बाद कहा कि कांग्रेस का काम राष्ट्रपति पर निगरानी रखना है. उन्होंने कहा, ‘हर डेमोक्रेट ने इस प्रस्ताव के पक्ष में वोट दिया. हम अपनी संवैधानिक जिम्मेदारी निभाते रहेंगे. जब प्रशासन संविधान का पालन नहीं करेगा तो कांग्रेस उसे जवाबदेह बनाएगी.’

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Yogendra Mishra

योगेंद्र मिश्र ने इलाहाबाद यूनिवर्सिटी से जर्नलिज्म में ग्रेजुएशन किया है. 2017 से वह मीडिया में जुड़े हुए हैं. न्यूज नेशन, टीवी 9 भारतवर्ष और नवभारत टाइम्स में अपनी सेवाएं देने के बाद अब News18 हिंदी के इंटरने…और पढ़ें

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