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कभी चराता था भेड़ें और करता कार क्लीनिंग का काम, FIFA वर्ल्ड कप में ईरान के इस हीरो की कहानी आपको रुला देगी

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Published On: June 23, 2026

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नई दिल्ली: फीफा विश्व कप 2026 की मेजबानी अमेरिका, मेक्सिको और कनाडा के पास है. फुटबॉल विश्व कप के इतिहास में ऐसा पहली बार हो रहा है जब युद्ध या तनाव में शामिल दो देश एक ही टूर्नामेंट में हिस्सा ले रहे हैं. ये देश हैं अमेरिका और ईरान. पिछले कई महीनों से अमेरिका और ईरान के बीच संघर्ष चल रहा है. इस दौरान जब विश्व कप के लिए ईरान की टीम के अमेरिका जाने की बात आई, तो एक सवाल था कि क्या ऐसा हो पाएगा? लेकिन ऐसा हुआ और ईरान फीफा विश्व कप में हिस्सा ले रहा है.

हालांकि, ईरान के लिए टूर्नामेंट में हिस्सा लेना इतना भी आसान नहीं रहा है. स्टेडियम में ईरान के झंडे को बैन करना हो या फिर मैच के फौरन बाद अमेरिका से मेक्सिको के लिए रवाना होना, इन तमाम दिक्कतों के बीच ईरान ने विश्व कप में अपनी मौजूदगी दर्ज कराई और कुछ मैचों में दमदार खेल का प्रदर्शन भी किया. उसका ऐसा ही एक मैच बेल्जियम के साथ हुआ, जब टीम के गोलकीपर अलीरेजा बेइरानवांद ईरान के लिए चट्टान बन गए. अलीरेजा ने इस मैच में बेल्जियम के 7 गोल को नाकाम किया.

कौन हैं ईरान के गोलकीपर अलीरेजा बेइरानवांद?

बेल्जियम के खिलाफ मैच में दमदार बचाव के लिए बेशक आज अलीरेजा बेइरानवांद की चर्चा हो रही है, लेकिन बहुत कम लोगों को पता है कि इस खिलाड़ी ने जिन संघर्षों का सामना कर अपने देश का नाम रोशन किया, अगर कोई और होता तो वह हार मान लेता. अलीरेजा का बचपन बहुत ही मुश्किलों में बीता है. वह अपने परिवार के साथ भेड़ चराते थे, लेकिन उनके दिल में फुटबॉलर बनने का सपना था. अलीरेजा का परिवार खानाबदोश था, जिसका कोई स्थाई ठिकाना नहीं रहता था. भेड़ चराते हुए आज यहां, कल वहां—ऐसा ही होता था. चूंकि अलीरेजा अपने भाई-बहनों में सबसे बड़े थे, इसलिए उन्हें भेड़ चराने की अपनी पारिवारिक विरासत को संभालना था, लेकिन वह खुद ऐसा नहीं चाहते थे.

Alireza Beiranvand

अलीरेजा अपने पिता से छिपाकर लोकल क्लब में फुटबॉल खेलते थे. एक दिन जब उनके पिता को यह बात पता चली, तो उन्होंने अलीरेजा की खूब डांट लगाई और उनके ग्लव्स फाड़ दिए. अलीरेजा के पास इतने पैसे नहीं थे कि वह दूसरा ग्लव्स खरीद सकें. पैसों की तंगी और पिता की नाराजगी के बावजूद अलीरेजा ने फुटबॉल में अपना करियर बनाने की जिद्द ठान ली. फिर क्या था, एक रात जब उनके पिता सो रहे थे, तब उन्होंने तेहरान के लिए बस पकड़ ली और घर से भाग गए.

चचेरे भाई से अलीरेजा ने उधार लिए थे पैसे

अलीरेजा ने जब घर छोड़ा तो उनके पास पैसे नहीं थे. उन्होंने अपने चचेरे भाई से कुछ पैसे उधार लिए और चुपके से भाग निकले. 600 किलोमीटर की वह यात्रा बहुत मुश्किल थी. बस में उनकी मुलाकात एक स्थानीय टीम के कोच से हुई, जिनका नाम हुसैन फैज था. अलीरेजा ने उन्हें अपना सपना बताया, लेकिन कोच ने टोकन मनी की मांग की. अलीरेजा ने उन्हें अपनी मजबूरी बताई. वैसे गलती कोच की भी नहीं थी, क्योंकि वह एक कम बजट वाला क्लब था और वह हर किसी को मुफ्त ट्रेनिंग नहीं दे सकता था. हालांकि, फिर भी अलीरेजा ने अपने रिश्तेदार से मिले पैसों में से पहले महीने की फीस चुका दी.

तेहरान में उनका कोई रिश्तेदार या ठिकाना नहीं था. वह शाम को ट्रेनिंग करते और कभी मस्जिदों में तो कभी सड़कों पर सो जाते थे. एक दिन वह क्लब के पास ही सो गए और जब वह जागे, तो उन्होंने अपने पूरे शरीर पर सिक्के बिखरे हुए पाए. उन्होंने द गार्जियन को दिए एक इंटरव्यू में बताया था, “लोगों ने सोचा कि मैं एक भिखारी हूं. खैर, उस वजह से मुझे उस दिन अच्छा खाना नसीब हो गया था.”

कार वाशिंग का काम करने लगे थे अलीरेजा

बाद में भावुक होकर कोच ने क्लब के मालिकों से कहा कि वे अलीरेजा को मुफ्त में ट्रेनिंग करने दें और एक सीनियर खिलाड़ी के साथ उनके रहने की जगह तय कर दें. लेकिन फिर भी अपना गुजारा चलाने के लिए उन्हें पैसों की जरूरत थी. उनके रूममेट ने उन्हें एक कार-वॉशिंग फर्म से मिलवाया. अलीरेजा ने बताया, “मालिक मुझसे बहुत खुश था क्योंकि मेरा कद लंबा था और मैं बिना किसी परेशानी के बड़ी एसयूवी गाड़ियां धो सकता था.”

कार धोने के काम के बाद वे एक पिज्जा शॉप में वेटर बन गए. जब उनके कोच को इस बात का पता चला, तो उन्होंने अलीरेजा को वहां काम करने से मना कर दिया और खुद एक वजीफा (स्टाइपेंड) देना शुरू किया, जो महीने के अंत तक खत्म हो जाता था. इसके बाद अलीरेजा रात में सड़कों पर सफाई का काम करने लगे ताकि कोई उन्हें पहचान न सके.

नाफ्ता क्लब से बदली अलीरेजा की किस्मत

लगातार संघर्षों के बीच अलीरेजा की किस्मत ने पलटी मारी और स्थानीय बड़ी टीम ‘नाफ्ता’ की नजर उन पर पड़ी. नाफ्ता ने उन्हें अपनी अंडर-23 टीम के साथ ट्रेनिंग करने के लिए कहा. यहां उन्हें मैचों में खेलने के पैसे मिलने लगे. इसके बाद अलीरेजा को ईरान की अंडर-23 नेशनल टीम में जगह मिल गई. अलीरेजा के करियर का सबसे बड़ा टर्निंग पॉइंट 2015 में आया, जब उन्हें ईरान की सीनियर नेशनल टीम में शामिल किया गया. इसके तीन साल बाद, उन्होंने 2018 विश्व कप में महान फुटबॉलर क्रिस्टियानो रोनाल्डो की पेनल्टी को रोककर इतिहास रच दिया.

इस कामयाबी के बीच वह घर लौटे और अपने पिता के साथ सारे मनमुटाव दूर कर लिए. अलीरेजा बताते हैं, “मेरे पिता ने मुझसे कहा कि मैंने उनका सिर गर्व से ऊंचा कर दिया है और उन्हें दुख है कि उन्होंने शुरुआती दिनों में मेरा साथ नहीं दिया. वह एक बहुत ही भावुक पल था, लेकिन जीवन में आगे बढ़ने के लिए आपको कुछ कठिन फैसले लेने ही पड़ते हैं.”

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