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Rubika Liyaquat Show: एक झटके में बढ़ गए दाम… आखिर किस संकट ने भारत की जेब पर हमला कर दिया?

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Published On: May 15, 2026

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Rubika Liyaquat Show: वैश्विक स्तर पर चल रहे तनाव का असर अब सीधे भारत की आम जिंदगी पर दिखने लगा है. पश्चिम एशिया में जारी संघर्ष और अमेरिका-ईरान के बीच बढ़ते तनाव ने पूरी दुनिया की ऊर्जा सप्लाई को प्रभावित कर दिया है, और इसका सीधा असर अब पेट्रोल-डीजल की कीमतों पर दिखाई दे रहा है. प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कुछ समय पहले ही देशवासियों से ऊर्जा और विदेशी मुद्रा की बचत करने की अपील की थी, खासकर क्रूड ऑयल और सोने जैसी आयात पर निर्भर चीजों को लेकर. उस समय कई विशेषज्ञ भी चेतावनी दे रहे थे कि वैश्विक हालात बिगड़ सकते हैं और इसका असर भारत पर पड़ेगा और अब वही स्थिति सामने आ रही है. पेट्रोल और डीजल की कीमतों में हाल ही में लगभग 3 रुपये से ज्यादा की बढ़ोतरी दर्ज की गई है, जो मार्च 2022 के बाद सबसे बड़ा उछाल माना जा रहा है. इसके साथ ही थोक महंगाई दर में भी तेज बढ़ोतरी देखी गई है, जिससे ट्रांसपोर्ट, एलपीजी, दूध, सीएनजी और यहां तक कि सोने-चांदी की कीमतों पर भी असर पड़ रहा है. विशेषज्ञों का कहना है कि इसकी सबसे बड़ी वजह पश्चिम एशिया में जारी युद्ध है, जिसने वैश्विक तेल सप्लाई चेन को बुरी तरह प्रभावित किया है. खासकर स्ट्रेट ऑफ होर्मुज जैसे अहम समुद्री मार्ग पर तनाव बढ़ने से तेल की सप्लाई पर सीधा असर पड़ रहा है. भारत अपनी जरूरत का बड़ा हिस्सा करीब 85% कच्चा तेल आयात करता है, जिसमें से एक बड़ा हिस्सा इसी मार्ग से होकर आता है. इसी वजह से अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतें 65 डॉलर प्रति बैरल से बढ़कर 100 डॉलर से भी ऊपर पहुंच गई हैं. इस बढ़ती कीमत का असर भारतीय तेल कंपनियों पर भी पड़ा है, जिनका नुकसान अरबों रुपये तक पहुंचने की आशंका जताई जा रही है. वहीं दूसरी तरफ राजनीतिक माहौल भी गर्म है, जहां विपक्ष महंगाई को लेकर सरकार पर निशाना साध रहा है.

​Rubika Liyaquat Show: वैश्विक स्तर पर चल रहे तनाव का असर अब सीधे भारत की आम जिंदगी पर दिखने लगा है. पश्चिम एशिया में जारी संघर्ष और अमेरिका-ईरान के बीच बढ़ते तनाव ने पूरी दुनिया की ऊर्जा सप्लाई को प्रभावित कर दिया है, और इसका सीधा असर अब पेट्रोल-डीजल की कीमतों पर दिखाई दे रहा है. प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कुछ समय पहले ही देशवासियों से ऊर्जा और विदेशी मुद्रा की बचत करने की अपील की थी, खासकर क्रूड ऑयल और सोने जैसी आयात पर निर्भर चीजों को लेकर. उस समय कई विशेषज्ञ भी चेतावनी दे रहे थे कि वैश्विक हालात बिगड़ सकते हैं और इसका असर भारत पर पड़ेगा और अब वही स्थिति सामने आ रही है. पेट्रोल और डीजल की कीमतों में हाल ही में लगभग 3 रुपये से ज्यादा की बढ़ोतरी दर्ज की गई है, जो मार्च 2022 के बाद सबसे बड़ा उछाल माना जा रहा है. इसके साथ ही थोक महंगाई दर में भी तेज बढ़ोतरी देखी गई है, जिससे ट्रांसपोर्ट, एलपीजी, दूध, सीएनजी और यहां तक कि सोने-चांदी की कीमतों पर भी असर पड़ रहा है. विशेषज्ञों का कहना है कि इसकी सबसे बड़ी वजह पश्चिम एशिया में जारी युद्ध है, जिसने वैश्विक तेल सप्लाई चेन को बुरी तरह प्रभावित किया है. खासकर स्ट्रेट ऑफ होर्मुज जैसे अहम समुद्री मार्ग पर तनाव बढ़ने से तेल की सप्लाई पर सीधा असर पड़ रहा है. भारत अपनी जरूरत का बड़ा हिस्सा करीब 85% कच्चा तेल आयात करता है, जिसमें से एक बड़ा हिस्सा इसी मार्ग से होकर आता है. इसी वजह से अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतें 65 डॉलर प्रति बैरल से बढ़कर 100 डॉलर से भी ऊपर पहुंच गई हैं. इस बढ़ती कीमत का असर भारतीय तेल कंपनियों पर भी पड़ा है, जिनका नुकसान अरबों रुपये तक पहुंचने की आशंका जताई जा रही है. वहीं दूसरी तरफ राजनीतिक माहौल भी गर्म है, जहां विपक्ष महंगाई को लेकर सरकार पर निशाना साध रहा है.  

विकाश रघुवंशी संस्थापक एवं प्रधान संपादक डिजिटल भारत न्यूज़ (डिजिटल मीडिया) एवं रघुवंशी वाइसहब (प्रिंट मीडिया) 📞 7403888881 विकाश रघुवंशी Digital Bharat News में पिछले छह वर्षों से सक्रिय रूप से कार्यरत हैं। डिजिटल और प्रिंट पत्रकारिता में उन्हें 6 वर्ष से अधिक का अनुभव है। सोनभद्र में पत्रकारिता करते हुए उन्होंने स्थानीय मुद्दों, जनसरोकार और प्रशासनिक खबरों पर मजबूत पकड़ बनाई है। उत्तर प्रदेश की राजनीति, क्राइम और सामाजिक विषयों पर उनकी विशेष पकड़ है। इसके अलावा इंफ्रास्ट्रक्चर, पर्यटन, शिक्षा और स्वास्थ्य जैसे विषयों पर भी वे नियमित रूप से लिखते हैं। उन्होंने बैचलर ऑफ आर्ट्स इन जर्नलिज्म एंड मास कम्युनिकेशन की डिग्री प्राप्त की है। सरल और प्रभावी भाषा में खबरों को पाठकों तक पहुँचाना उनकी विशेषता है। खबर लिखने के अलावा साहित्य पढ़ने और लिखने में भी उनकी गहरी रुचि है। || भारत का तेजी से उभरता हुआ हिन्दी समाचार पत्र ||… Read More

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