भीषण गर्मी में जहां लोग एसी और कूलर का सहारा ले रहे हैं, वहीं देवघर के घोरलास गांव में लोग 90 साल पुराने मिट्टी के कोठा घर में राहत महसूस कर रहे हैं. साल 1935 में बने इस ऐतिहासिक ‘दरवाजा’ की मोटी मिट्टी की दीवारें और देसी तकनीक आज भी कमरे को 45 डिग्री तापमान में ठंडा बनाए रखती हैं. ग्रामीणों का कहना है कि इस कमरे के अंदर घुसते ही प्राकृतिक ठंडक महसूस होती है. यहां की हवा के आगे एसी-कूलर भी फीके लगते हैं.
भीषण गर्मी में जहां लोग एसी और कूलर का सहारा ले रहे हैं, वहीं देवघर के घोरलास गांव में लोग 90 साल पुराने मिट्टी के कोठा घर में राहत महसूस कर रहे हैं. साल 1935 में बने इस ऐतिहासिक ‘दरवाजा’ की मोटी मिट्टी की दीवारें और देसी तकनीक आज भी कमरे को 45 डिग्री तापमान में ठंडा बनाए रखती हैं. ग्रामीणों का कहना है कि इस कमरे के अंदर घुसते ही प्राकृतिक ठंडक महसूस होती है. यहां की हवा के आगे एसी-कूलर भी फीके लगते हैं.









