योगी सरकार की जीरो टॉलरेंस को खुली चुनौती शासनादेश की अवहेलना,ओबरा में EO ने नहीं छोड कार्यभार
भ्रष्टाचार की फाइलें समेटने में EO ओबरा नगर पंचायत में प्रशासनिक मनमानी
सोनभद्र ब्यूरो चीफ दिनेश उपाध्याय-(ओबरा/सोनभद्र/उत्तर प्रदेश)–डिजिटल भारत न्यूज टुडे नेटवर्क 24×7 LIVE
सोनभद्र। उत्तर प्रदेश शासन द्वारा 6 जनवरी 2026 को जारी शासनादेश की खुलेआम अवहेलना का मामला सामने आया है। नगर पंचायत ओबरा जनपद सोनभद्र के अधिशासी अधिकारी मधुसूदन जायसवाल का शासनादेश के माध्यम से तत्काल प्रभाव से स्थानांतरण कर नगर पंचायत निधौली कला, जनपद एटा में तैनाती कर दी गई थी, इसके बावजूद उन्होंने अब तक ओबरा नगर पंचायत का कार्यभार नहीं छोड़ा है।नगर विकास अनुभाग-1, उत्तर प्रदेश शासन द्वारा जारी पत्र संख्या 51/9-1-2026-09सा/25/टी0सी0, दिनांक 06 जनवरी 2026 में स्पष्ट निर्देश है कि संबंधित अधिकारी को तत्काल कार्यभार त्याग/ग्रहण करना होगा। आदेश के पैरा-2 में यह भी उल्लेख है कि आदेश की अवहेलना की स्थिति में उत्तर प्रदेश सरकारी सेवक (अनुशासन एवं अपील) नियमावली, 1999 के अंतर्गत कठोर अनुशासनात्मक कार्रवाई की जाएगी।इसके बावजूद संबंधित अधिशासी अधिकारी द्वारा कार्यभार न छोड़ने से प्रशासनिक हलकों में चर्चा तेज है। मौखिक रूप से यह तर्क दिया जा रहा है कि जिलाधिकारी कार्यालय से पत्र प्राप्त नहीं हुआ, जबकि सेवा नियमों के अनुसार शासनादेश स्वयं में प्रभावी आदेश होता है और उसके अनुपालन हेतु किसी अतिरिक्त पत्र की आवश्यकता नहीं होती।


स्थानीय नागरिकों व जागरूक लोगों का कहना है कि इस तरह की मनमानी से न केवल शासन की प्रतिष्ठा प्रभावित हो रही है, बल्कि नगर पंचायत में प्रशासनिक व वित्तीय अनियमितताओं की आशंका भी बढ़ रही है। आरोप है कि नगर पंचायत में लंबित भ्रष्टाचार से जुड़ी फाइलों को समेटने का प्रयास किया जा रहा है।मामले को गंभीर मानते हुए राकेश केशरी ने मुख्यमंत्री उत्तर प्रदेश को पत्र भेजकर शासन स्तर पर तत्काल हस्तक्षेप की मांग की है। अब देखना यह है कि शासन इस खुली अवहेलना पर कब और क्या सख्त कदम उठाता है तथा नगर पंचायत ओबरा में प्रशासनिक अनुशासन कब बहाल होता है।


