डैम पर कोयला चोरी धड़ल्ले से
– एंपटी रैक की साफ सफाई के नाम पर हो रहा है कोयला चोरी
– रेलवे के एक टेंडर ने ओबरा डैम पर कोयला चोरों का मन बढ़ाया
सोनभद्र ब्यूरो चीफ दिनेश उपाध्याय-(ओबरा/सोनभद्र/उत्तर प्रदेश)–डिजिटल भारत न्यूज टुडे नेटवर्क 24×7 LIVE
ओबरा/सोनभद्र।रेलवे विभाग के एक टेंडर ने ओबरा डैम रेलवे स्टेशन व आस-पास कोयला चोरों को सक्रिय कर दिया है। मामला यह है कि जिस काम के लिए पहले रेलवे निविदा में कुछ धनराशि दिया करती थी।जिसमें खाली रैकों की साफ सफाई व मरम्मत किया जाता था,किंतु इस वर्ष रेलवे द्वारा ओबरा डैम रेलवे स्टेशन को लेते हुए लगभग पांच जगह पर इस तरह का टेंडर किया गया।जिसमें ठेकेदार स्वयं एक वर्ष के लिए 5 करोड़ धनराशि जमा कर वह ठेका लेता है।जिसमें खाली रैकों की साफ सफाई करने के दौरान प्राप्त माल उसे ठेकेदार का हो जाएगा।इस तरह का ठेका रेलवे विभाग ने यह सोचकर दिया कि पहले कुछ धनराशि देने के बावजूद ठेकेदार द्वारा रैकों को ढंग से साफ नहीं किया जाता था। जिस कारण यदि ठेकेदार को पैसे देकर साफ सफाई करना पड़े तो शायद बड़ा अच्छा काम करेगा और रेलवे को इस फजूल खर्ची से राहत मिलेगी और रेलवे विभाग की मंसा यह थी कि कोनो अथवा चिपके हुए कोयल जो नहीं छुड़ाए जाते थे। इस लालच में छुड़ाए जाएंगे किंतु यहां मामला उल्टा ही हो गया खाली रैकों में कितने बड़े पैमाने पर कोयला का उत्सर्जन होने लगा जिसे यह करना अनुचित नहीं होगा कि इस टेंडर के नाम पर बड़े पैमाने पर कोयला चोरी किया जा रहा है।आपको बताते चलें कि ओबरा डैम पहले भी कोयला चोरों का गढ़ रहा है किंतु इतने बड़े पैमाने पर चोरी नामुमकिन थी लेकिन इस एक टेंडर की वजह से कोयला माफिया सक्रिय होकर परोक्ष अथवा अपरोक्ष रूप से इस चोरी का हिस्सा बन चुके हैं यही कारण है कि समाचार प्रकाशित करने पर फर्जी मुकदमे लगाने की धमकियां भी मिल जाती है।लगभग चार माह पूर्व से चल रहे ओबरा डैम पर गोरख धंधे को वैध बताते हुए एक निजी कंपनी का नाम सामने आया है।इस गोरख धंधे में बिजली उत्पादन के लिए आए कोयल की रैकों की साफ सफाई करने के नाम पर बड़े पैमाने पर कोयला बेचा जा रहा है।लगभग 100 से 200 टन के बीच प्रतिदिन कोयला इकट्ठा किया जा रहा है।इसके 4 माह पूर्व से प्रतिदिन लगभग 100 से 200 टन कोयला बेचा जाता रहा है तो यही मात्रा की कमी ओबरा पावर प्लांट को भी होनी चाहिए किंतु ऐसी कोई बात सामने नहीं आ रही है क्योंकि जब स्टेशन यार्ड पर ही कोयला बड़े पैमाने पर रखा गया है और यह बताया जा रहा है कि यह कोयला एंपटी रैक से निकाला गया है जब कि लगभग 4 से 8 गाड़ी यानी लगभग 100से200 टन कोयला प्रतिदिन बेचा जा रहा है।





आए दिन नगर वासियों द्वारा शारदा मंदिर से बग्घा नाला के बीच इन कोयल की गाड़ियों को देखा गया और स्थानीय लोगों द्वारा बताया भी गया है कि लगभग चार से आठ गाड़ी प्रतिदिन कोयला बेचा जा रहा है।उसके बावजूद इतना बड़ा कोयला भंडारण मौजूद है।वहां उपस्थित रेलवे कर्मचारी व कार्य कर रहे मजदूरों द्वारा एक निजी कंपनी का नाम लिया गया जो कोयल के एम्टी रैक को खाली करने के नाम पर साफ सफाई करने के एवज में इस कोयले को बेचने की वैधता बताती है और यह कोयला कांटा होने के लिए शारदा मंदिर के निकट कांटे पर जाता रहा और वहां से बनारस ईट भट्ट अथवा अन्य किसी भी व्यक्ति द्वारा खरीदे जाने के लिए इस कंपनी के संचालकों द्वारा वैध बताया जाता रहा जबकि इसी ट्रेन यार्ड पर दीपावली से कुछ दिन पूर्व जेसीबी समेत दो अन्य गाड़ियों को ओबरा थाना प्रशासन कुछ दिनों तक खड़ा रखे हुए थे और इस संबंध में थाना प्रशासन द्वारा कोई भी सूचना सामूहिक नहीं की गई थी बाद इसके यह और भी धड़ल्ले से बेचा जाने लगा इस मामले को लेकर क्या कोई बड़ा सिंडिकेट बन गया है ?अथवा कोयला माफियाओं का सोनभद्र के ओबरा में बड़े पैमाने पर पदार्पण हो चुका है?क्योंकि 100 से 200टन कोयले का प्रतिदिन बेचा जाना ओबरा पावर प्रोजेक्ट में इस्तेमाल हो रहे कोयल की मात्रा और स्टेशन परिसर दोनों को संदिग्ध करती है।इसमें मौके पर मौजूद लोगों ने इसका टेंडर धनबाद द्वारा स्वीकृत बताया है और आपीएफ द्वारा भी इस पर कभी कोई रोक नहीं लगाया गया।किंतु ऐसा कोई भी पेपर दिखाया नहीं गया। मामला कुछ भी हो किंतु रैक को खाली कराकर साफ सफाई कराने के नाम पर
कोयला का इतने बड़े पैमाने पर बेचा जाना और इतनी बड़ी मात्रा का पावर प्रोजेक्ट में कमी न होना ये बातें आपस में सामंजस्य नहीं बनाती क्योंकि कोयला का स्टॉक और कोयले की बेचे जाने वाली
मात्रा तथा कोयले की मात्रा का पावर प्रोजेक्ट के इस्तेमाल मैं कमी ना होना।आपस में सामंजस नहीं स्थापित करती। इस खेल के पीछे कौन-कौन सम्मिलित हैं यह जल्द ही प्रकाश में लाया जाएगा इसके पूर्व भी बड़े कोयला चोरी का खुलासा हमारे समाचार पत्र द्वारा किया जाता रहा है। जिसके लिए निजी एवं सरकारी कंपनियों के उच्च अधिकारियों द्वारा साधुवाद व धन्यवाद से स्वच्छ पत्रकारिता को सम्मानित भी पूर्व में किया है देखना यह है कि इस बड़े झोल में कितना बड़ा पोल है।


