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महज पांच लाख की आबादी वाला देश, जिसने दुनिया को ये सिखा दिया कि सपनों की कोई सीमा नहीं होती. काबो वर्डे हारकर भी जीत गया. उनका हर खिलाड़ी, हर फैन सबने मिलकर एक ऐसी कहानी लिखी, जो सालों तक सुनाई जाएगी. यह सिर्फ फुटबॉल नहीं था यह जुनून था, यह भरोसा था, यह वो आग थी जो दिल में जलती है और कहती है हम कर सकते हैं
फीफा वर्ल्ड कप में केप-वर्डे की टीम ने छोड़ी अमिट छाप, शानदार फुटबॉल का प्रदर्शन किया
नई दिल्ली. सुबह के 3:30 बजे जब दुनिया सो रही थी, आंखें खोलना किसी जंग जीतने जैसा था, काम करने के बाद टूटे शरीर के साथ उठना आसान नहीं था, लेकिन दिल में एक अजीब सी बेचैनी थी—केप वर्डे को दुनिया की सबसे बड़ी टीमों में से एक के खिलाफ खेलते देखने की और उस रात, जो देखा वो सिर्फ एक मैच नहीं था, वो एक एहसास था, जो हमेशा याद रहेगा.
72वें मिनट का वो पल आज भी रोंगटे खड़े कर देता है. लियोनेल मेसी फ्री-किक के लिए खड़े थे वही जगह, जहां से वो अक्सर जादू रचते हैं. सबको पता था कि अब क्या होने वाला है. शॉट लिया गया गेंद हवा में खूबसूरती से मुड़ी और गोल के टॉप-राइट कॉर्नर की तरफ बढ़ी ऐसा लग रहा था जैसे वक्त थम गया हो. 100 में से 99 बार ये गोल होता लेकिन इस बार कहानी कुछ और थी.
मेसी की मुस्कान ने बताया मैच नहीं आसान
वोज़िन्हा एक ऐसा नाम, जिसे उस पल दुनिया ने महसूस किया. उन्होंने अपनी पूरी ताकत झोंक दी और असंभव को संभव कर दिखाया गेंद को क्रॉसबार के ऊपर धकेल दिया मेसी के चेहरे पर हल्की मुस्कान थी जैसे वो भी समझ गए हों कि आज सामने सिर्फ एक टीम नहीं, बल्कि एक जज्बा खड़ा है. मियामी में बैठे लोग शायद ये सोच भी नहीं सकते थे कि ये मैच एक्स्ट्रा टाइम तक जाएगा लेकिन केप वर्डे ने पहले ही दिखा दिया था कि वो किसी चमत्कार से कम नहीं हैं. स्पेन के खिलाफ उनका प्रदर्शन मजाक नहीं, हकीकत था. और फिर वो पल आया, जिसने इस मैच को अमर बना दिया.
वर्ल्ड कप का यादगार लम्हां
92वें मिनट में अर्जेंटीना ने गोल किया जैसे जीत उनकी मुट्ठी में आ गई हो लेकिन काबो वर्डे ने हार मानना नहीं सीखा था. 103वें मिनट में सिडनी कैब्राल ने वो गोल किया, जो सिर्फ स्कोरबोर्ड पर नहीं, दिलों में लिखा गया. वो एक देश का सपना था, जो उस एक किक में साकार हुआ. एमिलियानो मार्टिनेज जैसे दिग्गज गोलकीपर भी उस पल के सामने बेबस थे. अर्जेंटीना जीत गया, लेकिन उस रात असली जीत किसकी थी ये हर किसी को पता था.
कमाल कर गई केप-वर्डे की टीम
महज पांच लाख की आबादी वाला देश, जिसने दुनिया को ये सिखा दिया कि सपनों की कोई सीमा नहीं होती. काबो वर्डे हारकर भी जीत गया. उनका हर खिलाड़ी, हर फैन सबने मिलकर एक ऐसी कहानी लिखी, जो सालों तक सुनाई जाएगी. यह सिर्फ फुटबॉल नहीं था यह जुनून था, यह भरोसा था, यह वो आग थी जो दिल में जलती है और कहती है हम कर सकते हैं.
मियामी की वो रात हमेशा याद रहेगी. मेसी का सपना अभी जिंदा है, लेकिन उस रात उन्हें भी एहसास हुआ कि सपनों की कोई एक टीम नहीं होती. अगर खेल कुछ सिखाता है, तो यही कि दिल से खेलने वाले कभी हारते नहीं.
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मैं, राजीव मिश्रा, वर्तमान में नेटवर्क 18 में एसोसिएट स्पोर्ट्स एडिटर के रूप में कार्यरत हूँ. इस भूमिका में मैं डिजिटल स्पोर्ट्स कंटेंट की योजना, संपादकीय रणनीति और एंकरिंग की जिम्मेदारी निभाता हूँ. खेल पत्रका…और पढ़ें












