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Raaj Kumar Best Dialogues : यह दास्ता बॉलीवुड के उस सदाबहार अभिनेता की है जिनका रॉयल अंदाज पर्दे पर बिकता था. पूरा बॉलीवुड जिनसे खौफ खाता था. बड़े-बड़े हीरो जिनका नाम सुनकर हिल जाते थे. अपनी शर्तों पर काम करने वाले इस बॉलीवुड स्टार ने अपने करियर में राज कपूर-धर्मेंद्र से लेकर फिरोज खान से पंगा लिया. फिल्म के हिट या फ्लॉप, उन पर कोई असर नहीं पड़ता था. हर अगली फिल्म में मुंहमांगी फीस लेते थे. बॉलीवुड के इस हीरो के सामने बड़े से बड़े विलेन भी फीके पड़ जाते थे. उन्होंने अपने करियर में 5 ऐसे कालजयी डायलॉग बोले जो अमर हो गए. हर जनरेशन की पसंद बन गए.
बॉलीवुड अभिनेता राज कुमार तो अपने बेहतरीन डायलॉग के लिए जाने जाते थे. अपनी बेबाकी, अक्खड़पन के लिए मशहूर रहे बॉलीवुड एक्टर राज कुमार को ‘संवाद अदायगी’ का किंग कहा जाता था. वो सिंपल से डायलॉग को आइकॉनिक बना देते थे. कुदरत ने ऐसी बुलंद आवाज बख्शी थी कि उनके डायलॉग सीधे दर्शकों के दिल में उतर जाते थे. उनके कुछ डायलॉग तो हमेशा के लिए अमर कर दिया. हर जनरेशन की पसंद हैं. अभिनेता राज कुमार का बेबाक अंदाज ही कंट्रोवर्सी की वजह रहा. राज कपूर से लेकर अमिताभ बच्चन तक कई बड़े सितारों से उनका टकराव हुआ.

ब्लूचिस्तान के लोरालाई इलाके में 8 अक्टूबर 1926 को जन्मे लीजेंडरी एक्टर राजकुमार कश्मीरी पंडित थे. बचपन का नाम कुलभूषण पंडित था. हर फ्लॉप फिल्म के साथ अपनी फीस भी 1 लाख रुपये बढ़ा लेते थे. वो कहते थे कि फिल्म फ्लॉप हुई है, मैं फ्लॉप नहीं हुआ हूं. 40 के दशक में मुंबई में बतौर सब-इंस्पेक्टर काम करने वाले राज कुमार का अंदाज नहीं बदला. जब वो डायलॉग बोलते थे तो उनके साथ काम करने वाले बड़े-बड़े एक्टर भी झेंप जाते थे. उन्होंने अपने करियर में हमराज (1967), हीर रंझा (1971), पाकीजा (1972), कुदरत (1981), मरते दम तक (1987), सूर्या (1989), सौदागर (1991) और तिरंगा (1993) जैसी बेहतरीन फिल्मों में किया. 80-90 के दशक में आई उनकी फिल्में पर्दे पर छाई रहीं. इन फिल्मों के डायलॉग आज भी पॉप्युलर हैं.

हाल ही में मशहूर डायरेक्टर-प्रोड्यूसर केसी बोकाड़िया ने अपने एक इंटरव्यू में एक दिलचस्प किस्सा बताया. केसी बोकाड़िया ने बताया, ‘राज कुमार साहब को जिन डायरेक्टर-प्रोड्यूसर की शक्ल पसंद नहीं आती थी, उनके साथ काम करने से इनकार कर देते थे. मैं एक फिल्म इंसानियत के देवता डायरेक्ट कर रहा था. मैंने रात में राज साहब को फोन किया और एक लाइन सुनाई. उन्हें लाइन अच्छी लगी तो मैंने उन्हें काम करने का ऑफर दिया. वो बोले कि पैसे कितने देंगे? मैंने 23 लाख रुपये ऑफर किए. वो बोले कि 24 कर दो, मैंने कहा कि 25 लाख ले लीजिए. पूरा किस्सा 5 मिनट में फाइनल हुआ. उनके जैसा सरल इंसान नहीं था.’
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राज कुमार साहब सिर्फ चार एक्टर दिलीप कुमार, राज कपूर, देवानंद और अशोक कुमार का सम्मान करते थे. आमिर खान की भी उन्होंने तारीफ की थी. राज कुमार ने अपने एक पुराने इंटरव्यू में बताया था, ‘मैं पुलिस में था. बदनसीबी से फिल्में नहीं देखता था. आज भी फिल्में देखने का शौक नहीं है. पहाड़ों में घूमने का शौक है.’

राज कुमार साहब बहुत ही मुंहफट थे. इसी के चलते बॉलीवुड के कई दिग्गज एक्टर्स संग उनका विवाद हुआ. धर्मेंद्र से लेकर फिरोज खान संग उनके विवाद चर्चा में रहे. 1965 में ‘ऊंचे लोग’ फिल्म की शूटिंग के दौरान राजकुमार का फिरोज खान से विवाद हुआ था.
1965 में ही ‘काजल’ फिल्म की शूटिंग के दौरान राज कुमार ने धर्मेंद्र को देखकर डायरेक्टर से कहा था कि ये पहलवान कहां से ले आए हो? धर्मेंद्र ने गुस्से में राजकुमार की कॉलर पकड़ ली थी. राज कुमार साहब ने एक बार पार्टी में अमिताभ बच्चन को भी जलील किया था. उन्होंने कहा था, ‘तुम्हारे सूट का कपड़ा बहुत पसंद आया. हम ऐसे ही अपने घर के पर्दे बनवाना चाहते हैं.’ अमिताभ ने तो उनके साथ कभी काम ही नहीं किया. एक बार पार्टी में राज कपूर से भी राज कुमार भिड़ गए थे.

राज कुमार साहब ने अपने 50 साल के करियर में 70 से ज्यादा फिल्मों में काम किया. उन्होंने अपने करियर में कुछ ऐसे डायलॉग बोले जो अमर हो गए. ‘वक्त’ फिल्म का उनका डायलॉग ‘चिनॉय सेठ, जिनेक अपने घर शीशे के हों, वो दूसरों पर पत्थर नहीं फेंका करते’ आज भी पॉप्युलर है. ‘वक्त’ फिल्म का निर्देशन यश चोपड़ा ने किया था. फिल्म ब्लॉकबस्टर साबित हुई थी. इसी तरह 1981 में आई ‘बुलंदी’ फिल्म के एक डायलॉग को राज कुमार ने अपने ही अंदाज में बोलकर आइकॉनिक बना दिया. वो डायलॉग था : ‘हमको जो मिटा सके, ये जमाने में दम नहीं, हमसे जमाना खुद है, हम जमाने से नहीं.’

इसी तरह 1987 में आई ‘मरते दम तक’ फिल्म में राज कुमार साहब आइकॉनिक डायलॉग बोले. फिल्म में राज कुमार और ओम पुरी जैसे दो दिग्गजों के बीच जबर्दस्त डायलॉग थे. इसी फिल्म का एक डायलॉग था : हम कुत्तों से बात नहीं करते, गोटियां नोचने वाला गीदड़, गला फाड़ने से शेर नहीं बन जाता. राणा की मौत इतनी छोटी नहीं, जो तुम्हारी मुट्ठी में हो.’ इसी फिल्म का एक आइकॉनिक डायलॉग ‘हमारे फोन के बाद इंटरव्यू नहीं होता’ आज भी सिहरन पैदा कर देता है. 1989 में सिनेमाघरों में आई ‘सूर्या’ फिल्म में राज कुमार के सामने मशहूर विलेन अमरीश पुरी भी फीके पड़ गए थे. एक सीन में अमरीश पुरी को जवाब देते हुए राज कुमार कहते हैं, ‘हम वो कलेक्टर नहीं, जिनका ताबादला फूंक मारकर कर दिया जाए. कलेक्टरी तो हम शौक से करते हैं, रोजी-रोटी के लिए नहीं.’

90 के दशक में राज कुमार साहब के डायलॉग खूब पॉप्युलर हुए. ये वो दौर था जब टीवी का चलन पूरे देश में बढ़ रहा था. साल 1991 जब सुभाष घई की फिल्म ‘सौदागर’ रिलीज हुई. इस फिल्म में राज कुमार और दिलीप कुमार जैसे दो दिग्गज पूरे 33 साल बाद साथ में आए थे. इसी फिल्म का एक आइकॉनिक डायलॉग ‘हम खैरात नहीं लेते वीर सिंह, हम तुम्हें मारेंगे और जरूर मारेंगे लेकिन वो बंदूक भी हमारी होगी, गोली भी हमारी होगी और वक्त भी हमारा होगा.’ 1993 में रिलीज हुई ‘तिरंगा’ फिल्म में भी आइकॉनिक डायलॉग थे. इसी फिल्म में राजकुमार कहते हैं, ‘ना तलवार की धार, ना गोलियों की बौछार से, बंदा डरता है तो सिर्फ परवरदिगार से.’ फिल्म बॉक्स ऑफिस पर हिट रही थी.

राज कुमार की रौबदार आवाज फिल्म के हिट होने की गारंटी मानी जाती थी. जिस बुलंद आवाज, खास संवाद अदायगी के चलते राज कुमार ने दर्शकों के दिल में जगह बनाई, बॉलीवुड में चार दशक तक राज किया, वही राज कुमार अपनी आवाज सुनने के लिए तरस गए. राज कुमार साहब को गले का कैंसर हो गया था. उनकी रौबदार आवाज खो गई. पूरा किस्सा 1995 में आई फिल्म ‘जवाब’ के दौरान हुआ था. डबिंग के दौरान खुलासा हुआ कि राज कुमार साहब को गले का कैंसर है. 3 जुलाई 1996 को कैंसर के चलते उनका मुंबई में निधन हो गया. आज राज कुमार साहब हमारे बीच नहीं हैं लेकिन उनके कई डायलॉग्स आज तक सिने प्रेमियों के जेहन में बसे हुए हैं.












