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जिस साल अमिताभ बच्चन की जंजीर फिल्म आई, वो बॉलीवुड के नए सुपरस्टार बने, उसी साल यश चोपड़ा के निर्देशन-प्रोडक्शन की फिल्म ने बॉक्स ऑफिस पर धूम मचा दी थी. फिल्म में राजेश खन्ना लीड रोल में थी. बतौर प्रोड्यूसर यश चोपड़ा की यह पहली फिल्म थी. इस फिल्म का मुहुर्त क्लैप दिलीप कुमार ने दिया था. मूवी शुरुआत में सिर्फ 9 सिनेमाघरों में रिलीज हुई थी. फिल्म का म्यूजिक ब्लॉकबस्टर था, फिर भी लक्ष्मीकांत-प्यारेलाल ने फिर कभी यश चोपड़ा के साथ काम नहीं किया. यह यादगार फिल्म कौन सी थी, आइये जानते हैं.
दिलीप कुमार की एक फिल्म ‘दाग’ 1952 में आई थी. सेम टाइटल से 1973 में एक और फिल्म यश चोपड़ा ने बनाई थी. डॉग फिल्म में राजेश खन्ना राखी गुलजार और शर्मिला टैगोर लीड रोल में थे. डायरेक्शन यश चोपड़ा का था. स्टोरी गुलशन नंदा की थी. डायलॉग अख्तर उल-ईमान ने लिखे थे. फिल्म की बेसिक स्टोरी थॉमस हार्डी के 1886 के उपन्यास ‘द मेयर ऑफ कैस्टर ब्रिज’ से इंस्पायर्ड थी. म्यूजिक लक्ष्मीकांत प्यारेलाल का था. गीतकार साहिर लुधियानवी थे.

बड़े भाई बीआर चोपड़ा को छोड़ने के बाद यश चोपड़ा ने अपना प्रोडक्शन हाउस ‘यशराज फिल्म्स’ के नाम से शुरू किया था. राखी से लेकर राजेश खन्ना ने उन्हें फिल्म के लिए सपोर्ट किया और कहा कि वो मार्केट प्राइस नहीं लेंगे. गीतकार साहिर लुधियानवी ने कहा था कि जब फिल्म हिट हो जाए तब पैसे दे देना. फिल्म प्रोड्यूसर-डिस्ट्रीब्यूटर्स गुलशन राय ने 2 लाख रुपये का चेक दिया था.

‘दाग’ एक रोमांटिक ड्रामा फिल्म थी. यशराज चोपड़ा पहली बार प्रोड्यूसर बने थे. यशराज फिल्म्स के बैनर तले इस फिल्म का निर्माण किया था. फिल्म में मदन पुरी, कादर खान, प्रेम चोपड़ा और एके हंगल अहम भूमिकाओं में थे. कादर खान के साथ यश चोपड़ा की यह इकलौती फिल्म है. लक्ष्मीकांत प्यारेलाल और यश चोपड़ा की यह इकलौती फिल्म है.
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फिल्म का म्यूजिक ट्रैक लक्ष्मीकांत-प्यारेलाल ने कंपोज किया था. फिल्म के सदाबहार रोमांटिक गाने साहिर लुधियानवी ने लिखे थे. सभी वर्जन मिलाकर 7 गाने थे. फिल्म में राजेश खन्ना ने कुछ लाइनें बोली थीं जिनमें जिंदगी का दर्द था. उनके गिरते स्टारडम का दर्द था. तड़प थी. ये लाइनें थीं : मैं तो कुछ भी नहीं, जिन्हें साहिर लुधियानवी ने लिखा था. ये लाइनें राजेश खन्ना के स्टारडम को बताती हैं.

फिल्म के अन्य पॉपुलर गानों में ‘मेरे दिल में आज क्या है तू कहे तो मैं बता दूं’ ‘आप चाहे मां रूठे या बाबा’, ‘तुम और हम’ और ‘जब भी जी चाहे दुनिया बसा लेते हैं लोग’ थे. लता मंगेशकर के दो सोलो सॉन्ग थे. दो किशोर कुमार के साथ ड्यूएट सॉन्ग थे. हर गाना सुपरहिट था. फिल्म के गानों ने स्टोरी को बहुत सपोर्ट किया. फिल्म बहुत अच्छी बनी थी. राजेश खन्ना ने इस फिल्म में बहुत कम फीस में काम किया था. उन्हें एक हिट फिल्म की दरकार थी. दाग ने वह कमी पूरी की.

फिल्म जब बनकर तैयार हुई तो गुलशन राय ने क्लाइमैक्स बदलने की सलाह दी थी. उनका कहना था कि फिल्म का क्लाइमैक्स दुनिया स्वीकार नहीं करेगी कि एक आदमी दो पत्नियों के साथ रहे. यश चोपड़ा ने कहा था कि फिल्म की खासियत ही यही है. मैं इसे नहीं बदलना चाहूंगा. यश चोपड़ा को इस फिल्म के लिए बेस्ट डायरेक्टर का जबकि राखी गुलजार को बेस्ट सपोर्टिंग एक्ट्रेस का फिल्मफेयर अवॉर्ड मिला था.

गुलशन राय ने फिल्म को आर्ट फिल्म के तौर पर ट्रीट किया. मुंबई के सिर्फ 9 सिनेमाघरों में फिल्म को रिलीज किया. एक हफ्ता पूरा होने से पहले ही सिनेमाघर बढ़ते चले गए. सिनेमाघरों में दर्शकों को खींचकर लाने का काम इसके म्यूजिक ने किया. फिल्म का म्यूजिक मूवी रिलीज होने से पहले ही बाजार में छा गया था. म्यूजिक इंस्टेंट हिट था. फिल्म का बजट कम था ऐसे में डिस्ट्रीब्यूटर गुलशन राय ने फिल्म को सिनेमाघरों में टिकाए रखा. फिल्म के गाने अगर एक्स्ट्रा ऑर्डिनरी नहीं होते तो यह फिल्म सफल नहीं होती. फिल्म का बजट 85 लाख था. फिल्म ने 3 करोड़ का कलेक्शन किया था. यह एक मैसिव हिट फिल्म साबित हुई थी.













