Last Updated:
बॉलीवुड एक्ट्रेस जैकलीन फर्नांडिस को सुप्रीम कोर्ट से राहत नहीं मिली है. अदालत ने गुरुवार को जैकलीन को दिल्ली की पटियाला हाउस कोर्ट के फैसले के खिलाफ दायर अपनी विशेष अनुमति याचिका वापस लेने की मंजूरी दे दी. 200 करोड़ के मनी लॉन्ड्रिंग मामले में इसी साल 30 मई 2026 को स्पेशल कोर्ट ने एक्ट्रेस के खिलाफ आरोप तय किए थे. जब सुप्रीम कोर्ट से राहत की उम्मीद नहीं दिखी, तो जैकलीन के वकील ने याचिका वापस लेकर उचित कानूनी उपाय अपनाने का फैसला किया.
200 करोड़ की ठगी के मामले में फंसी हैं जैकलीन फर्नांडिस.
नई दिल्ली. बॉलीवुड एक्ट्रेस जैकलीन फर्नांडिस को लेकर एक बड़ी खबर आ रही है. सुप्रीम कोर्ट ने गुरुवार को जैकलीन को पटियाला हाउस कोर्ट के फैसले के खिलाफ दायर की गई अपनी विशेष अनुमति याचिका वापस लेने की इजाजत दे दी है. इसी साल 30 मई 2026 को स्पेशल पीएमएलए कोर्ट ने 200 करोड़ की मनी लॉन्ड्रिंग के मामले में जैकलीन फर्नांडिस के खिलाफ आरोप तय कर दिए थे.
इसी फैसले को जैकलीन फर्नांडिस ने सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी थी. लेकिन सुनवाई के दौरान जब कोर्ट का रुख कड़ा दिखा, तो जैकलीन के वकील ने याचिका वापस लेने और कानून के मुताबिक दूसरा रास्ता अपनाने की इजाजत मांगी, जिसे जस्टिस बी.वी. नागरत्ना और जस्टिस जोयमाल्या बागची की बेंच ने मंजूर कर लिया.
क्या है पूरा मामला?
सुकेश चंद्रशेखर ने जैकलीन फर्नांडिस पर लुटाए थे करोड़ों
ईडी का दावा है कि सुकेश ने ठगी की इस मोटी रकम का इस्तेमाल जैकलीन फर्नांडीज समेत कई सेलिब्रिटीज को महंगे गिफ्ट्स और सुख-सुविधाएं देने के लिए किया था. ईडी के मुताबिक, महाठग सुकेश चंद्रशेखर ने जैकलीन फर्नांडिस पर जमकर पैसा लुटाया था. उन पर करीब 5.71 करोड़ के महंगे गिफ्ट्स और सुख-सुविधाएं लेने का आरोप है. इन तोहफों में लग्जरी बैग्स, कीमती ज्वेलरी, महंगी घड़ियां और उनके परिवार के लिए गाड़ियां शामिल थीं. इतना ही नहीं, सुकेश ने जैकलीन के परिजनों के विदेशी खातों में पैसे भी ट्रांसफर किए थे.
जैकलीन फर्नांडिस ने हाई कोर्ट का खटखटाया था दरवाजा
जैकलीन फर्नांडिस ने अपने खिलाफ चल रहे इस केस और चार्जशीट को रद्द कराने के लिए दिल्ली हाई कोर्ट का दरवाजा खटखटाया था. लेकिन 3 जुलाई 2025 को हाई कोर्ट ने उनकी इस अर्जी को खारिज कर दिया. अदालत का साफ कहना था कि इस घोटाले में जैकलीन की कितनी मर्जी थी, उन्हें इसकी कितनी जानकारी थी या उनकी क्या भूमिका थी, यह सब ट्रायल के दौरान ही तय हो सकता है. आरोप तय होने से पहले के इस स्टेज पर केस को खत्म नहीं किया जा सकता और बिना पूरे ट्रायल के जांच एजेंसी के दावों को खारिज करना जल्दबाजी होगी.
About the Author

कामता प्रसाद (KP) एक अनुभवी पत्रकार हैं, जिनके पास मीडिया इंडस्ट्री में काम करने का 11 सालों का लंबा अनुभव है. वर्तमान में वह न्यूज18 हिंदी में बतौर सीनियर सब एडिटर अपनी सेवाएं दे रहे हैं. कामता को एंटरटेनमेंट …और पढ़ें













