—Advertisement—

कभी हाउसफुल से गूंजता था ये थिएटर, आज खंडहर बनी दीवारों में कैद हैं तालियों की आवाजें

Author Picture
Published On: May 10, 2026

—Advertisement—

भद्राचलम के पुराने बाजार इलाके में खड़ा गोपालकृष्ण थिएटर आज बीते दौर की एक खामोश कहानी बन चुका है. कभी यह थिएटर शहर की शान, युवाओं की पहली पसंद और परिवारों के मनोरंजन का सबसे बड़ा केंद्र हुआ करता था. यहां नई फिल्म लगते ही टिकट खिड़की पर लंबी कतारें लगती थीं और ‘हाउसफुल’ के बोर्ड आम बात थे. एनटी रामा राव, चिरंजीवी और अक्किनेनी नागेश्वर राव जैसे दिग्गज कलाकारों की फिल्मों पर दर्शकों की सीटियां और तालियां पूरे हॉल को गूंजा देती थीं. लेकिन वक्त बदला, मनोरंजन के तरीके बदले और मल्टीप्लेक्स व डिजिटल प्लेटफॉर्म्स के दौर ने सिंगल स्क्रीन थिएटरों की चमक धीरे-धीरे छीन ली. कभी सपनों से जगमगाने वाला गोपालकृष्ण थिएटर अब वीरान खंडहर में तब्दील हो चुका है. टूटी छतें, धूल से ढकी कुर्सियां और फटी हुई स्क्रीन इसकी बदहाली की कहानी बयां कर रही हैं. सोशल मीडिया पर वायरल हुई तस्वीरों ने लोगों की पुरानी यादें ताजा कर दी हैं. यह थिएटर अब सिर्फ एक इमारत नहीं, बल्कि उस दौर की आखिरी निशानी बन गया है जब सिनेमा सिर्फ फिल्म नहीं, बल्कि लोगों की भावनाओं का सबसे बड़ा उत्सव हुआ करता था.

​भद्राचलम के पुराने बाजार इलाके में खड़ा गोपालकृष्ण थिएटर आज बीते दौर की एक खामोश कहानी बन चुका है. कभी यह थिएटर शहर की शान, युवाओं की पहली पसंद और परिवारों के मनोरंजन का सबसे बड़ा केंद्र हुआ करता था. यहां नई फिल्म लगते ही टिकट खिड़की पर लंबी कतारें लगती थीं और ‘हाउसफुल’ के बोर्ड आम बात थे. एनटी रामा राव, चिरंजीवी और अक्किनेनी नागेश्वर राव जैसे दिग्गज कलाकारों की फिल्मों पर दर्शकों की सीटियां और तालियां पूरे हॉल को गूंजा देती थीं. लेकिन वक्त बदला, मनोरंजन के तरीके बदले और मल्टीप्लेक्स व डिजिटल प्लेटफॉर्म्स के दौर ने सिंगल स्क्रीन थिएटरों की चमक धीरे-धीरे छीन ली. कभी सपनों से जगमगाने वाला गोपालकृष्ण थिएटर अब वीरान खंडहर में तब्दील हो चुका है. टूटी छतें, धूल से ढकी कुर्सियां और फटी हुई स्क्रीन इसकी बदहाली की कहानी बयां कर रही हैं. सोशल मीडिया पर वायरल हुई तस्वीरों ने लोगों की पुरानी यादें ताजा कर दी हैं. यह थिएटर अब सिर्फ एक इमारत नहीं, बल्कि उस दौर की आखिरी निशानी बन गया है जब सिनेमा सिर्फ फिल्म नहीं, बल्कि लोगों की भावनाओं का सबसे बड़ा उत्सव हुआ करता था.  

विकाश रघुवंशी संस्थापक एवं प्रधान संपादक डिजिटल भारत न्यूज़ (डिजिटल मीडिया) एवं रघुवंशी वाइसहब (प्रिंट मीडिया) 📞 7403888881 विकाश रघुवंशी Digital Bharat News में पिछले छह वर्षों से सक्रिय रूप से कार्यरत हैं। डिजिटल और प्रिंट पत्रकारिता में उन्हें 6 वर्ष से अधिक का अनुभव है। सोनभद्र में पत्रकारिता करते हुए उन्होंने स्थानीय मुद्दों, जनसरोकार और प्रशासनिक खबरों पर मजबूत पकड़ बनाई है। उत्तर प्रदेश की राजनीति, क्राइम और सामाजिक विषयों पर उनकी विशेष पकड़ है। इसके अलावा इंफ्रास्ट्रक्चर, पर्यटन, शिक्षा और स्वास्थ्य जैसे विषयों पर भी वे नियमित रूप से लिखते हैं। उन्होंने बैचलर ऑफ आर्ट्स इन जर्नलिज्म एंड मास कम्युनिकेशन की डिग्री प्राप्त की है। सरल और प्रभावी भाषा में खबरों को पाठकों तक पहुँचाना उनकी विशेषता है। खबर लिखने के अलावा साहित्य पढ़ने और लिखने में भी उनकी गहरी रुचि है। || भारत का तेजी से उभरता हुआ हिन्दी समाचार पत्र ||… Read More

Related News
Home
Facebook
Telegram
X