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US-India Space deal : Peterson Space Force Base | स्पेस कंट्रोल रूम पहुंचे एयर चीफ, पीटरसन बेस के वो 5 रहस्य

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Published On: April 10, 2026

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भारतीय वायुसेना प्रमुख एयर चीफ मार्शल एपी सिंह की अमेरिका के ‘पीटरसन स्पेस फोर्स बेस’ की हालिया यात्रा ने वैश्विक रक्षा गलियारों में हलचल मचा दी है. कोलोराडो स्प्रिंग्स में स्थित यह बेस कोई साधारण सैन्य अड्डा नहीं, बल्कि ‘अमेरिकी स्पेस फोर्स’ का धड़कता हुआ दिल है, जहां से अंतरिक्ष में होने वाली हर छोटी-बड़ी हलचल और दुश्मन देशों की मिसाइलों पर 24 घंटे पैनी नजर रखी जाती है.

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पीटरसन स्पेस फोर्स बेस पहुंचे IAF चीफ

वॉशिंगटन: भारतीय वायुसेना प्रमुख एयर चीफ मार्शल एपी सिंह अमेरिका के ‘पीटरसन स्पेस फोर्स बेस’ पहुंचे थे. इस दौरे की तस्वीरें सामने आईं तो पूरी दुनिया की निगाहें एक बार फिर इस रणनीतिक ठिकाने पर टिक गईं. कोलोराडो स्प्रिंग्स में स्थित यह बेस कोई मामूली मिलिट्री अड्डा नहीं है, बल्कि ये वो जगह है जिसे ‘अंतरिक्ष का कंट्रोल रूम’ कहा जाता है. यहां पर एक ऐसी जगह है, जहां न्यूक्लियर अटैक का भी कोई असर नहीं होता है. कहा जाता है कि ये उस आने वाले समय का ब्लूप्रिंट है, जो तय करेगा कि अंतरिक्ष पर किसका राज होगा?

US अंतरिक्ष सेना का ‘पावर हाउस’

पीटरसन स्पेस फोर्स बेस (Peterson SFB) अमेरिका की सबसे नई मिलिट्री ब्रांच, ‘यूएस स्पेस फोर्स’ का धड़कता हुआ दिल है. पहले इसे पीटरसन एयर फोर्स बेस के नाम से जाना जाता था, लेकिन अंतरिक्ष युद्ध की बढ़ती संभावनाओं को देखते हुए 2021 में इसका नाम बदल दिया गया. यहां से न केवल अमेरिकी सैटेलाइट्स की सुरक्षा की जाती है, बल्कि अंतरिक्ष में मौजूद मलबे और दुश्मन देशों की संदिग्ध गतिविधियों पर 24 घंटे पैनी नजर रखी जाती है.

NORAD: यहीं से बजता है खतरे का सायरन

इस बेस का सबसे रोमांचक हिस्सा है NORAD (North American Aerospace Defense Command). ये अमेरिका और कनाडा का संयुक्त कमांड सेंटर है. इसका काम उत्तरी अमेरिका की हवाई सीमा की रक्षा करना है. अगर दुनिया के किसी भी कोने से अमेरिका की तरफ कोई मिसाइल आती है, तो उसका सबसे पहला सिग्नल इसी बेस के कंप्यूटर स्क्रीन्स पर चमकता है. यहां के कमांडर्स के पास महज चंद सेकंड होते हैं राष्ट्रपति को सूचना देने और जवाबी कार्रवाई शुरू करने के लिए.

न्यूक्लियर अटैक का नहीं होता असर

पीटरसन बेस समुद्र तल से लगभग 6,000 फीट की ऊंचाई पर स्थित है. इतनी ऊंचाई पर होने के कारण यहां से अंतरिक्ष के सिग्नल्स को रिसीव करना और रडार्स को ऑपरेट करना आसान होता है. यहां तैनात US NORTHCOM का हेडक्वाटर पूरे उत्तरी अमेरिका के लिए एक ‘अदृश्य ढाल’ की तरह काम करता है, जो साइबर हमलों से लेकर परमाणु खतरों तक हर चीज से निपटने में सक्षम है.पीटरसन बेस के पास ही मशहूर ‘शायेन माउंटेन कॉम्प्लेक्स’ (Cheyenne Mountain) भी है, जो ग्रेनाइट की पहाड़ियों के नीचे बना एक ऐसा बंकर है जिस पर परमाणु हमले का भी असर नहीं होता. किसी भी बड़े खतरे के वक्त पीटरसन बेस का सारा कंट्रोल इसी पहाड़ के नीचे शिफ्ट कर दिया जाता है.

अंतरिक्ष में कौन राज करेगा?

पीटरसन स्पेस फोर्स बेस आज की तारीख में सिर्फ एक सैन्य अड्डा नहीं, बल्कि भविष्य की हाई-टेक सुरक्षा का ब्लू-प्रिंट है. यहां की तकनीक और रणनीतियां ही यह तय करती हैं कि जमीन से हजारों किलोमीटर ऊपर अंतरिक्ष में कौन राज करेगा? भारतीय एयर चीफ की यहां मौजूदगी भारत-अमेरिका के बढ़ते रक्षा संबंधों का एक ऐसा सबूत है, जो आने वाले समय में अंतरिक्ष की रेस में भारत को नई ऊंचाई पर ले जाएगा.

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Utkarsha SrivastavaChief Sub Editor

Utkarsha Shrivastava is a seasoned digital journalist specializing in geo-politics, currently writing for World section of News18 Hindi. With over 10 years of extensive experience in digital media, she has buil…और पढ़ें

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