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1970 का दशक आज भी बॉलीवुड के इतिहास में अमिताभ बच्चन और विनोद खन्ना की सुनहरी जुगलबंदी के लिए जाना जाता है, लेकिन क्या आप जानते हैं कि इन दोनों लेजेंड्स का एक खास ‘अक्टूबर कनेक्शन’ भी था? लगातार तीन साल 1976, 1977 और 1978 में इस जोड़ी ने अक्टूबर के महीने में बॉक्स ऑफिस पर हैट्रिक लगाई, जिससे बॉलीवुड का माहौल बदल गया. ‘हेरा फेरी’ ‘परवरिश’ और ‘मुकद्दर का सिकंदर’ जैसी ब्लॉकबस्टर फिल्मों के जरिए इन दोनों स्टार्स ने न सिर्फ कमाई के नए रिकॉर्ड बनाए, बल्कि सिल्वर स्क्रीन पर दोस्ती और तकरार की ऐसी मिसाल भी पेश की जिसे आज भी एक कल्ट क्लासिक माना जाता है.
नई दिल्ली. 1970 का दशक बॉलीवुड का गोल्डन एरा था, जिसने बॉलीवुड को उसकी कुछ सबसे आइकॉनिक जोड़ियां दीं- एंग्री यंग मैन और मस्कुलर स्टार’. इस दौर में स्क्रीन पर दो एक्टर्स के दिखने का मतलब था, थिएटर्स के बाहर हाउसफुल के साइन और बॉक्स ऑफिस पर कैश की बाढ़. ये नाम थे अमिताभ बच्चन और विनोद खन्ना. हालांकि इन दोनों एक्टर्स ने कई फिल्मों में एक साथ काम किया, लेकिन एक खास ‘अक्टूबर कनेक्शन’ ने 1976, 1977 और 1978 के दौरान बॉलीवुड का डायनैमिक्स बदल दिया. लगातार तीन सालों तक, इस जोड़ी ने अक्टूबर के महीने में ब्लॉकबस्टर फिल्में दीं, जिन्होंने न सिर्फ बॉक्स ऑफिस पर रिकॉर्ड तोड़े बल्कि आज भी कल्ट क्लासिक्स मानी जाती हैं.

अक्टूबर 1976: प्रकाश मेहरा की फिल्म ‘हेरा फेरी’ 1976 में रिलीज हुई थी. यह वह समय था जब अमिताभ बच्चन सुपरस्टार बन चुके थे और विनोद खन्ना अपनी शानदार पर्सनैलिटी और एक्टिंग से उन्हें कड़ी टक्कर दे रहे थे. फिल्म में अजय (अमिताभ) और विजय (विनोद खन्ना) ने दो ठगों का रोल किया था, जो लोगों को लूटने के लिए अपनी चालाकी का इस्तेमाल करते थे. फिल्म की यूएसपी दोनों के बीच की नोकझोंक और गहरी दोस्ती थी.

फिल्म ने रिलीज होते ही तहलका मचा दिया. दर्शकों को अमिताभ की कॉमिक टाइमिंग और विनोद खन्ना का सीरियस लेकिन स्टाइलिश अंदाज पसंद आया. ‘हेरा फेरी’ की सफलता ने साबित कर दिया कि दर्शक इन दोनों स्टार्स को एक साथ देखने के लिए बेताब थे. इस फिल्म ने विनोद खन्ना को अमिताभ का सबसे बड़ा कॉम्पिटिटर बना दिया. कई फिल्म क्रिटिक्स का तो यह भी मानना था कि विनोद खन्ना ही अकेले ऐसे एक्टर थे जो फिल्म में अमिताभ बच्चन की काबिलियत को मात दे सकते थे.
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अक्टूबर 1977: ठीक एक साल बाद, अक्टूबर 1977 में बॉलीवुड के ‘मसाला किंग’ मनमोहन देसाई ने दोनों को फिल्म ‘परवरिश’ में एक साथ लाए. फिल्म में अमिताभ बच्चन (अमित) और विनोद खन्ना (किशन) ने भाइयों का रोल किया था, जिनमें से एक पुलिस ऑफिसर बन जाता है और दूसरा क्राइम की दुनिया में चला जाता है.

‘परवरिश’ उस साल की सबसे बड़ी हिट फिल्मों में से एक थी. फिल्म के गाने खासकर ‘हम प्रेमी प्रेम करना जाने’ आज भी गुनगुनाए जाते हैं. विनोद खन्ना के कैरेक्टर की गहराई और अमिताभ के साथ उनके टकराव वाले सीन ने दर्शकों को अपनी सीटों से बांधे रखा. मनमोहन देसाई ने दोनों स्टार्स के स्क्रीन टाइम और वेट को इतनी खूबसूरती से बैलेंस किया कि फैंस इस बात पर बंट गए कि कौन बेहतर एक्टर है. यह वह समय था जब ‘अमिताभ वर्सेस विनोद खन्ना’ की लड़ाई मीडिया में हेडलाइन बनने लगी थी.

अक्टूबर 1978: अक्टूबर कनेक्शन की इस हैट-ट्रिक की सबसे बड़ी हिट 1978 में आई थी. फिल्म थी ‘मुकद्दर का सिकंदर’. प्रकाश मेहरा के डायरेक्शन में बनी यह फिल्म इंडियन सिनेमा की सबसे आइकॉनिक फिल्मों में से एक मानी जाती है. अमिताभ ने सिकंदर का रोल किया, जो एक अनाथ है और अपनी पहचान खुद बनाता है. विनोद खन्ना विशाल के रोल में दिखे, जो सिकंदर का सबसे अच्छा दोस्त बन जाता है.

यह फिल्म उस साल की सबसे ज्यादा कमाई करने वाली फिल्म थी. ट्रेड रिपोर्ट्स के मुताबिक, इस फिल्म के टिकट कई गुना ज्यादा कीमत पर ब्लैक में बिके थे. फिल्म की इमोशंस, कुर्बानी और दोस्ती की कहानी ने लोगों को रुला दिया. इन तीन सालों (1976-1978) में अक्टूबर महीने ने बॉलीवुड को मल्टी-स्टारर फिल्मों के सुनहरे भविष्य का एहसास कराया. अक्टूबर में रिलीज हुई इन तीनों फिल्मों ने न सिर्फ बॉक्स ऑफिस के रिकॉर्ड तोड़े, बल्कि एक ऐसी विरासत भी छोड़ी जिसे आज भी ‘बॉलीवुड का गोल्डन एरा’ कहा जाता है.


