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आज चैत्र नवरात्रि की दुर्गा अष्टमी: जानें कन्या पूजन का शुभ समय, विधि, भोग और मां महागौरी पूजा का महत्व

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By Vikash Raghuwanshi Editor
Published On: March 26, 2026

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चकरिया/कोन/सोनभद्र |चैत्र नवरात्रि की दुर्गा अष्टमी और महानवमी का विशेष धार्मिक महत्व माना जाता है। नवरात्रि के अंतिम दो दिन श्रद्धालुओं के लिए अत्यंत फलदायी माने जाते हैं। धार्मिक मान्यता के अनुसार इन दिनों कन्या पूजन, हवन, कुलदेवी पूजा, भंडारा और देवी आराधना करने से नौ दिनों की पूजा का पूर्ण फल प्राप्त होता है।

इस पावन अवसर पर मां अमिला देवी धाम में मां अमिला भवानी का विशेष श्रृंगार श्रद्धा और भक्ति के साथ संपन्न कराया गया। इस विशेष श्रृंगार का आयोजन श्यामराज गुप्ता (एडवोकेट), मुन्ना लाल गुप्ता, विकाश रघुवंशी, धर्मेंद्र गुप्ता, अरुण जायसवाल एवं रमेश चतुर्वेदी द्वारा कराया गया, जिसमें बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं ने पहुंचकर माता रानी के दर्शन किए और आशीर्वाद प्राप्त किया।

धार्मिक पंचांग के अनुसार महाष्टमी तिथि 25 मार्च 2026 दोपहर 1:50 बजे से प्रारंभ होकर 26 मार्च 2026 सुबह 11:48 बजे तक रहेगी। वहीं महानवमी तिथि 26 मार्च 2026 सुबह 11:48 बजे से प्रारंभ होकर 27 मार्च 2026 तक रहेगी।

अष्टमी और नवमी का महत्व– श्रीमद् देवी भागवत पुराण और मार्कण्डेय पुराण के अनुसार महाष्टमी और महानवमी पर देवी की शक्ति अपने पूर्ण प्रभाव में प्रकट होती है। दुर्गाष्टमी को वह दिन माना जाता है जब देवी ने असुरों का संहार कर धर्म की रक्षा की। महाष्टमी पर पूजा करने से शत्रु, भय, रोग और दोषों से मुक्ति मिलती है, जबकि महानवमी पर श्रद्धापूर्वक पूजा करने से करोड़ों यज्ञों के समान पुण्य प्राप्त होता है।

मां महागौरी की पूजा– महाष्टमी के दिन मां महागौरी की पूजा की जाती है। मां महागौरी देवी दुर्गा का आठवां स्वरूप हैं, जो पवित्रता, शांति और करुणा की प्रतीक मानी जाती हैं। उनकी पूजा से क्रोध, ईर्ष्या, मानसिक तनाव और नकारात्मकता दूर होती है तथा जीवन में शांति और सकारात्मकता आती है।

मां सिद्धिदात्री की पूजा– महानवमी पर मां सिद्धिदात्री की आराधना की जाती है। मां सिद्धिदात्री भक्तों को सिद्धियां प्रदान करती हैं और मनोकामनाएं पूर्ण करती हैं। धार्मिक मान्यता है कि इस दिन सच्चे मन से पूजा करने पर विशेष कृपा प्राप्त होती है।

कन्या पूजन की विधि– अष्टमी और नवमी पर 2 से 10 वर्ष तक की नौ कन्याओं को आमंत्रित कर उनका पूजन किया जाता है। उनके चरण धोकर तिलक लगाया जाता है, फिर हलवा, पूरी और काला चना का भोग कराया जाता है तथा उपहार और दक्षिणा देकर आशीर्वाद लिया जाता है। मान्यता है कि कन्या पूजन के बिना नवरात्रि की पूजा अधूरी मानी जाती है।

विकाश रघुवंशी संस्थापक एवं प्रधान संपादक डिजिटल भारत न्यूज़ (डिजिटल मीडिया) एवं रघुवंशी वाइसहब (प्रिंट मीडिया) 📞 7403888881 विकाश रघुवंशी Digital Bharat News में पिछले छह वर्षों से सक्रिय रूप से कार्यरत हैं। डिजिटल और प्रिंट पत्रकारिता में उन्हें 6 वर्ष से अधिक का अनुभव है। सोनभद्र में पत्रकारिता करते हुए उन्होंने स्थानीय मुद्दों, जनसरोकार और प्रशासनिक खबरों पर मजबूत पकड़ बनाई है। उत्तर प्रदेश की राजनीति, क्राइम और सामाजिक विषयों पर उनकी विशेष पकड़ है। इसके अलावा इंफ्रास्ट्रक्चर, पर्यटन, शिक्षा और स्वास्थ्य जैसे विषयों पर भी वे नियमित रूप से लिखते हैं। उन्होंने बैचलर ऑफ आर्ट्स इन जर्नलिज्म एंड मास कम्युनिकेशन की डिग्री प्राप्त की है। सरल और प्रभावी भाषा में खबरों को पाठकों तक पहुँचाना उनकी विशेषता है। खबर लिखने के अलावा साहित्य पढ़ने और लिखने में भी उनकी गहरी रुचि है। || भारत का तेजी से उभरता हुआ हिन्दी समाचार पत्र ||… Read More

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