विंढमगंज (सोनभद्र)। स्थानीय सूर्य मंदिर के प्रांगण में आज आस्था और श्रद्धा का अद्भुत दृश्य देखने को मिला, जब लगभग 400 महिलाओं ने चैत छठ व्रत का पावन त्योहार पूरे विधि-विधान के साथ बड़े ही धूमधाम से मनाया। सुबह से ही मंदिर परिसर में श्रद्धालुओं की भारी भीड़ उमड़ पड़ी, जिससे पूरा वातावरण भक्तिमय हो गया। महिलाएं पारंपरिक वेशभूषा में सज-धजकर भगवान सूर्य की उपासना में लीन नजर आईं।

चैत छठ का अपना एक विशेष महत्व होता है। यह पर्व वर्ष में दो बार मनाया जाता है, जिसमें कार्तिक छठ के साथ-साथ चैत मास में मनाया जाने वाला छठ भी अत्यंत पवित्र और फलदायी माना जाता है। मान्यता है कि इस व्रत को करने से सुख-समृद्धि, संतान सुख और परिवार की खुशहाली प्राप्त होती है। विंढमगंज में इस चैत छठ को भी बड़े ही उत्साह और श्रद्धा के साथ मनाया गया।

छठ पर्व भारतीय संस्कृति का एक अत्यंत अनुशासित और कठिन व्रत माना जाता है, जिसमें स्वच्छता, शुद्धता और नियमों का विशेष ध्यान रखा जाता है। इस व्रत को करने वाली महिलाएं पूरे चार दिनों तक कठोर नियमों का पालन करती हैं। व्रत की शुरुआत ‘नहाय-खाय’ से होती है, जिसमें व्रती शुद्ध और सात्विक भोजन ग्रहण करती हैं। इसके बाद ‘खरना’ के दिन व्रती दिनभर उपवास रखकर शाम को गुड़-चावल की खीर का प्रसाद ग्रहण करती हैं।

इसके उपरांत छठ पर्व का सबसे महत्वपूर्ण चरण संध्या अर्घ्य और प्रातः अर्घ्य होता है, जिसमें व्रती महिलाएं डूबते और उगते सूर्य को अर्घ्य अर्पित करती हैं। इस दौरान व्रती निर्जला व्रत रखती हैं, अर्थात वे जल तक ग्रहण नहीं करतीं। पूजा में बांस की टोकरी (डाला) में ठेकुआ, फल, गन्ना एवं अन्य प्रसाद सामग्री सजाकर भगवान सूर्य और छठी मैया को अर्पित किया जाता है।
सूर्य मंदिर परिसर में महिलाओं ने पूरी श्रद्धा, नियम और अनुशासन के साथ पूजा-अर्चना की। घाटों एवं मंदिर परिसर की साफ-सफाई का विशेष ध्यान रखा गया। इस अवसर पर सामूहिक पूजा के माध्यम से सामाजिक एकता और भाईचारे का भी संदेश देखने को मिला।

स्थानीय प्रशासन एवं मंदिर समिति द्वारा समुचित व्यवस्थाएं सुनिश्चित की गईं, जिससे श्रद्धालुओं को किसी प्रकार की असुविधा न हो। कुल मिलाकर, चैत छठ पर्व का यह आयोजन क्षेत्र में आस्था, परंपरा और सांस्कृतिक समरसता का उत्कृष्ट उदाहरण प्रस्तुत करता है।


