कोन/बागेशोती/सोनभद्र। क्षेत्र के शामिलवा गांव में सरकारी जमीन को लेकर लंबे समय से चला आ रहा विवाद अब गंभीर रूप लेता जा रहा है। गांव में वर्ष 1998 में 32 लोगों के नाम पर किए गए भूमि पट्टे को लेकर अब 700 से अधिक ग्रामीणों ने खुलकर विरोध दर्ज कराया है। ग्रामीणों का आरोप है कि उस समय सरकारी जमीन का पट्टा नियमों के विपरीत और गलत तरीके से किया गया था, जिसकी निष्पक्ष जांच कराई जानी चाहिए।

ग्रामीणों के अनुसार संबंधित भूमि गांव की सार्वजनिक उपयोगिता से जुड़ी रही है और वर्तमान में कुछ लोग उस जमीन पर कब्जा स्थापित करने का प्रयास कर रहे हैं, जिससे पूरे गांव में तनाव की स्थिति उत्पन्न हो गई है। विवाद इतना बढ़ गया कि बड़ी संख्या में ग्रामीण एकजुट होकर प्रशासन से हस्तक्षेप की मांग करने लगे।
आदिवासी समाज सहित गांव के विभिन्न वर्गों के लोगों ने इस मुद्दे पर खुलकर अपनी आपत्ति दर्ज कराई है। विरोध दर्ज कराने वालों में सुरेंद्र कुमार उरांव, संजय चेरो, अशोक उरांव, मंगरू उरांव, बिहारी उरांव, बीरेंद्र सिंह, मानिक चंद्र उरांव, उदय भुइया, मुन्ना सिंह, जोगिंद्रनगर उरांव, गोविंद राम, गुलाबचंद उरांव तथा मिनी राम प्रमुख रूप से शामिल हैं।
ग्रामीणों का कहना है कि यदि वर्ष 1998 में किया गया पट्टा नियमानुसार हुआ है तो प्रशासन दस्तावेज सार्वजनिक करे, और यदि उसमें अनियमितता पाई जाती है तो उसे तत्काल निरस्त किया जाए। उनका आरोप है कि इस प्रक्रिया में उस समय गांव के व्यापक हितों की अनदेखी की गई थी।
ग्रामीणों ने यह भी मांग की है कि संबंधित सरकारी भूमि को किसी एक व्यक्ति या सीमित समूह के नाम रखने के बजाय गांव के सार्वजनिक उपयोग—जैसे सामुदायिक भवन, खेल मैदान, विद्यालय विस्तार, पंचायत उपयोग या अन्य विकास कार्यों—के लिए सुरक्षित रखा जाए।

गांव में बढ़ते विवाद को देखते हुए स्थानीय स्तर पर प्रशासनिक हस्तक्षेप की आवश्यकता महसूस की जा रही है। ग्रामीणों का कहना है कि यदि समय रहते समाधान नहीं निकाला गया तो स्थिति और अधिक तनावपूर्ण हो सकती है।
फिलहाल प्रशासन की ओर से इस मामले में कोई अंतिम निर्णय सामने नहीं आया है, लेकिन ग्रामीणों ने स्पष्ट किया है कि वे न्याय मिलने तक अपनी आवाज उठाते रहेंगे।

अब सबकी नजर प्रशासनिक जांच और आगामी कार्रवाई पर टिकी हुई है कि आखिर इस विवादित जमीन के मामले में क्या निर्णय लिया जाता है और क्या गांव के सैकड़ों लोगों की मांगों को गंभीरता से सुना जाता है।


