नई दिल्ली: देश की दूसरी स्तरीय फुटबॉल प्रतियोगिता आई-लीग का पुनर्गठन कर इसे आगामी सत्र से इंडियन फुटबॉल लीग (आईएफएल) के नाम से जाना जाएगा. नया सत्र 21 फरवरी से शुरू होगा और इसमें क्लब बहुलांश हिस्सेदार की भूमिका निभाएंगे.
आई-लीग का नाम बदलने का फैसला बुधवार को क्लब प्रतिनिधियों और अखिल भारतीय फुटबॉल महासंघ (एआईएफएफ) के अधिकारियों की बैठक में लिया गया, जिसकी औपचारिक घोषणा यहां संवाददाता सम्मेलन में की गई. शिलांग लाजोंग के मालिक लार्सिंग मिंग ने संवाददाता सम्मेलन में कहा:
आज की बैठक में हमने फैसला लिया है कि आई-लीग का पुनर्गठन कर इसे इंडियन फुटबॉल लीग नाम दिया जाएगा. यह एक ऐतिहासिक निर्णय है, हालांकि इसे एआईएफएफ कार्यकारी समिति की मंजूरी की जरूरत होगी. हम लीग की एक नई शुरुआत कर रहे हैं. क्लब स्वयं लीग के संचालन में प्रमुख भूमिका निभाएंगे, ठीक वैसे ही जैसे इंग्लिश प्रीमियर लीग जैसी दुनिया की शीर्ष लीगों में होता है.
यह घोषणा भारतीय फुटबॉल में हालिया संकट की पृष्ठभूमि में आई है, जब एआईएफएफ और उसके पूर्व व्यावसायिक साझेदार फुटबॉल स्पोर्ट्स डेवलपमेंट लिमिटेड (एफएसडीएल) पिछले साल आठ दिसंबर के बाद मास्टर राइट्स एग्रीमेंट (एमआरए) का नवीनीकरण नहीं कर सके थे.
एफएसडीएल द्वारा आयोजित शीर्ष स्तरीय इंडियन सुपर लीग (आईएसएल) और आई-लीग दोनों को रोक दिया गया था, जिन्हें खेल मंत्रालय के हस्तक्षेप के बाद दोबारा शुरू किया गया. आईएसएल 14 फरवरी से शुरू होगा, जो आई-लीग (अब इंडियन फुटबॉल लीग) से एक सप्ताह पहले है.
देश की शीर्ष लीग को पहले नेशनल फुटबॉल लीग (एनएफएल) कहा जाता था, जो 1996 से 2007 तक चली। इसके बाद इसे आई-लीग के रूप में पुनः ब्रांड किया गया। 2014 में आईएसएल की शुरुआत हुई और वह शीर्ष स्तरीय लीग बन गई, जबकि आई-लीग दूसरी श्रेणी की प्रतियोगिता बन गई।
पश्चिम बंगाल की डायमंड हार्बर और मिजोरम की चनमारी एफसी को आई-लीग 2024-25 से पदोन्नति मिली है, जिससे 2025-26 के संक्षिप्त सत्र में 11 क्लबों की भागीदारी संभावित है. गोवा की चर्चिल ब्रदर्स की भागीदारी को लेकर असमंजस बना हुआ है. शुरुआत में उन्हें पिछली आई-लीग का चैंपियन घोषित कर आईएसएल में पदोन्नत किया गया था, लेकिन बाद में खेल पंचाट न्यायालय (सीएएस) ने इंटर काशी को चैंपियन करार दिया और वाराणसी स्थित क्लब को आईएसएल में प्रमोट किया गया. चर्चिल ब्रदर्स ने एआईएफएफ के खिलाफ दिल्ली उच्च न्यायालय का रुख किया है और मामला अभी लंबित है.
टूर्नामेंट के संभावित 10 क्लब डायमंड हार्बर, चनमारी एफसी, रियल कश्मीर, गोकुलम केरल, राजस्थान यूनाइटेड, डेम्पो एससी, नामधारी एफसी, शिलांग लाजोंग, श्रीनिधि डेक्कन और आइजोल एफसी है. लीग में कितनी टीमें हिस्सा लेगी यह दो फरवरी के बाद स्पष्ट होगा, जो 2025-26 सत्र के संचालन खर्च में क्लबों के हिस्से की राशि जमा करने की अंतिम तिथि है.
मौजूदा (2025-26) सत्र के लिए लीग की कुल लागत 3.25 करोड़ रुपये आंकी गई है, जिसमें से 60 प्रतिशत यानी करीब दो करोड़ रुपये क्लबों को वहन करने होंगे. इस हिसाब से प्रत्येक क्लब का योगदान लगभग 20 लाख रुपये होगा. एआईएफएफ की हिस्सेदारी 40 प्रतिशत (30 प्रतिशत + 10 प्रतिशत) होगी, क्योंकि व्यावसायिक साझेदार के लीग शुरू होने से पहले जुड़ने की संभावना कम है.
लीग में पहली बार संचालन समिति और प्रबंधन समिति का गठन किया जाएगा. संचालन समितिअंतिम निर्णय लेने वाली संस्था होगी, जबकि प्रबंधन समिति रोजमर्रा के कामकाज को देखेगी. लीग में अगर 11 क्लब हिस्सा लेते हैं तो कुल 80 मुकाबले खेले जाएंगे, जबकि 10 क्लबों की स्थिति में मैचों की संख्या 70 से कम रहेगी.
पहले चरण में सभी क्लब होम और अवे (घरेल और प्रतिद्वंद्वी टीम के मैदान पर) आधार पर एकल राउंड रॉबिन लीग खेलेंगे। दूसरे चरण में टीमों को दो समूहों में बांटा जाएगा, इसें शीर्ष छह एक समूह में और शेष पांच दूसरे समूह में (अगर 11 क्लब हुए) होगें.


